भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए नशे के पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। उन्होंने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सरकार ने वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
17 गुप्त ड्रग लैब का भंडाफोड़, टास्क फोर्स बनेगी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मादक पदार्थ बनाने वाली 17 गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया जा चुका है। आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई तेज की गई है। केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने और एनडीपीएस के मामलों के लिए विशेष अदालतों की शीघ्र स्थापना पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस अब मादक पदार्थों के साथ-साथ साइबर अपराध, अवैध हथियारों और संगठित अपराध के नेटवर्क पर भी सतत प्रहार कर रही है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को कानून-व्यवस्था के साथ सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के निर्देश दिए।
शाह के जाने के बाद सीएम ने संभाली बैठक की कमान
गौरतलब है कि इस समीक्षा बैठक में पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होने वाले थे, लेकिन व्यस्तता के चलते वे देर शाम भोपाल से दिल्ली रवाना हो गए। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम का राज्यों में आकर व्यवस्थाओं का बारीकी से अध्ययन करना और मार्गदर्शन देना अत्यंत सराहनीय पहल है।
बैठक में कानून-व्यवस्था, तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, मादक पदार्थ नियंत्रण, साइबर अपराध, आतंकवाद प्रतिरोध, पुलिस आधुनिकीकरण और पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा समन्वय जैसे विषयों की समीक्षा हुई। बैठक में खुफिया ब्यूरो के निदेशक और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
नए कानूनों में MP अव्वल, 90 दिन में 69% आरोप पत्र
बैठक में प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश ने उल्लेखनीय काम किया है। राज्य में 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने की दर 69 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 59 प्रतिशत से अधिक है। ई-समन की सीधी डिलीवरी में राज्य देश में सबसे आगे है, जबकि ई-साक्ष्य का कवरेज पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गया है। सभी जिलों में 57 मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध हैं।
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