सोमवार को भारतीय शेयर बाज़ार में तेज़ बिकवाली देखने को मिली। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,033.66 अंक यानी 1.40 फीसदी गिरकर 72,862.08 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 360.25 अंक यानी 1.56 फीसदी टूटकर 22,780.25 पर बंद हुआ। दोनों ही सूचकांक अप्रैल 2026 की शुरुआत के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुए। बता दें कि शुक्रवार को सेंसेक्स 315 अंक चढ़कर 73,895.74 पर और निफ्टी 77 अंक बढ़कर 23,140.50 पर बंद हुआ था।
कारोबार की शुरुआत से ही बाज़ार दबाव में था। सेंसेक्स दिन के कारोबार में एक समय 972 अंक गिरकर 72,923.93 के दिन के निचले स्तर तक लुढ़क गया था, जबकि निफ्टी ने 23,000 का स्तर तोड़ा — ऐसा अप्रैल 2026 के बाद पहली बार हुआ है। दिन के कारोबार के दौरान बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण करीब 5 लाख करोड़ रुपये घट गया।

बाज़ार क्यों गिरा — तीन बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल के भाव में तेज़ बढ़ोतरी रही। ब्रेंट क्रूड दिन के कारोबार में 104 से 107 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का होरमुज़ जलडमरूमध्य दोबारा खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया, जिससे तेल आपूर्ति बाधित रहने का डर बढ़ गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, इसलिए महंगा तेल महंगाई बढ़ाता है, आयात बिल बढ़ाता है और कंपनियों के मुनाफ़े पर सीधा दबाव डालता है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी बिकवाली: अमेरिका के 10 साल के ट्रेज़री बॉन्ड की यील्ड करीब 5.2 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जापान की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड भी 1996 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची। जब अमेरिका में सुरक्षित निवेश पर इतना ज़्यादा रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाज़ारों से पैसा निकाल लेते हैं। आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सितंबर में अब तक 17,131 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जबकि जुलाई और अगस्त में उन्होंने खरीदारी की थी।
3. बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली: गिरावट पूरे बाज़ार में फैली रही। एचडीएफसी बैंक सूचकांक को सबसे ज़्यादा नीचे खींचने वाला शेयर रहा, उसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज़, आईसीआईसीआई बैंक और भारती एयरटेल का नंबर आया। निफ्टी पीएसयू बैंक करीब 2.8 फीसदी और निफ्टी मेटल करीब 1.8 फीसदी टूटे। लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जबकि इंडिया विक्स में करीब 14–15 फीसदी का उछाल आया, जो निवेशकों के बढ़ते डर को दिखाता है। रुपया भी दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले 95.90 के करीब पहुंच गया।
बाज़ार के जानकारों के मुताबिक अब सबकी नजर कच्चे तेल की चाल, अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, होरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति और विदेशी निवेशकों की रकम पर टिकी है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि बाहरी जोखिम कम हुए बिना तेज़ी की हर रैली में बिकवाली लौट सकती है।
स्रोत: ईटी नाउ, मनीकंट्रोल, द हिंदू बिज़नेसलाइन, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी प्रॉफिट — 28 सितंबर 2026 की लाइव बाज़ार रिपोर्ट्स और याहू फाइनेंस चार्ट डेटा।
