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चुनाव आयोग का एसएसआर आदेश: छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण, अंतिम सूची 21 जनवरी 2027 को

सांकेतिक चित्र: मतपेटी, मतदाता सूची रजिस्टर और स्याही की बोतल सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली ब्यूरो

चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार देश के चार राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में एसएसआर मतदाता सूची पुनरीक्षण किया जाएगा। आयोग ने चार नवंबर को जारी पत्र में संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस पुनरीक्षण का कार्यक्रम भेजा है। पुनरीक्षण का मकसद मतदाता सूची को अद्यतन करना है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से छूटा न रहे और अपात्र नाम सूची में बने न रहें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह पुनरीक्षण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत किया जाएगा। इस आदेश के साथ ही उन छह क्षेत्रों में मतदाता सूची को नए सिरे से दुरुस्त करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है, जहाँ इससे पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है।

किन छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण

चुनाव आयोग का यह आदेश अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम — इन चार राज्यों — तथा चंडीगढ़ और दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव — इन दो केंद्रशासित प्रदेशों — पर लागू होगा। इस एसएसआर मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत इन सभी छह क्षेत्रों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पहले ही पूरा हो चुका है। आयोग के अनुसार इन्हीं क्षेत्रों में अब विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पुनरीक्षण का काम पूरा करें। इस सूची में शामिल राज्यों की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है — पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्य, पूर्वी तट का ओडिशा, हिमालयी राज्य सिक्किम और दो केंद्रशासित प्रदेश — लेकिन इन सभी के लिए कार्यक्रम एक समान रखा गया है। आयोग ने इन क्षेत्रों के लिए एक ही समय-सारणी जारी की है, ताकि मसौदा सूची और अंतिम सूची एक साथ प्रकाशित हो सकें।

पूरा कार्यक्रम: तारीख दर तारीख

सांकेतिक चित्र: मतदाता सूची पर हस्ताक्षर करता हाथ
सांकेतिक चित्र

चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण का पूरा कार्यक्रम तारीखों के साथ जारी किया है। इसके अनुसार मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और पुनर्व्यवस्था 20 नवंबर तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद 30 नवंबर को एकीकृत मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद मतदाताओं को अपना नाम जुड़वाने, हटवाने या उसमें सुधार कराने के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने का एक महीने का समय मिलेगा। दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 30 नवंबर से 30 दिसंबर तक रहेगी। निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को सभी दावा-आपत्तियों का निपटारा 16 जनवरी तक करना होगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 21 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी। पुनरीक्षण के लिए अर्हता तिथि एक जनवरी 2027 तय की गई है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति एक जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा, वह मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का पात्र होगा। आयोग ने यह भी व्यवस्था की है कि जो लोग एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष के होंगे, वे पहले से ही अग्रिम आवेदन दे सकेंगे।

एसएसआर मतदाता सूची पुनरीक्षण क्या है और एसआईआर से कैसे अलग है

मतदाता सूची के पुनरीक्षण की दो प्रक्रियाओं — विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण और विशेष गहन पुनरीक्षण — के बीच का अंतर समझना जरूरी है। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण में मौजूदा मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। इसमें नए नाम जोड़े जाते हैं, स्थानांतरित या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और सूची में दर्ज त्रुटियों को सुधारा जाता है। यह एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल चुनाव से पहले अपनाई जाती रही है। इसके विपरीत, विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की जाती है। इसमें हर मतदाता का सत्यापन गहराई से किया जाता है। विशेष गहन पुनरीक्षण 2025 में शुरू किया गया था और यह अभी भी कई राज्यों में चल रहा है। दो दशक से अधिक के अंतराल के बाद यह गहन पुनरीक्षण कराया जा रहा है। जिन छह क्षेत्रों में गहन पुनरीक्षण पूरा हो चुका है, वहाँ अब संक्षिप्त पुनरीक्षण के जरिए सूची को अद्यतन रखा जाएगा। यही कारण है कि आयोग ने इन छह क्षेत्रों के लिए संक्षिप्त पुनरीक्षण का आदेश दिया है।

पहली बार वोट देने वालों के लिए क्या खास है

इस एसएसआर मतदाता सूची पुनरीक्षण का एक बड़ा मकसद उन युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को सूची में जोड़ना है, जो अब तक किसी कारण से सूची से छूट गए हैं। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि वे पात्र युवा मतदाताओं के नामांकन पर ध्यान दें। अर्हता तिथि एक जनवरी 2027 तय होने से उन युवाओं को लाभ मिलेगा, जिनकी आयु इस तारीख तक 18 वर्ष पूरी हो जाएगी। इसके साथ ही आयोग ने अग्रिम आवेदनों की व्यवस्था भी की है। जो युवा एक अप्रैल, एक जुलाई या एक अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष के होंगे, वे पहले से आवेदन दे सकेंगे, ताकि उनकी आयु पूरी होते ही उनका नाम सूची में जोड़ा जा सके। यह व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि किसी भी युवा मतदाता को अपनी आयु पूरी होने के बाद सूची में नाम जुड़वाने के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। आयोग का मानना है कि पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं का पंजीकरण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी है और इसे लेकर कोई चूक नहीं होनी चाहिए।

