भोपाल ब्यूरो
सार: दीपावली से ठीक पहले भोपाल समेत प्रदेशभर में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। भोपाल के 85 वार्डों में गुरुवार को भी घरों और बाजारों से कचरा नहीं उठा, जिससे दो दिन में 2,100 टन से ज्यादा कूड़ा जमा हो गया है। कर्मचारियों की मांग सरकारी कर्मचारी का दर्जा, 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और ठेका प्रथा खत्म करने की है, जिस पर अब तक कोई फैसला सामने नहीं आया है.
दीपावली की तैयारियों के बीच राजधानी भोपाल में सफाई व्यवस्था दूसरे दिन भी ठप रही। बुधवार से शुरू हुई सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही, और इसका असर शहर की गलियों से लेकर बड़े बाजारों तक साफ दिखा। सुबह घरों के सामने कचरे के डिब्बे भरे रहे, डोर-टू-डोर कचरा वाहन नहीं पहुंचे और कई इलाकों में लोगों को खुद ही कचरा हटाना पड़ा। त्योहार के मौके पर जब बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ बढ़ रही है, तब जगह-जगह लगे कचरे के ढेर ने शहर की तस्वीर खराब कर दी है।
यह हड़ताल अचानक शुरू नहीं हुई है। इससे पहले कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर चुके थे और 4 नवंबर से काम बंद करने की चेतावनी दे चुके थे। बुधवार को जब काम बंद हुआ, तो पहले दिन ही भोपाल के बाजारों और मोहल्लों में कचरा जमा होने लगा। दूसरे दिन यह समस्या और बढ़ गई, क्योंकि बुधवार का कचरा भी नहीं उठा था और गुरुवार का कचरा भी उसी में जुड़ गया। यही वजह है कि दो दिन में जमा कूड़े का आंकड़ा 2,100 टन से ज्यादा बताया जा रहा है।
दूसरे दिन भी नहीं उठा कचरा: 85 वार्डों का हाल
भोपाल नगर निगम के 85 वार्डों में सफाई का काम दूसरे दिन भी पूरी तरह ठप रहा। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं हुआ, सड़कों पर झाड़ू नहीं लगी और कचरा वाहन अपने ठिकानों पर ही खड़े रहे। न्यू मार्केट जैसे बड़े व्यावसायिक इलाकों में दुकानों के सामने और सड़कों के किनारे कचरे के ढेर नजर आए। रिहायशी इलाकों में भी यही हाल रहा, जहां घरों से निकलने वाला कचरा दो दिन से नहीं उठाया गया है।
दुकानदारों और रहवासियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है। त्योहार के दिनों में बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है, लेकिन कचरे के ढेर और उससे उठने वाली दुर्गंध के बीच खरीदारी करना मुश्किल हो रहा है। कई जगहों पर लोगों ने खुद ही अपने घरों और दुकानों के सामने का कचरा समेटकर एक जगह किया, ताकि रास्ता चलने लायक बना रहे। फिर भी, बिना नियमित संग्रहण के यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
शहर की सफाई व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भोपाल को देश के साफ शहरों में गिना जाता है। स्वच्छता के मामले में शहर की पहचान रही है, और दीपावली के मौके पर यह पहचान और भी ज्यादा चर्चा में रहती है। ऐसे में दो दिन से सफाई ठप होना न केवल आम लोगों के लिए परेशानी है, बल्कि शहर की छवि के लिहाज से भी चिंता का विषय बन गया है।
दो दिन में 2,100 टन से ज्यादा कूड़ा जमा
भोपाल में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है, जिसे घरों, बाजारों और व्यावसायिक इलाकों से इकट्ठा करके निपटान स्थल तक पहुंचाया जाता है। जब दो दिन तक यह पूरी व्यवस्था रुक जाती है, तो जमा होने वाले कचरे की मात्रा बहुत तेजी से बढ़ जाती है। आज सुबह तक की स्थिति के अनुसार, दो दिन में 2,100 टन से ज्यादा कूड़ा जमा हो चुका है।
यह आंकड़ा इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि कचरा केवल सड़कों पर ही नहीं जमा हो रहा, बल्कि घरों के अंदर भी इकट्ठा हो रहा है। जिन घरों में कचरा रखने की जगह सीमित है, वहां दो दिन का कचरा रखने में दिक्कत आ रही है। बाजारों में दुकानों से निकलने वाला कचरा भी दुकानों के सामने ही पड़ा है, जिससे आने-जाने वालों को परेशानी हो रही है। अगर हड़ताल और लंबी चली, तो यह मात्रा और बढ़ेगी और हालात और बिगड़ सकते हैं।
