इंदौर ब्यूरो
सार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक इंदौर में संपन्न हुई। शताब्दी वर्ष की समीक्षा में सामने आया कि संघ के कार्यकर्ता 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचे, देश में एक लाख से अधिक स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य हो रहा है, और भौगोलिक रचना में अब 46 प्रांतों की जगह 88 संभाग होंगे। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि शताब्दी वर्ष समाज की सज्जन शक्ति को संघ से अवगत कराने का अवसर बना।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक इंदौर में संपन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पत्रकारों को संबोधित किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मालवा प्रांत प्रचार प्रमुख जयशंकर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पत्रकार वार्ता के प्रारंभ में सरकार्यवाह जी ने डेली कॉलेज के प्रबंधन का व्यवस्था के लिए और मीडिया के बंधुओं का बैठक और संघ के विषय को सकारात्मक रूप से समाज के बीच प्रचारित-प्रसारित करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया एवं दीपावली पर्व की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सरकार्यवाह जी ने बताया कि बैठक में देशभर से 406 अपेक्षितों में से 398 कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रतिवर्षानुसार दशहरा और दीपावली के बीच आयोजित इस बैठक में देश और दुनिया में शताब्दी वर्ष में आयोजित कार्यक्रमों का वृत्त प्रस्तुत किया गया। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम समाज के व्यापक सहयोग से संपन्न हुए। यह समाज की सज्जन शक्ति को संघ से अवगत कराने का अवसर था। बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ ही पंच परिवर्तन के क्रियान्वयन तथा शाखा विस्तार और समाज जागरण के विषयों पर विचार-विमर्श और योजना बनी।
10 करोड़ घरों तक पहुंचा गृह संपर्क
शताब्दी वर्ष का सबसे बड़ा और सबसे आत्मीय कार्यक्रम गृह संपर्क अभियान रहा। संघ की सौ वर्षों की यात्रा और संघ विचार को लेकर कार्यकर्ताओं की टोलियों ने घर-घर जाकर संपर्क किया। कुल 4,63,340 ग्रामों और 41,825 नगरीय बस्तियों में 10,22,05,665 घरों में संघ के कार्यकर्ता पहुंचे। गृह संपर्क में कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक घर में 15 से 20 मिनट बैठकर चर्चा की।
यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि शताब्दी वर्ष केवल बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह देश के गांव-गांव और बस्ती-बस्ती तक पहुंचा। घरों में बैठकर हुई इन चर्चाओं के माध्यम से संघ विचार, हिंदुत्व और पंच परिवर्तन की बात समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंची। यही इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है कि संघ का संदेश सीधे परिवारों तक पहुंचा।
एक लाख से अधिक स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य
शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवकों द्वारा किए गए शाखा विस्तार की भी समीक्षा हुई। शाखाओं को अधिक प्रभावी एवं नियमित बनाने, उनका दृढ़ीकरण करने तथा अधिकाधिक स्थानों पर शाखाएं प्रारंभ करने के संबंध में भी विचार-विमर्श हुआ।
देश में कुल 63,208 स्थानों पर 99,423 दैनिक शाखाएं लग रही हैं। इस वर्ष दैनिक शाखाओं की संख्या में 12,025 की वृद्धि तथा शाखा स्थानों में 8,156 स्थानों की वृद्धि हुई। कुल 26,826 स्थानों पर 34,982 साप्ताहिक मिलन और 13,363 स्थानों पर 14,096 मासिक मंडली लग रही है। साप्ताहिक मिलन संख्या में 2,712 तथा मासिक मंडली संख्या में 463 की वृद्धि हुई। पिछले वर्ष 93,156 कुल स्थानों की तुलना में इस वर्ष कुल 1,03,397 स्थान प्रत्यक्ष संघ कार्ययुक्त हो गए हैं। संघ की भौगोलिक रचना में अब 46 प्रांतों के स्थान पर 88 संभाग होंगे।

हिंदू सम्मेलन: सवा दो करोड़ से अधिक मातृशक्ति की सहभागिता
