Headlines

भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन बी28 बेंगलुरु में आकार ले रही है: 280 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति, कार बॉडी स्क्वीज टेस्ट के अंतिम चरण में

सांकेतिक चित्र: हाई-स्पीड ट्रेन सांकेतिक चित्र: हाई-स्पीड ट्रेन

बेंगलुरु ब्यूरो

भारत में हाई-स्पीड रेल का सपना अब सिर्फ कागज पर नहीं रहा। बेंगलुरु स्थित बीईएमएल की निर्माण इकाई में देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ढांचा तैयार हो चुका है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 नवंबर को इस इकाई का दौरा कर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने कार बॉडी के निर्माण से लेकर यात्री सीटों, एयर कंडीशनिंग सिस्टम और दूसरे उपकरणों तक का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ट्रेन के स्ट्रक्चरल डिजाइन की झलक भी साझा की गई, जिसमें छत, साइड की दीवारें, कैब और अंतिम सिरे की दीवारें दिखाई गईं।

बेंगलुरु में निरीक्षण के दौरान क्या देखा गया

निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने कार बॉडी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष निर्माण ढांचे को देखा। इसमें प्रिसिजन से तैयार किए गए जिग्स और फिक्स्चर्स शामिल हैं, जिनकी मदद से कार बॉडी के अलग-अलग हिस्सों को सटीक आकार दिया जाता है। अंडरफ्रेम, साइडवॉल, रूफ असेंबली, कार असेंबली, सतह की तैयारी और ट्रीटमेंट जैसे निर्माण चरणों को भी देखा गया।
निरीक्षण के दौरान साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण, उनके इंटीग्रेशन और असेंबली की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया गया। रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन के सभी प्रमुख घटकों का निर्माण, एकीकरण और परीक्षण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति पर संतोष जताया और इसे बेहतरीन प्रगति बताया।

बी28 क्या है: 8 कोच, 557 यात्री, 202 मीटर लंबाई

सांकेतिक चित्र: हाई-स्पीड ट्रेन
सांकेतिक चित्र: हाई-स्पीड ट्रेन

बी28 भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई हाई-स्पीड ट्रेनसेट है। इसे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और बीईएमएल मिलकर बना रहे हैं। इस ट्रेनसेट में कुल 8 कोच होंगे। ट्रेन की कुल लंबाई करीब 202 मीटर बताई जा रही है और इसमें 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
ट्रेन के ढांचे में चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं। यह डिजाइन भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें यात्रियों के आराम, सुरक्षा, पहुंच और ऊर्जा दक्षता पर विशेष जोर दिया गया है। ट्रेन 25 केवी एसी ट्रैक्शन सिस्टम पर चलेगी और इसमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे ब्रेक लगने पर ऊर्जा वापस प्राप्त की जा सकेगी।

स्क्वीज टेस्ट क्या होता है और यह क्यों जरूरी है

कार बॉडी तैयार होने के बाद अब उसकी मजबूती की परीक्षा चल रही है। इसे स्क्वीज टेस्ट कहा जाता है। इस परीक्षण में ट्रेन की कार बॉडी को नियंत्रित दबाव और खिंचाव वाली शक्तियों के अधीन किया जाता है। इससे यह परखा जाता है कि ढांचा कितना मजबूत है, कितना कठोर है और उसका आकार मानकों के अनुरूप बना रहता है या नहीं।
हाई-स्पीड ट्रेन के लिए यह परीक्षण इसलिए बेहद अहम है क्योंकि तेज रफ्तार पर चलने के दौरान ट्रेन के आसपास हवा के दबाव में बड़ा बदलाव आता है। रेल मंत्री ने बताया कि जब ट्रेन बहुत तेज गति से चलती है तो उसके आसपास वैक्यूम जैसी स्थिति बन जाती है। ऐसे में ढांचे का हर हाल में स्थिर रहना जरूरी होता है। इसीलिए पूरी संरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और उसे सबसे कड़े दबाव परीक्षण से गुजारा जा रहा है।
कार बॉडी की जांच पूरी होने के बाद इसमें प्रोपल्शन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर और दूसरे जरूरी उपकरण लगाए जाएंगे। ट्रेन के नीचे बोगी और उससे जुड़ी असेंबली भी फिट की जाएंगी। यानी अभी तैयार हुआ ढांचा आगे चलकर एक पूरी तरह काम करने वाली ट्रेन में तब्दील होगा।

गति का गणित: 280 डिजाइन गति, करीब 250 परिचालन गति

बी28 को 280 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन गति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसकी परिचालन गति करीब 250 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जा रही है। कुछ जानकारियों में परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा भी बताई गई है, जो लगभग इसी स्तर की है। डिजाइन गति और परिचालन गति में अंतर रखना हाई-स्पीड ट्रेनों में सामान्य बात है, ताकि सुरक्षा का पर्याप्त अंतर बना रहे।
गति के लिहाज से यह ट्रेन भारत में अब तक की सबसे तेज यात्री ट्रेनों से कहीं आगे होगी। अभी देश में चलने वाली तेज ट्रेनों की गति इससे काफी कम है। बी28 के आने से लंबी दूरी की यात्रा के समय में बड़ी कमी आने की उम्मीद है, हालांकि इसका असर तभी दिखेगा जब यह ट्रेन अपने तय कॉरिडोर पर नियमित सेवा में आएगी।