किन राज्यों में अभी पुनरीक्षण नहीं होगा

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह संक्षिप्त पुनरीक्षण फिलहाल उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नहीं होगा, जहाँ विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है। ऐसे राज्यों में आंध्र प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, नगालैंड, दिल्ली, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं। इनके लिए पुनरीक्षण का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए भी कार्यक्रम बाद में घोषित होगा, क्योंकि वहाँ गहन पुनरीक्षण अभी शुरू ही नहीं हुआ है और वहाँ की मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा। आयोग के इस फैसले से साफ है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चरणों में चल रहा है और हर राज्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग कार्यक्रम तय किया जा रहा है। जिन राज्यों में गहन पुनरीक्षण चल रहा है, वहाँ उसके पूरा होने के बाद ही संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम आएगा।

2026 में सालाना पुनरीक्षण क्यों नहीं हुआ

इस आदेश का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि चुनाव आयोग ने 2026 में सालाना विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण नहीं कराया था। इसका कारण यह था कि उस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष गहन पुनरीक्षण चरणों में चलाया जा रहा था। आयोग ने गहन पुनरीक्षण के चलते सालाना संक्षिप्त पुनरीक्षण को रोकने का फैसला किया था। अब जब छह क्षेत्रों में गहन पुनरीक्षण पूरा हो चुका है, तो आयोग ने वहाँ संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह दर्शाता है कि आयोग मतदाता सूची को अद्यतन रखने की अपनी सालाना प्रक्रिया को फिर से शुरू कर रहा है। मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है, क्योंकि हर साल लाखों युवा 18 वर्ष के होते हैं, लोग एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं और सूची में बदलाव की जरूरत लगातार बनी रहती है।

मध्य प्रदेश के मतदाताओं के लिए इसका क्या मतलब है

मध्य प्रदेश इस आदेश में शामिल छह क्षेत्रों की सूची में नहीं है। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम 12 नवंबर से शुरू हो रहा है। राज्य में एसआईआर को लेकर चल रही बहस के बीच यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग रुख देखने को मिला है। एक ओर सत्तारूढ़ दल ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को नियमित शुद्धिकरण की प्रक्रिया बताया है, तो दूसरी ओर विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं। इस पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग का ताजा आदेश इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह बताता है कि गहन पुनरीक्षण पूरा होने के बाद संक्षिप्त पुनरीक्षण की नियमित प्रक्रिया कैसे शुरू होती है। मध्य प्रदेश के मतदाताओं के लिए फिलहाल यह समझना जरूरी है कि उनके राज्य में पुनरीक्षण का कार्यक्रम अलग तारीखों पर चलेगा और इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी की जाएगी।

मतदाता क्या करें

जिन छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह पुनरीक्षण हो रहा है, वहाँ के मतदाताओं के लिए सबसे पहली तारीख 30 नवंबर है। इस दिन मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। मतदाताओं को चाहिए कि वे मसौदा सूची में अपना नाम और विवरण जाँच लें। यदि किसी का नाम सूची में नहीं है, नाम की वर्तनी गलत है, पता पुराना दर्ज है या किसी अन्य प्रकार की त्रुटि है, तो वे 30 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों को इन दावा-आपत्तियों का निपटारा 16 जनवरी तक करना है। अंतिम सूची 21 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद अपने बूथ स्तर के अधिकारी से संपर्क करें और अपने विवरण की पुष्टि करें। पहली बार वोट देने वाले युवा भी इस अवधि में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। अग्रिम आवेदन की सुविधा का लाभ उठाकर वे अपनी आयु पूरी होने से पहले ही आवेदन दे सकते हैं।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग ने जिन राज्यों में गहन पुनरीक्षण चल रहा है या अभी शुरू नहीं हुआ है, उनके लिए पुनरीक्षण का कार्यक्रम अलग से घोषित करने की बात कही है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में अन्य राज्यों के लिए भी इसी तरह के आदेश जारी हो सकते हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया देशभर में चरणों में पूरी की जाएगी। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार छह क्षेत्रों में अंतिम सूची 21 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी। इसके बाद इन क्षेत्रों की मतदाता सूची अगले चुनावों के लिए अद्यतन मानी जाएगी। मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए जरूरी माना जाता है। इसीलिए आयोग ने गहन पुनरीक्षण के बाद एसएसआर मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को फिर से शुरू किया है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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