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एमपीपीएससी एडीपीओ परीक्षा आज: 107 पदों के लिए 83 केंद्रों पर करीब 33 हजार अभ्यर्थी, बायोमेट्रिक जांच के बीच एक पाली में हुई परीक्षा

सांकेतिक चित्र: परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी सांकेतिक चित्र: परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी

डेस्क रिपोर्ट

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी यानी एडीपीओ भर्ती परीक्षा 2026 रविवार को आयोजित की गई। प्रदेश के चार प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में बनाए गए कुल 83 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा एक ही पाली में संपन्न हुई। इस भर्ती के माध्यम से कुल 107 पदों को भरा जाना है, जिनके लिए करीब 33 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के आयोजन को पारदर्शी और नकलविहीन बनाने के लिए आयोग ने सुरक्षा और पहचान की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की थी।

एक पाली में हुई परीक्षा, दोपहर 12 से 3 बजे तक

एडीपीओ परीक्षा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक एक ही पाली में आयोजित की गई। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने के तय समय से 90 मिनट पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे, ताकि प्रवेश के समय जांच की प्रक्रिया बिना जल्दबाजी के पूरी हो सके। परीक्षा ऑफलाइन माध्यम से ओएमआर शीट पर ली गई। अभ्यर्थियों को केंद्र के भीतर केवल बॉलपेन, पारदर्शी पानी की बोतल, ई-प्रवेश पत्र और अपना पहचान पत्र ले जाने की अनुमति दी गई थी। परीक्षा केंद्रों के प्रवेश द्वार के पास अनुमत और प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची भी प्रदर्शित की गई थी।

परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान भी लागू रहा, इसलिए अभ्यर्थियों को उत्तर देते समय विशेष सावधानी बरतनी थी। गलत उत्तर पर अंक काटे जाने की व्यवस्था के चलते अनुमान पर आधारित उत्तरों से बचने की सलाह पहले ही दी जा चुकी थी। परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों की तैनाती भी की गई थी, जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखते रहे।

चार शहरों में 83 केंद्र, इंदौर में सबसे अधिक 39 केंद्र

परीक्षा के लिए प्रदेश के चार शहरों में कुल 83 केंद्र बनाए गए थे। इनमें सबसे अधिक केंद्र इंदौर में थे, जहां 39 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई। इंदौर में करीब 15,924 अभ्यर्थियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी। शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों जीएसआईटीएस, होलकर कॉलेज, अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, मालव कन्या महाविद्यालय और किला मैदान सहित अन्य संस्थानों में केंद्र स्थापित किए गए थे।

भोपाल में 19 केंद्र बनाए गए थे, जबकि ग्वालियर में 11 और जबलपुर में 14 केंद्रों पर परीक्षा की व्यवस्था की गई थी। केंद्रों की संख्या से ही स्पष्ट है कि इस परीक्षा का दायरा प्रदेश के चारों प्रमुख संभागीय शहरों तक फैला हुआ था। बड़ी संख्या में

अभ्यर्थियों के एक ही दिन परीक्षा देने के कारण केंद्रों पर भीड़ प्रबंधन और जांच की व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया था।

सांकेतिक चित्र: परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी
सांकेतिक चित्र: परीक्षा कक्ष में अभ्यर्थी

भोपाल में 19 केंद्रों पर करीब सात हजार अभ्यर्थी

राजधानी भोपाल में परीक्षा के लिए 19 केंद्र बनाए गए थे, जिनमें 15 सरकारी और 4 निजी स्कूल व कॉलेज शामिल थे। भोपाल में करीब सात हजार अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दी गई थी। शहर के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, शासकीय उमावि अरेरा कॉलेज, राजा भोज स्कूल और भेल कॉलेज सहित अन्य स्कूल-कॉलेजों में केंद्र बनाए गए थे।

भोपाल के केंद्रों पर भी वही त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था लागू रही, जो प्रदेश के अन्य शहरों में थी। अभ्यर्थियों की पहचान बायोमेट्रिक प्रणाली से की गई और प्रवेश पत्र की स्कैनिंग के बाद ही उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत नजर रखी जा सके।

त्रिस्तरीय जांच: बायोमेट्रिक, सीसीटीवी और मेटल डिटेक्टर

इस परीक्षा की सबसे खास बात सुरक्षा की त्रिस्तरीय व्यवस्था रही। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के समय अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई। पहचान की पुष्टि बायोमेट्रिक प्रणाली से की गई, प्रवेश पत्र की स्कैनिंग की गई और हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से तलाशी ली गई। इसके साथ ही सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई।

पूरी जांच प्रक्रिया के संचालन का जिम्मा आयोग की ओर से अनुबंधित एजेंसी को सौंपा गया था। परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की गई थी, ताकि परीक्षा निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। आयोग का उद्देश्य इस परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाना था, क्योंकि एक पद के लिए लगभग 280 से 300 अभ्यर्थियों के बीच मुकाबला था। इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता बनाए रखना आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी।

प्रश्नपत्र का स्वरूप: मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान के 50 प्रश्न

परीक्षा के प्रश्नपत्र में मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान से जुड़े 50 प्रश्न पूछे जाने की जानकारी सामने आई थी। प्रश्नपत्र का यह हिस्सा अभ्यर्थियों के प्रदेश से जुड़े सामान्य ज्ञान की परख के लिए रखा गया था। इसके अलावा विधि से जुड़े प्रश्न भी प्रश्नपत्र का अहम हिस्सा रहे। एडीपीओ का पद जिला लोक अभियोजन से जुड़ा होता है, इसलिए अभ्यर्थियों से विधिक ज्ञान और प्रदेश की सामान्य जानकारी दोनों की अपेक्षा की जाती है।

परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह पद सीधे न्यायिक प्रक्रिया और अभियोजन व्यवस्था से जुड़ा है। जिला लोक अभियोजन अधिकारी का काम अदालतों में राज्य पक्ष की ओर से अभियोजन का संचालन करना होता है। यही कारण है कि इस पद के लिए चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया भी शामिल है।

18 अक्टूबर से टलकर 1 नवंबर को हुई परीक्षा

यह परीक्षा पहले 18 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन परीक्षा केंद्रों की कमी के कारण आयोग को इसकी तारीख बदलनी पड़ी थी। आयोग के अधिकारियों के अनुसार अभ्यर्थियों की संख्या अधिक थी और उपलब्ध केंद्र कम पड़ रहे थे। अतिरिक्त केंद्रों की व्यवस्था में समय लगने के कारण परीक्षा को 1 नवंबर के लिए पुनर्निर्धारित किया गया।

परीक्षा की तारीख बदलने के साथ ही पदों की संख्या में भी बड़ा बदलाव हुआ था। शुरुआत में इस भर्ती के लिए केवल 17 पद विज्ञापित किए गए थे, लेकिन अभ्यर्थियों की मांग के बाद आयोग ने पदों की संख्या बढ़ाकर 107 कर दी। विज्ञापन 10 मार्च 2026 को जारी किया गया था और 7 सितंबर को शुद्धिपत्र जारी कर परीक्षा की नई तारीख 1 नवंबर घोषित की गई थी। प्रवेश पत्र अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराए गए थे।

हाई कोर्ट ने तारीख बदलने की याचिका खारिज की

परीक्षा की नई तारीख को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 1 नवंबर को ही बैंकिंग क्षेत्र की विशेषज्ञ अधिकारी यानी लॉ ऑफिसर की मुख्य परीक्षा भी निर्धारित है, जिससे दोनों परीक्षाओं में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। याचिका में परीक्षा की तारीख बदलने और प्रवेश पत्र जारी करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हालांकि अदालत ने इस याचिका में हस्तक्षेप का पर्याप्त आधार नहीं पाया और याचिका खारिज कर दी। इसके बाद परीक्षा 1 नवंबर को ही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित हुई। आयोग की ओर से अदालत में पक्ष रखा गया था कि परीक्षा की व्यवस्था पूरी हो चुकी है और तारीख बदलना संभव नहीं है। याचिका खारिज होने के बाद अभ्यर्थियों को तय कार्यक्रम के अनुसार ही परीक्षा में शामिल होना था।

आगे क्या: परिणाम और इंटरव्यू की प्रक्रिया

लिखित परीक्षा के संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर परिणाम पर रहेगी। आयोग की प्रक्रिया के अनुसार लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस साल की शेष परीक्षाओं के परिणाम और इंटरव्यू की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।

एडीपीओ परीक्षा के अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परिणाम और आगे की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। प्रवेश पत्र, परिणाम और इंटरव्यू से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं आयोग की वेबसाइट पर ही जारी की जाती हैं। किसी भी अनधिकृत स्रोत से मिली जानकारी पर भरोसा करने से बचना चाहिए।

इस परीक्षा के आयोजन के साथ ही प्रदेश में एक और बड़ी भर्ती परीक्षा का चरण पूरा हो गया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने और त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई यह परीक्षा प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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