शताब्दी वर्ष में समाज के सभी लोग साथ आवें, सामाजिक समरसता, एक-दूसरे के सहयोग और सकारात्मक जीवन शैली के विषयों पर प्रयासों के लिए हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इन सम्मेलनों में 4,93,76,694 समाज जन सम्मिलित हुए, जिनमें सवा दो करोड़ से अधिक मातृशक्ति की सहभागिता उल्लेखनीय है। 3,08,449 ग्रामों सहित 37,080 ग्रामीण मंडलों और 28,584 नगरीय बस्तियों में कुल 65,664 हिंदू सम्मेलन आयोजित हुए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे स्थानों पर भी हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ।
युवा कार्यक्रमों में भी व्यापक सहभागिता रही। 21,237 स्थानों पर महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु आयोजित 57,243 कार्यक्रमों में कुल 31,26,404 विद्यार्थियों की सहभागिता रही। युवा व्यवसायियों के लिए आयोजित 14,285 कार्यक्रमों में कुल 6,90,835 युवा व्यवसायी सम्मिलित हुए। इस प्रकार कुल 38,17,239 युवाओं की प्रत्यक्ष उपस्थिति इन कार्यक्रमों में रही। जिला केंद्रों और अन्य प्रमुख स्थानों पर आयोजित 3,207 प्रमुख जन गोष्ठियों में 4,29,262 प्रमुख समाज जन सम्मिलित हुए।
समाज के विभिन्न वर्गों में सद्भाव, सहयोग और भेदभाव रहित समाज निर्माण की दृष्टि से आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठकों में भी बड़ी भागीदारी रही। देशभर में 5,028 ग्रामीण खंडों और 3,318 नगरों में कुल 8,346 सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन हुआ, जिनमें 36,916 मातृशक्ति सहित 3,79,581 समाज प्रमुखों की सहभागिता रही।
आपदा में सेवा सबसे पहले
भारत में अलग-अलग स्थानों पर नैसर्गिक आपदाओं के समय वहां के स्वयंसेवकों ने सामाजिक संस्थाओं और समाज के साथ मिलकर सेवा प्रदान करने का प्रयास किया। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में अत्यधिक बाढ़ के कारण पीड़ित शहर एवं ग्रामीण परिवारों को 350 कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर राहत किट का वितरण किया। 6000 से अधिक लोगों के भोजन के लिए स्थाई व्यवस्था चलाई गई और 5600 लोगों को चिकित्सा प्रदान की गई। साथ ही पशुओं के टीकाकरण का भी प्रयास हुआ।
लखनऊ क्षेत्र में अति वर्षा के कारण शहर में भीषण बाढ़ की स्थिति में 300 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों के लिए भोजन, पानी, दवाइयां इत्यादि जीवन उपयोगी वस्तुओं का वितरण किया। असम के शिवसागर और जोरहाट जिले में बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में 1600 से अधिक स्वयंसेवकों ने 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी, दवाइयां इत्यादि सहायता उपलब्ध कराई। 5 करोड़ से अधिक राशि जमा करके यह सेवा कार्य किया गया। ओडिशा और आंध्र क्षेत्र में चक्रवात के कारण समुद्र सीमा से जुड़े पूरे क्षेत्र में वहां के स्वयंसेवक समाज को साथ लेकर पीड़ितों की विविध सहायता हेतु सक्रिय हैं।
नशे के खिलाफ चेतना और तीन प्रेरणादायी व्यक्तित्व
युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन से पूरा समाज और सरकार चिंतित है। संघ, सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से नशीले पदार्थों से युवाओं को बचाने का सभी से आग्रह करता है। नशे के व्यापार के अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से बचाने का कार्य प्रशासन और सरकार कर रही है। गृह मंत्रालय इस विषय में विशेष कार्य कर रहा है। बैठक में नशे के विरुद्ध सामाजिक चेतना और पुनर्वास में सामाजिक संगठनों के साथ कार्य करने की योजना बनाई गई।
बैठक में सरकार्यवाह जी की ओर से तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के संबंध में वक्तव्य भी जारी किए गए। राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत राजनारायण बसु की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन एवं योगदान का स्मरण किया गया, जिसमें निर्धनों के उत्थान, नशा मुक्ति, महिलाओं में शिक्षा प्रसार और विधवाओं के पुनर्विवाह सहित स्वदेशी, स्वभाषा और स्वधर्म संरक्षण में उनके विशेष प्रयासों का उल्लेख रहा। शुद्धिकरण आंदोलन के पुरोधा स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100वें वर्ष पर उन्हें आदरांजलि अर्पित की गई। ओडिशा के कंधमाल जनजातीय क्षेत्र में स्वाभिमान, स्वावलंबन एवं स्वधर्म की जागृति के लिए जीवन समर्पित करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म के 100वें वर्ष पर उनका पुण्य स्मरण किया गया।
पत्रकारों के प्रश्नों पर सरकार्यवाह जी के उत्तर
पत्रकारों के प्रश्नों के जवाब में सरकार्यवाह जी ने कहा कि टेक्नोलॉजी को रोकना संभव नहीं है। सोशल मीडिया में अनावश्यक सामग्री के प्रसार के बारे में सरकार को सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व को साथ लेकर कोई कानून बनाना पड़े, तो आवश्यक निर्णय करे। संघ, परिवार में संस्कार और अनुशासन का आग्रह करता है। मोबाइल छोड़कर परिवार में एक साथ बैठकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा हो। परिवार को जीवन मूल्यों और समाज को संस्कार सिखाने की जिम्मेदारी लेनी होगी। पंच परिवर्तन के विषयों को संघ समाज में लेकर गया है।
लोकतंत्र और जेन जी से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन के लिए चुनाव की व्यवस्था है। अराजकता और अशांति के द्वारा यह कार्य देश के हित में नहीं है। भारत और विदेशों में ऐसे षड्यंत्र चल भी रहे हैं, इनसे सचेत रहना चाहिए। युवाओं की आकांक्षाओं पर संवाद होना चाहिए और नई पीढ़ी के साथ सकारात्मक संवाद करना चाहिए। युवाओं में आक्रोश का भाव आता है, उसको चैनलाइज करना चाहिए। उन्हें अराजक षड्यंत्र से बचाना चाहिए और उनकी आकांक्षाओं को समझना चाहिए। युवा ऊर्जा, सामाजिक संवेदना और सेवा भाव से युक्त होते हैं, उन्हें सकारात्मक कार्य से जोड़ने के प्रयास करने चाहिए।
संघ के पंजीयन से संबंधित प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज और संघ अलग न हों, पूरे समाज को ही संगठित करना अपना कार्य है, अतः संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत संघ कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन और समाज परिवर्तन के सभी कार्यों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है। महिलाओं को छोड़कर समाज की कल्पना भी संभव नहीं है। समाज के अनुमोदन से चलने वाला संघ का कार्य अरुणाचल, मिजोरम, त्रिपुरा जैसे दुर्गम और केरल और पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।
अगस्त-सितंबर में सरसंघचालक मोहन भागवत जी के तीन देशों के प्रवास में विश्व एकता और मानव एकता के लिए भारत के संदेश को देने का प्रयास किया गया। इस प्रवास में सरसंघचालक जी समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के वहां के प्रमुख लोगों से व्यक्तिगत एवं समूहों में मिले, जिसमें प्रमुख विश्वविद्यालयों के विद्वानों से वार्तालाप शामिल रहा। साथ ही स्वामी नारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा और जैन मंदिर में भी गए।
आगे क्या
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का समापन 4 नवंबर की सायं को हो रहा है। बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के आगामी क्रियान्वयन, अनुवर्तन तथा उनके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने के विषय में विचार-विमर्श हुआ। विशेष रूप से पंच परिवर्तन के विषयों को समाज के व्यवहार में प्रभावी रूप से उतारने तथा उनके निरंतर अनुवर्तन की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
इस तरह इंदौर की बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने आने वाले समय के लिए समाज जागरण, शाखा विस्तार और पंच परिवर्तन को व्यवहार में उतारने की दिशा भी तय की। दस करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचा संपर्क और एक लाख से अधिक स्थानों पर प्रत्यक्ष कार्य इस बात का प्रमाण है कि शताब्दी वर्ष में संघ का कार्य समाज के बीच और गहरा हुआ है।
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