कचरे के ढेर से स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं भी जुड़ी हैं। खुले में पड़े कचरे से मक्खी-मच्छर बढ़ते हैं और दुर्गंध फैलती है। त्योहार के दिनों में जब लोग घरों की सफाई और सजावट में लगे हैं, तब बाहर कचरे का अंबार उनकी मेहनत पर भी पानी फेर रहा है। यही वजह है कि लोग इस हड़ताल के जल्द खत्म होने की उम्मीद कर रहे हैं।

क्या हैं कर्मचारियों की मांगें
सफाई कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित बताई जा रही हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। अभी बड़ी संख्या में कर्मचारी दैनिक वेतन या ठेका व्यवस्था के तहत काम करते हैं, जिससे उन्हें स्थायी कर्मचारियों वाली सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पातीं। कर्मचारी संगठन का कहना है कि ठेका प्रथा खत्म करके सभी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए।
दूसरी बड़ी मांग न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपये करने की है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है, खासकर महंगाई के इस दौर में। इसके साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजन को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि जोखिम भरे काम में लगे कर्मचारियों के परिवारों को इस तरह की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
इन मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन पहले भी कई बार अपनी बात रख चुका है। मंगलवार को बड़ी संख्या में कर्मचारी भोपाल में एकत्र हुए थे और उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया था। उसके बाद 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई थी। अब जब हड़ताल दूसरे दिन में पहुंच गई है, तो कर्मचारी संगठन का रुख यही है कि मांगें पूरी होने तक काम बंद रहेगा।
मंगलवार से बुधवार तक: धरना, जाम और बैठक
इस हड़ताल की पृष्ठभूमि मंगलवार से ही बन गई थी, जब बड़ी संख्या में सफाईकर्मी भोपाल में एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उस दौरान जहांगीराबाद चौराहे पर करीब दो घंटे तक जाम की स्थिति रही, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। बाद में प्रदर्शनकारी शाहजहांनी पार्क पहुंचे और वहां रातभर धरना जारी रखा।
बुधवार को काम बंद हड़ताल शुरू हो गई। उसी दिन कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों की नगर विकास मंत्री से मुलाकात तय थी, जिसमें मांगों पर चर्चा होनी थी। कर्मचारी संगठन की ओर से यह भी कहा गया था कि अगर बातचीत से सकारात्मक नतीजा नहीं निकला, तो हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी, यहां तक कि दीपावली के दौरान भी कचरा नहीं उठाया जाएगा।
बुधवार को हुई बैठक के बाद क्या फैसला हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। गुरुवार को हड़ताल जारी रहने से यह साफ है कि अब तक कर्मचारियों की मांगों पर कोई ऐसा समझौता नहीं हुआ है, जिससे वे काम पर लौट सकें। प्रशासन की ओर से हड़ताल खत्म कराने की कोशिशों का जिक्र पहले दिन से ही हो रहा है, लेकिन दूसरे दिन भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
भोपाल से बाहर: दूसरे जिलों में भी ठप काम
यह हड़ताल केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी सफाईकर्मी काम पर नहीं आए, जिससे वहां भी सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। राजगढ़ जिले के सभी 14 नगरीय निकायों में सफाईकर्मी बुधवार को काम पर नहीं आए। विदिशा नगर पालिका के सफाईकर्मी भी हड़ताल पर चले गए, जिससे शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए।
नर्मदापुरम, रायसेन जिले के गैरतगंज और अशोकनगर जिले के शाढौरा नगर परिषद में भी हड़ताल रही। इन जगहों पर भी घरों से डोर-टू-डोर कचरा नहीं उठाया गया। संगठन का दावा है कि प्रदेश के 16 नगर निगमों और 374 नगर परिषदों के कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। हालांकि, हर निकाय में हड़ताल का असर एक जैसा नहीं है, लेकिन दीपावली से पहले प्रदेशभर में सफाई व्यवस्था पर इसका असर साफ दिख रहा है।
इससे यह भी साफ होता है कि यह मुद्दा किसी एक शहर का नहीं, बल्कि प्रदेशभर के सफाईकर्मियों की साझा मांगों से जुड़ा है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की स्थिति, वेतन और स्थायीकरण की मांग लगभग हर जिले में एक जैसी है। यही वजह है कि अलग-अलग जिलों के कर्मचारी एक साथ इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।
दीपावली के बाजारों पर असर
दीपावली से पहले बाजारों में रौनक अपने चरम पर होती है। लोग दीये, फूल, सजावट का सामान, कपड़े और मिठाइयां खरीदने के लिए बाजार पहुंचते हैं। ऐसे में बाजारों में कचरे के ढेर और गंदगी का होना व्यापारियों के लिए भी नुकसानदेह है। ग्राहक साफ-सुथरे बाजार में खरीदारी करना पसंद करते हैं, और गंदगी देखकर कई लोग बाजार से जल्दी लौट जाते हैं।
न्यू मार्केट जैसे इलाकों में, जहां दीपावली के दिनों में भारी भीड़ रहती है, कचरा न उठने से हालात और खराब हो गए हैं। दुकानों के सामने कचरा पड़ा होने से न केवल दुकानदार परेशान हैं, बल्कि ग्राहकों को भी दिक्कत हो रही है। रिहायशी इलाकों में भी लोग त्योहार की सफाई के बाद निकले कचरे को ठिकाने लगाने के लिए परेशान हैं, क्योंकि नियमित वाहन नहीं आ रहे हैं।
त्योहार के मौके पर सफाई का महत्व और बढ़ जाता है। घरों में लक्ष्मी पूजन की तैयारियां चल रही हैं, और लोग अपने घरों और आसपास को साफ-सुथरा रखना चाहते हैं। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था ठप होना लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा मुद्दा बन गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दीपावली से पहले ही कोई समाधान निकलेगा।
पहले भी उठा था मुद्दा: नीलम पार्क का धरना
सफाईकर्मियों की मांगों का यह मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले 3 नवंबर को भोपाल के नीलम पार्क में प्रदेशभर के सफाई कर्मचारियों का धरना हुआ था, जिसमें वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की मांग उठाई गई थी। उसी धरने में 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई थी। अब वही चेतावनी हकीकत बन गई है और हड़ताल दूसरे दिन में पहुंच गई है।
पिछले दिनों की घटनाओं को जोड़कर देखें, तो यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा है। पहले धरना, फिर चेतावनी, फिर काम बंद हड़ताल और अब दूसरे दिन भी काम बंद। हर चरण में कर्मचारियों की मांगें वही रही हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई फैसला नहीं हुआ है। यही वजह है कि आंदोलन लंबा खिंचता जा रहा है।
इस पृष्ठभूमि को समझना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे यह साफ होता है कि हड़ताल कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। कर्मचारियों ने पहले अपनी बात धरने के जरिए रखी थी, और जब उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा, तो उन्होंने काम बंद करने का रास्ता चुना। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह कब और किस तरह की पहल करके इस गतिरोध को खत्म करता है।
आगे क्या: बातचीत पर टिकी नजरें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह हड़ताल कब खत्म होगी। कर्मचारी संगठन का कहना है कि मांगें पूरी होने तक काम बंद रहेगा, यहां तक कि दीपावली के दौरान भी कचरा नहीं उठाया जाएगा। दूसरी ओर, शहर के लोग और व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि दीपावली से पहले ही कोई समझौता हो जाएगा, ताकि त्योहार साफ-सुथरे माहौल में मनाया जा सके।
आगे की राह बातचीत से ही निकलेगी। बुधवार को हुई बैठक के बाद अब अगली बातचीत कब होगी और उसमें क्या फैसला होगा, इस पर सबकी नजर टिकी है। अगर बातचीत में कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन मिलता है, तो हड़ताल खत्म हो सकती है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कचरे की समस्या और गंभीर हो सकती है, खासकर दीपावली के दिनों में।
तब तक भोपाल के लोगों के सामने यही चुनौती है कि वे अपने घरों और मोहल्लों में कचरे का प्रबंधन कैसे करें। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी लोगों को स्पष्ट जानकारी का इंतजार है। दीपावली से पहले सफाई व्यवस्था बहाल होना शहर के लिए सबसे बड़ी राहत होगी, और इसके लिए बातचीत का जल्द नतीजा निकलना जरूरी है।
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