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आज हमारी चर्चा बुध की महादशा मे सूर्य चंद्र और मंगल की अन्तर्दशा के परिणामों को लेकर होगी।
बुध की महादशा मे सूर्य की अन्तर्दशा दस माह की होती है। यदि सूर्य उच्च राशि स्व राशि या मित्र राशि के हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को व्यवसाय मे प्रसिद्धि प्राप्त होती है। जातक को पैतृक संपत्ति भी प्राप्त हो सकती है यदि अष्टम भाव strong स्थिति मे हो। नौकरी मे promotion की संभावना काफी बढ़ जाती है।
बुध अशुभ प्रभाव युक्त हो और सूर्य नीच राशि के हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक का आत्म विश्वास कमजोर हो जाता है। जातक की प्रतिष्ठा की हानि होती है। जातक को पित्त संबंधी कष्ट होता है। यदि नवम भाव और नवमेश की स्थिति कुंडली मे खराब हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक के पिता का स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है।
बुध की महादशा मे चन्द्रमा की अन्तर्दशा एक वर्ष पांच माह की होती है। यदि चन्द्रमा कुंडली मे उच्च राशि या स्व राशि के होकर बैठे हो और बुध भी कुंडली मे strong position मे हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक की प्रवृत्ति पढ़ने लिखने और ज्ञान प्राप्ति की होती है। जातक का झुकाव कला, प्राकृतिक सौंदर्य की तरफ बढ़ता है। यदि बुध और चन्द्रमा अशुभ प्रभाव मे हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को मानसिक कष्ट होता है। यदि चतुर्थ भाव का स्वामी भी पीड़ित हो तो जातक की माता का स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है।
बुध की महादशा मे मंगल की अन्तर्दशा 11 माह 27 दिन की होती है। यदि मंगल और बुध दोनों ही कुंडली मे strong position मे हो तो इस मंगल की अन्तर्दशा मे जातक को भूमि पशु और कृषि संबंधी सुख प्राप्त होते है। जातक का यदि न्यायालय मे कोई मुकदमा चल रहा हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक को विजय प्राप्त होती है। यदि मंगल अशुभ प्रभाव मे हो या नीच राशि के हो तो इस अन्तर्दशा मे जातक के अपने छोटे भाइयों से संबंध भी खराब हो सकते है। जातक को भूमि संबंधी नुकसान भी हो सकता है। जातक व्यर्थ के तर्क वितर्क मे भी संलग्न रह सकता है।
बुध की महादशा मे राहु गुरु और शनि की अन्तर्दशा परिणामों की चर्चा अगली पोस्ट मे करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
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