गांधीनगर। देश में समान नागरिक संहिता की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा है। गुजरात में यूसीसी का विधेयक अब कानून बन चुका है — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 सितंबर 2026 को इस पर अपनी मुहर लगा दी थी और 1 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ यह कानून बन गया। अब विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े नियम राज्य के हर नागरिक के लिए एक जैसे होंगे। उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा राज्य है, जहां यह व्यवस्था अमल में आई है।
इसी साल मार्च में राज्य विधानसभा ने इस विधेयक को हरी झंडी दी थी। कानून का दायरा विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप तक फैला है — किसी भी धर्म या समुदाय के लिए अलग नियम नहीं रहेंगे।
क्या-क्या बदलेगा
नए कानून के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में ये अहम बदलाव होंगे:
- विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा — तय समय-सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप को भी तय प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा।
- उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा।
- एकविवाह का नियम लागू होगा — पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह प्रतिबंधित रहेगा।
- बिना वसीयत मृत्यु की स्थिति में जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार कानून में तय होंगे।
- सरोगेसी और गोद लेने से जन्मे बच्चों तथा लिव-इन से जन्मे बच्चों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
कब क्या हुआ
अक्टूबर 2022 में राज्य सरकार ने यूसीसी के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने का ऐलान किया था। फरवरी 2024 में विशेषज्ञ समिति बनी, जिसने मार्च 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। उसी महीने विधानसभा ने विधेयक पारित किया। 17 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी और 1 अक्टूबर को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित हुई।
अमल की तारीख अधिसूचना से तय होगी
कानून में यह व्यवस्था रखी गई है कि इसे लागू करने की औपचारिक तारीख राज्य सरकार राजपत्र में अलग से अधिसूचित करेगी। यानी मंजूरी और अधिसूचना के बाद अमल की अंतिम तारीख सरकार की ओर से घोषित की जाएगी।
