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चांडाल योग क्या है? गुरु-राहु की युति से बनता है ये योग, जानें प्रभाव और शांति के उपाय

चांडाल योग — गुरु और राहु की युति

कुंडली में कुछ योग ऐसे होते हैं जिन्हें ज्योतिष में अशुभ माना गया है। इन्हीं में से एक है चांडाल योग — जिसे गुरु चांडाल योग या गुरु चांडाल दोष भी कहा जाता है। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग कैसे बनता है, इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है और शांति के कौन से उपाय बताए गए हैं।

चांडाल योग कैसे बनता है?

ज्योतिष के अनुसार जब देवगुरु बृहस्पति (गुरु) राहु या केतु के साथ एक ही राशि या एक ही भाव में स्थित होते हैं, तो कुंडली में गुरु चांडाल दोष का निर्माण होता है। राहु-केतु को मायावी ग्रह माना गया है और इनका गुरु, सूर्य और चंद्रमा से शत्रुवत संबंध होता है। इसलिए गुरु के साथ युति करने पर राहु या केतु शुभ फल देने के बजाय नकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। विशेष रूप से गुरु और राहु की युति को ज्यादा गंभीर माना गया है। ग्रहों के राशि परिवर्तन से यह दोष बनता भी है और समाप्त भी हो जाता है।

जीवन पर संभावित प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दोष के प्रभाव से जातक का धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो सकता है। मान-सम्मान में गिरावट, व्यापार और नौकरी में नुकसान की संभावना रहती है। घर-परिवार की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है और मानसिक अशांति बनी रह सकती है। यदि राहु अधिक बलवान हो तो व्यक्ति गलत संगत में पड़ सकता है। धन हानि, मानसिक तनाव, गलत फैसले, पढ़ाई में बाधा और परिवार में मनमुटाव को इस दोष के लक्षण माना गया है।

शांति के उपाय

चांडाल योग की निवृत्ति के लिए बृहस्पति की शांति के उपाय बताए गए हैं। गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें और हल्दी, चना दाल, पीली मिठाई जैसी पीली चीजों का दान करें। गुरुवार को पीली दालों का दान किसी जरूरतमंद को करना भी लाभकारी माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। “ॐ गुरुवे नमः” मंत्र का रोज 108 बार जाप करने से करियर, शिक्षा और व्यवसाय से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं — ऐसी मान्यता है। इसके अलावा जल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें, पंडितों को भोजन दान करें और वैदिक शास्त्रों का पाठ करें। स्थायी शांति के लिए गुरु चांडाल योग शांति पूजा कराना भी उपायों में से एक माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है।

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