यात्रियों के आराम का भी रखा जा रहा है ध्यान

बुलेट ट्रेन बनाना सिर्फ गति हासिल करना नहीं है। यात्रियों के सफर का आराम भी इसके निर्माण का अहम पहलू है। निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने यात्री सीटों, हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम, कपलर और दूसरे उपकरणों का जायजा लिया।
तेज रफ्तार पर चलने वाली ट्रेन में सीटों की डिजाइन, केबिन का तापमान, कंपन और शोर जैसी चीजें यात्रियों के अनुभव को सीधे प्रभावित करती हैं। इसीलिए ट्रेन की इंजीनियरिंग में इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केबिन के भीतर शोर कम रखना, तापमान स्थिर रखना और कंपन को नियंत्रित करना हाई-स्पीड यात्रा की बुनियादी जरूरतें हैं। इन पर काम कार बॉडी के चरण में ही शुरू कर दिया गया है।

मौसम की परीक्षा: 50 डिग्री की गर्मी से शून्य से नीचे तक

भारत जैसे देश में अलग-अलग मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां ट्रेन के सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आगे ट्रेन की क्लाइमेट टेस्टिंग की योजना है। इसमें करीब 50 डिग्री की भीषण गर्मी से लेकर शून्य से नीचे के तापमान तक अलग-अलग परिस्थितियों में ट्रेन को परखा जाएगा।
धूल भरे माहौल और बारिश जैसे हालात में भी इसके सिस्टम की जांच होगी। परीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि लगातार बारिश और पानी के संपर्क में आने के बाद भी अलग-अलग उपकरण अच्छी तरह काम करते रहते हैं या नहीं। यह परीक्षण इसलिए जरूरी है क्योंकि यह ट्रेन देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग मौसम में चलने के लिए बनाई जा रही है।

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर: 508 किलोमीटर का सफर

बी28 को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए बनाया जा रहा है। यह कॉरिडोर करीब 508 किलोमीटर लंबा है। पूरे कॉरिडोर के 2029-30 के आसपास पूरा होने की बात कही जा रही है।
अस्थायी योजना के अनुसार, ट्रेन का पहला संचालन 15 अगस्त 2027 को सूरत-वापी खंड पर हो सकता है। यह खंड करीब 97 किलोमीटर लंबा है। ट्रैक ट्रायल 2027 के मध्य तक होने की उम्मीद जताई गई है। ये तारीखें अभी अस्थायी हैं और निर्माण तथा परीक्षण की प्रगति के अनुसार इनमें बदलाव भी हो सकता है।
इस कॉरिडोर के लिए पहले जापान से शिंकानसेन ट्रेनसेट खरीदने की योजना थी। अब स्वदेशी ट्रेनसेट बनाने का रास्ता चुना गया है। इससे देश में हाई-स्पीड रेल तकनीक के निर्माण, परीक्षण और रखरखाव की क्षमता विकसित होगी। बीईएमएल की इकाई में चल रहा काम इसी क्षमता निर्माण का हिस्सा माना जा रहा है।

उसी दिन रेलवे की दूसरी बड़ी खबर: बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर

बी28 के निरीक्षण वाले दिन ही रेलवे से जुड़ी एक और बड़ी खबर आई। रेल मंत्री ने बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की पहली यात्रा को हरी झंडी दिखाई। 16 कोच वाली इस ट्रेन की पहली विशेष यात्रा बेंगलुरु के सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल से रवाना हुई और उसे 2 नवंबर की सुबह करीब 6:15 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचना था।
इस सेवा की नियमित शुरुआत 2 नवंबर से हो रही है। ट्रेन संख्या 27652 बेंगलुरु से मुंबई के बीच सप्ताह में छह दिन चलेगी, सोमवार को छोड़कर। यह ट्रेन शाम 7:45 बजे बेंगलुरु से रवाना होकर अगले दिन सुबह 11:55 बजे मुंबई पहुंचेगी। वापसी दिशा में ट्रेन संख्या 27651 मुंबई से रात 8:10 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर 12 बजे बेंगलुरु पहुंचेगी और यह सेवा मंगलवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन चलेगी।
नियमित सेवा में इस ट्रेन के ठहराव अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, यादगीर, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और कल्याण में होंगे। 16 कोच वाली इस ट्रेन में आठ मोटर कार और चार ट्रेलर कार कोच शामिल हैं। यह सेवा बेंगलुरु और मुंबई जैसे दो बड़े शहरों के बीच रात की यात्रा का आरामदायक विकल्प बनेगी।

आगे क्या होगा

बी28 के लिए अब सबसे अहम चरण परीक्षणों का है। स्क्वीज टेस्ट के बाद उपकरणों की फिटिंग, क्लाइमेट टेस्टिंग और ट्रैक ट्रायल होंगे। रोलआउट वर्ष के अंत तक या अगले वर्ष की शुरुआत में होने की उम्मीद जताई गई है। इसके बाद ही ट्रेन को यात्री सेवा के लिए तैयार माना जाएगा।
भारत के लिए यह परियोजना सिर्फ एक ट्रेन बनाने तक सीमित नहीं है। इससे देश में कार बॉडी निर्माण, मॉड्यूल इंटीग्रेशन और क्वालिटी टेस्टिंग की क्षमता विकसित हो रही है। आने वाले वर्षों में यही अनुभव दूसरी हाई-स्पीड परियोजनाओं में काम आएगा। बेंगलुरु में आकार ले रही बी28 इसी दिशा में पहला बड़ा कदम है।

देश में डिजिटल यात्रा से जुड़ी एक और ताजा पहल की जानकारी यहाँ पढ़ें।

उसी सप्ताह दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ा बड़ा आयोजन भी हो रहा है, उसकी जानकारी यहाँ पढ़ें।

बुलेट ट्रेन की निर्माण प्रक्रिया की ताजा जानकारी यहाँ उपलब्ध है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार