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आज नीति आयोग के नए नेतृत्व से मिलेंगे प्रधानमंत्री मोदी: विकसित भारत 2047 और बजट 2027-28 की प्राथमिकताओं पर होगा मंथन

सांकेतिक चित्र: नई दिल्ली में सरकारी भवन और तिरंगा सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली ब्यूरो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार को नई दिल्ली में नीति आयोग के नए नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस नीति आयोग बैठक प्रधानमंत्री मोदी के साथ विकसित भारत 2047 के रोडमैप और 2027-28 के केंद्रीय बजट की प्राथमिकताओं पर मंथन होगा। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन और सभी सदस्य शामिल होंगे, और हर सदस्य अपने क्षेत्र की नीतियों पर दो स्लाइड की प्रस्तुति देगा।

नीति आयोग बैठक प्रधानमंत्री मोदी: आज की बैठक में क्या होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुरुवार, 5 नवंबर को नई दिल्ली में नीति आयोग के नवनियुक्त नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में चल रही नीतिगत पहलों की समीक्षा की जाएगी और 2047 तक विकसित भारत के विजन को हासिल करने के लिए सरकार के रोडमैप पर चर्चा होगी। बैठक के दौरान 2027-28 के केंद्रीय बजट के लिए मुख्य प्राथमिकताओं को भी तय किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष हैं, इसलिए नए नेतृत्व के साथ उनकी यह पहली संरचित नीतिगत समीक्षा बैठक मानी जा रही है।

बैठक में चर्चा मुख्य रूप से तीन बड़े विषयों पर केंद्रित रहने की संभावना है। पहला, चल रही नीतिगत पहलों की प्रगति और उनमें आ रही चुनौतियों की समीक्षा। दूसरा, वैश्विक अनिश्चितताओं से पैदा हो रहे जोखिम और अवसरों पर विचार। तीसरा, 2027-28 के केंद्रीय बजट की रूपरेखा के लिए प्राथमिकताओं का निर्धारण। इन चर्चाओं में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और देश की आर्थिक वृद्धि को तेज करने पर विशेष जोर दिए जाने की संभावना है। बुनियादी ढांचे के विस्तार और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के मुद्दे भी एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

बैठक की एक खास बात इसका प्रारूप है। आयोग के हर सदस्य से अपेक्षा की गई है कि वह अपने क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों, चल रही नीतिगत पहलों और काम के क्षेत्रों को लेकर दो स्लाइड की प्रस्तुति दे। इस तरह प्रधानमंत्री को हर क्षेत्र की स्थिति और जरूरतों की सीधी जानकारी मिलेगी। अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के रूप में नियुक्त किए गए सदस्यों से प्रधानमंत्री यह समझेंगे कि उनके क्षेत्रों में क्या बड़े बदलाव हो रहे हैं और किन चीजों की जरूरत है।

बैठक में कौन-कौन शामिल होगा

सांकेतिक चित्र: बैठक के लिए तैयार सम्मेलन कक्ष
सांकेतिक चित्र

बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन और सदस्य राजीव गौबा, आर. बालसुब्रमण्यम, जोरम अनिया, के.वी. राजू, एम. श्रीनिवास, गोवर्धन दास और अभय करंदीकर के शामिल होने की संभावना है। इनके साथ आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे।

नीति आयोग का यह नया नेतृत्व हाल में गठित हुआ है, इसलिए प्रधानमंत्री के साथ यह बैठक नए नेतृत्व की पहली बड़ी नीतिगत समीक्षा के रूप में देखी जा रही है। आयोग के सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं और उन्हें अपने-अपने क्षेत्र की नीतियों पर काम की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में हर सदस्य अपनी दो स्लाइड की प्रस्तुति के जरिए बताएगा कि उसके क्षेत्र में कौन सी नीतिगत पहल चल रही हैं, किन मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है और आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री का आयोग के अधिकारियों से इस तरह मिलना असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर प्रधानमंत्री गवर्निंग काउंसिल की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करने या बजट से पहले अर्थशास्त्रियों से मिलने के लिए आयोग जाते रहे हैं। इस बार सीधे नए नेतृत्व के साथ नीतिगत समीक्षा की बैठक इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सरकार नीति निर्माण में आयोग की भूमिका को और मजबूत करना चाहती है।

बजट 2027-28 की तैयारी से जुड़ा एजेंडा

बैठक ऐसे समय हो रही है जब सरकार 2027-28 के केंद्रीय बजट की प्राथमिकताएं तय करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना, बुनियादी ढांचे में सुधार करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। नीति आयोग की बैठक में इन्हीं विषयों पर मंथन होने की संभावना है।

घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना बैठक के एजेंडे का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। देश में उत्पादन बढ़ाने और भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नीतिगत कदमों पर चर्चा हो सकती है। रोजगार सृजन भी एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर बढ़ाना सरकार की लगातार प्राथमिकता रही है। आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए किन क्षेत्रों में निवेश और सुधार की जरूरत है, इस पर भी सदस्यों की राय ली जाएगी।

मध्यप्रदेश में भी निर्यात और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव आयोजित किया गया है, जिसमें राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय स्तर पर नीति आयोग की बैठक और राज्य स्तर पर इस तरह की पहलें एक ही दिशा की ओर इशारा करती हैं — उत्पादन बढ़ाना, निर्यात बढ़ाना और रोजगार पैदा करना।

