भोपाल ब्यूरो
सार: धनतेरस के दिन राजधानी भोपाल में सफाई संकट और गहरा गया है — भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल के तहत नगर निगम के लगभग 15,000 कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, गुरुवार को आंदोलनकारियों ने निगम मुख्यालय अटल भवन की बिजली काट दी और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया, और अब शुक्रवार से पेयजल आपूर्ति रोकने की चेतावनी ने 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शनों वाले शहर की चिंता बढ़ा दी है।
दीपावली के त्योहार की शुरुआत के साथ ही भोपाल की सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं। भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल के तीसरे दिन शुक्रवार को शहर के 85 वार्डों में घर-घर से कचरा उठाने का काम ठप रहा। न्यू मार्केट सहित शहर के बड़े बाजारों में कूड़ेदान भरकर बाहर बहने लगे हैं और कई जगहों पर कचरा सड़कों पर बिखरा हुआ है। त्योहार के दिनों में बाजारों में बढ़ती भीड़ के बीच यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
भोपाल में रोजाना करीब 850 टन कचरा निकलता है, जो दीपावली के दिनों में बढ़कर 1,000 टन तक पहुंच जाता है। सामान्य दिनों में 400 से अधिक वाहन घर-घर जाकर कचरा एकत्र करते हैं और उसे शहर के 17 ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाते हैं, जहां से कचरे को आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र भेजा जाता है। हड़ताल के कारण यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। पहले दो दिन में ही 2,100 टन से अधिक कूड़ा जमा होने की बात सामने आई थी, और तीसरे दिन भी संग्रहण बंद रहने से ढेर और बढ़ गए हैं।
भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल अब सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रही
यह आंदोलन अब केवल सफाई कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा है। नगर निगम के कुल करीब 18,000 कर्मचारियों में से लगभग 15,000 हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इनमें करीब 14,000 दैनिक वेतनभोगी और 1,000 आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं, जो शहर के 21 जोन और 85 वार्डों में काम करते हैं। जलापूर्ति, अग्निशमन सेवा, कंप्यूटर संचालन, विद्युत, भवन निर्माण अनुमति, उद्यान और अतिक्रमण हटाने वाले दस्ते जैसे विभागों के कर्मचारी भी काम बंद करके आंदोलन में शामिल हो गए हैं।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार भोपाल में करीब सात हजार सफाईकर्मी हैं, जिनके अलावा लगभग छह हजार अन्य विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। इन कर्मचारियों ने गुरुवार से काम बंद कर दिया है और शुक्रवार को भी काम पर नहीं लौटने की बात कही है। संगठन का दावा है कि प्रदेशभर में दो लाख से अधिक सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं और अन्य शहरी निकायों में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने के बाद अब तीसरे दिन इसका दायरा और फैल गया है।
अटल भवन की बिजली काटी, मुख्य द्वार पर ताला लगा

गुरुवार को आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब हड़ताली कर्मचारियों ने नगर निगम मुख्यालय अटल भवन की बिजली आपूर्ति बंद कर दी और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने मुख्यालय की बिजली काटी, जिसके बाद वहां कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। कर्मचारियों के अनुसार शुक्रवार को भी काम बंद रहेगा, जिससे मुख्यालय के अलावा सभी 85 वार्डों और 21 जोन में काम प्रभावित होने की बात कही गई है।
इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने नियमित कर्मचारियों को भी काम नहीं करने दिया और निगम के दफ्तरों में बिजली कनेक्शन बंद कर दिए गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। नगर निगम मुख्यालय पर बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं। राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों से कर्मचारी हड़ताल के समर्थन में मुख्यालय पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
अब पानी की सप्लाई पर संकट का खतरा
सबसे बड़ी चिंता अब पेयजल आपूर्ति को लेकर है। जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं, ऐसे में त्योहार की अवधि में पानी की आपूर्ति रुकने से शहर के लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। जलप्रदाय विभाग में कुल 2,327 कर्मचारी हैं और इनमें से अधिकतर हड़ताल में शामिल बताए जा रहे हैं।
नगर निगम के कर्मचारियों ने हड़ताल को और तेज करते हुए निगम के कामकाज को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी भी दी है। दीपावली के दिनों में पानी की मांग वैसे ही बढ़ जाती है, और ऐसे में आपूर्ति रुकना शहर के लिए दोहरी मुसीबत बन सकता है। शहर में बिजली कर्मचारियों की चेतावनी से भी त्योहारी व्यवस्था पर दबाव पहले से बना हुआ है, क्योंकि आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने सात और आठ नवंबर को काम बंद करने की चेतावनी दी हुई है।
कर्मचारियों की छह मांगें क्या हैं
कर्मचारियों की मांगों में न्यूनतम मासिक मानदेय 25,000 रुपये, वेतन संशोधन, सेवाओं का नियमितीकरण, सरकारी कर्मचारी का दर्जा, अनुबंध प्रणाली को समाप्त करना और अनुकंपा नियुक्तियां शामिल हैं। संगठन का कहना है कि सफाई कर्मचारियों को लंबे समय से छह से नौ हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है, जबकि उनसे शहर की सफाई की सबसे कठिन जिम्मेदारी निभाई जाती है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और ठेके पर काम करने की व्यवस्था खत्म की जाए।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक हड़ताल खत्म नहीं की जाएगी। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर दीपावली के दौरान भी सफाई कार्य बंद रखा जाएगा।
बुधवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही, प्रशासन का पक्ष
हड़ताल समाप्त कराने को लेकर शहरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ बुधवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसमें कोई सहमति नहीं बन सकी। अब कर्मचारी संगठन मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की तैयारी कर रहा है। संघ के नेता मांगों पर ठोस निर्णय होने से पहले मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत पर जोर दे रहे हैं।
दूसरी ओर, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने हड़ताल को अस्थायी रूप से निलंबित करने की अपील की है, जबकि आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने सार्थक चर्चा की बात कही है। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विभाग के प्रमुख सचिव से मुलाकात का कार्यक्रम भी बताया गया था, लेकिन अब तक मांगों पर कोई फैसला सामने नहीं आया है। कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात और मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही हड़ताल समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
तीन दिन का घटनाक्रम — सोमवार से शुक्रवार तक
इस आंदोलन की जड़ में सोमवार को भोपाल नगर निगम द्वारा सफाई कर्मचारियों की हाजिरी और काम की निगरानी के लिए लागू की गई नई व्यवस्था बताई जा रही है। इसके अगले ही दिन कर्मचारी विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। मंगलवार को 57 जिलों के सफाईकर्मियों ने शाहजहांनी पार्क में प्रदर्शन किया और बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया गया।
हड़ताल की शुरुआत के दिन से ही भोपाल के 85 वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी। भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल बुधवार को ही प्रशासन के साथ वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद और सख्त हो गई। गुरुवार को आंदोलन और तेज हो गया — अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल हो गए, अटल भवन की बिजली काटी गई और मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया। शुक्रवार को धनतेरस के दिन हड़ताल तीसरे दिन में प्रवेश कर गई और पानी की आपूर्ति रोकने की चेतावनी के साथ इसका दायरा और बढ़ गया।
दीपावली पर क्या होगा आगे
दीपावली आठ नवंबर को मनाई जाएगी और उससे पहले के दिनों में बाजारों में भीड़ बढ़ती ही जाएगी। ऐसे में अगर भोपाल सफाई कर्मचारी हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई तो त्योहार के दिनों में शहर में कचरे के ढेर और पानी की किल्लत दोनों की समस्या एक साथ खड़ी हो सकती है। निगम ने हड़ताल की आशंका के बीच विशेष सफाई और फागिंग अभियान शुरू किया था, जिसके तहत सुबह छह से 11 और दोपहर 12 से तीन बजे तक सफाई के लिए मशीनरी लगाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन हड़ताल के फैलाव के बाद इस व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कर्मचारियों ने साफ किया है कि सरकार के साथ बातचीत में मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही काम पर लौटने का फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग पर अब सबकी नजर टिकी है। अगर शुक्रवार को भी कोई फैसला नहीं हुआ तो दीपावली के दिन भी सफाई बंद रहने की चेतावनी के बीच शहर को त्योहार के सबसे बड़े दिन में कचरे और पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है।
शहर के लोगों की परेशानी बढ़ी
दीपावली के लिए अपने घरों की सफाई कर चुके निवासी अब घरेलू कचरे के निपटान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई जगहों पर लोग जमा हुए कचरे को जलाने पर मजबूर हो गए हैं, जिससे धुआं और बदबू की समस्या भी बढ़ रही है। बाजारों में दुकानदारों को भी कचरे के ढेर के बीच कारोबार करना पड़ रहा है, जबकि त्योहार के दिनों में ग्राहकों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि कचरे के ढेर से मच्छर और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दीपावली के दिनों में शहर में सफाई व्यवस्था का चरमराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात और वार्ता का अगला दौर कब होता है और कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस फैसला कब सामने आता है।
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