पुणे ब्यूरो। भारत की पहली स्वदेशी HPV वैक्सीन ‘Cervavac’ को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बड़ी मान्यता मिली है। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा विकसित इस वैक्सीन को WHO ने प्रीक्वालिफिकेशन दे दिया है। इस फैसले के बाद अब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां इस वैक्सीन की खरीद कर दुनिया भर के टीकाकरण कार्यक्रमों में इसका इस्तेमाल कर सकेंगी।

सीरम इंस्टीट्यूट के लिए यह एक और बड़ी उपलब्धि है — यह कंपनी के जैविक उत्पादों के लिए मिला 32वां WHO प्रीक्वालिफिकेशन है। इससे पहले कंपनी की कई वैक्सीनें पहले ही WHO की सूची में शामिल हो चुकी हैं। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस उपलब्धि की घोषणा सोमवार को की गई।
किन बीमारियों से मिलेगा बचाव?
Cervavac एक रिकॉम्बिनेंट क्वाड्रिवैलेंट HPV वैक्सीन है, जो HPV के 6, 11, 16 और 18 टाइप को निशाना बनाती है। यह 9 से 26 साल तक की लड़कियों और लड़कों के लिए निर्धारित है। लड़कियों और महिलाओं में यह HPV टाइप 16 और 18 से होने वाले सर्वाइकल, वल्वर, वजाइनल और एनल कैंसर तथा टाइप 6 और 11 से होने वाले जेनिटल वार्ट्स से बचाव करती है। लड़कों और पुरुषों में यह एनल कैंसर और जेनिटल वार्ट्स से सुरक्षा देती है।
स्वदेशी विकास की कहानी
इस वैक्सीन को भारत में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इसका विकास जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के सहयोग से हुआ है, साथ ही WHO की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) और गेट्स फाउंडेशन का भी योगदान रहा है।
सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने कहा, “Cervavac को WHO प्रीक्वालिफिकेशन मिलना HPV के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह उपलब्धि वैक्सीन की प्रभावशीलता को दर्शाती है और देशों के लिए HPV से जुड़े जोखिमों से बचाव का अवसर बनाती है। हमें खुशी है कि यह स्वदेशी वैक्सीन इस मुकाम तक पहुंची है, और हम टीकाकरण कवरेज बढ़ाने तथा वैश्विक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने में योगदान देने के लिए तत्पर हैं।”
WHO की सूची में शामिल होने का मतलब है कि अब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां Cervavac की खरीद कर सकती हैं, जिससे दुनियाभर के टीकाकरण कार्यक्रमों में इसका इस्तेमाल संभव होगा। जानकारों का मानना है कि इस मान्यता से विकासशील देशों में सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ टीकाकरण अभियान को रफ्तार मिलेगी।
स्रोत: एएनआई; द ब्रिज क्रॉनिकल; ईटी एज इनसाइट्स