विकसित भारत 2047 का रोडमैप क्या है

विकसित भारत 2047 सरकार का दीर्घकालिक विजन है, जिसका लक्ष्य स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक, यानी 2047 तक, भारत को पूरी तरह विकसित राष्ट्र बनाना है। यह विजन केंद्र सरकार की लगभग हर बड़ी योजना और नीति का मार्गदर्शक ढांचा है। नीति आयोग की बैठक में इसी विजन की दिशा में चल रहे काम की समीक्षा होगी और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

इस विजन के तहत समावेशी और सतत विकास पर जोर दिया गया है, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। इसमें आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और पर्यावरण जैसे विषय भी शामिल हैं। नीति आयोग की भूमिका यही है कि वह अलग-अलग मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर इस विजन को जमीन पर उतारने की रणनीति बनाए।

बैठक में हर सदस्य की दो स्लाइड की प्रस्तुति इसी विजन से जुड़ी होगी। हर सदस्य बताएगा कि उसके क्षेत्र में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या काम हो रहा है और किन बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। इस तरह बैठक से एक समग्र तस्वीर सामने आएगी कि देश इस लंबी यात्रा में कहां खड़ा है और आगे क्या करना है।

नीति आयोग क्या है और क्यों अहम है

नीति आयोग की स्थापना जनवरी 2015 में हुई थी, जब इसने योजना आयोग की जगह ली। यह सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक है। आयोग केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर समावेशी और सतत विकास की रणनीतियां तैयार करता है और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है।

आयोग की अहमियत इसमें है कि यह नीतिगत शोध, संस्थागत समन्वय और रणनीतिक योजना को एक साथ लाता है। देश के सामने खड़ी आर्थिक और विकास संबंधी चुनौतियों का समाधान निकालने में आयोग की भूमिका लगातार बढ़ी है। प्रधानमंत्री के साथ आज की बैठक इस बात को रेखांकित करती है कि सरकार नीति निर्माण में आयोग को केंद्रीय भूमिका देना चाहती है।

आयोग राज्यों के साथ मिलकर काम करता है, क्योंकि राज्यों की भागीदारी के बिना राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करना संभव नहीं है। गवर्निंग काउंसिल के जरिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्री नीति निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ते हैं। यही सहकारी संघवाद का मॉडल है, जिस पर नीति आयोग काम करता है।

जून की गवर्निंग काउंसिल बैठक से अब तक

इससे पहले 11 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की थी। यह बैठक समावेशी मानव विकास के विषय पर आयोजित हुई थी और इसका विषय विकसित भारत 2047 ही था।

उस बैठक में सभी 28 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक शामिल हुए थे। यह बैठक नीति आयोग की सबसे बड़ी बैठक होती है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत समन्वय पर चर्चा होती है। जून की बैठक के बाद से आयोग का नया नेतृत्व गठित हुआ है और आज की बैठक उसी क्रम में अगला कदम मानी जा रही है।

जून की बैठक में राज्यों की भूमिका और उनके विकास की प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई थी। आज की बैठक में उसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए बजट 2027-28 की प्राथमिकताओं को आकार देने की कोशिश होगी। इस तरह नीति आयोग की बैठकों की एक निरंतरता बन रही है — पहले गवर्निंग काउंसिल, अब नए नेतृत्व के साथ समीक्षा बैठक।

राज्यों की भूमिका और मध्यप्रदेश से जुड़ाव

नीति आयोग के काम में राज्यों की भूमिका सबसे अहम है, क्योंकि विकास की योजनाएं जमीन पर राज्यों के जरिए ही लागू होती हैं। आयोग राज्यों को नीतिगत मार्गदर्शन देता है और राज्यों की अच्छी प्रथाओं को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करता है। मध्यप्रदेश भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है और राज्य की योजनाएं राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी हुई हैं।

नीति आयोग की योजना में इंदौर को देश के बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिसमें आठ जिले शामिल हैं और 2047 तक बड़ी अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना बताती है कि आयोग की नजर में मध्यप्रदेश के शहरों और क्षेत्रों की आर्थिक क्षमता कितनी अहम है। राज्य के निर्यातकों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए भोपाल में एक्सपोर्ट एंड एफटीए कॉन्क्लेव का आयोजन भी इसी दिशा का हिस्सा है।

राज्यों के साथ आयोग का समन्वय बजट की प्राथमिकताओं को भी आकार देता है, क्योंकि राज्यों की जरूरतें और उनकी योजनाएं राष्ट्रीय बजट में झलकती हैं। आज की बैठक में राज्यों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि आयोग के सदस्य अपने क्षेत्रों में राज्यों के साथ काम के अनुभव भी साझा करेंगे।

नीति आयोग बैठक प्रधानमंत्री मोदी: बैठक के बाद क्या देखें

नीति आयोग बैठक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज हो रही है, और इसके बाद सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर रहेगा कि 2027-28 के बजट की प्राथमिकताओं को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। विनिर्माण, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार की रणनीति की झलक बैठक के बाद सामने आ सकती है। बैठक में हुई चर्चा के आधार पर आने वाले महीनों में नीतिगत फैसलों की दिशा तय होगी।

यह भी देखा जाएगा कि आयोग के नए नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की यह पहली समीक्षा बैठक विकसित भारत 2047 के रोडमैप को किस तरह आगे बढ़ाती है। बैठक में हर सदस्य की प्रस्तुति के बाद किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है, यह आने वाले समय में सरकार की नीतियों में दिखाई देगा।

बैठक आज निर्धारित है और इसका एजेंडा उपलब्ध जानकारी के अनुसार तैयार किया गया है। बैठक के बाद सामने आने वाली जानकारी के आधार पर इस खबर को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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