भोपाल ब्यूरो
सार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि 1 नवंबर 2026 तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं और 15 नवंबर तक यह संख्या 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पात्र भू-स्वामियों की पक्की रजिस्ट्री का स्टाम्प शुल्क सरकार अपने खजाने से भरेगी, और धनतेरस के दिन 6 नवंबर को सभी मंत्री, सांसद और विधायक गांवों में जाकर शत-प्रतिशत रजिस्ट्री अपने सामने पूरी कराएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की अब तक की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने योजना की वर्तमान स्थिति, अब तक हुए पंजीयन और आगे की कार्ययोजना का विवरण प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना को एक बड़े अभियान के रूप में चलाया जाए, ताकि प्रदेश के सभी पात्र भू-स्वामियों के पट्टों की निशुल्क पक्की रजिस्ट्री जल्द से जल्द पूरी कराई जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्लॉट और मकान भू-स्वामी का ही रहेगा और उसकी पक्की रजिस्ट्री भी उसी के नाम होगी, लेकिन इसके लिए लगने वाला स्टाम्प शुल्क भू-स्वामी को अपनी जेब से नहीं देना होगा। यह राशि राज्य सरकार अपने खजाने से जमा करेगी। इस फैसले का सीधा लाभ उन लाखों परिवारों को मिलेगा, जिनके पास अपने मकान या प्लॉट का पट्टा तो है, लेकिन अब तक उसकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हो पाई है।
पक्की रजिस्ट्री क्यों जरूरी है
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि प्लॉट और घर के साथ उसके पक्के राजस्व दस्तावेज होना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि यही दस्तावेज भू-स्वामी को उसका मालिकाना हक दिलाते हैं और उसे अपनी संपत्ति के क्रय-विक्रय का अधिकार भी देते हैं। पट्टा होने के बाद भी जब तक पक्की रजिस्ट्री नहीं होती, तब तक संपत्ति का कानूनी दस्तावेज अधूरा माना जाता है। इससे कई बार परिवारों को बैंक से ऋण लेने, संपत्ति का लेन-देन करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है।
पक्की रजिस्ट्री हो जाने के बाद भू-स्वामी के पास अपनी संपत्ति का पूर्ण और कानूनी दस्तावेज होगा। इससे न केवल उसका मालिकाना हक मजबूत होगा, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी, क्योंकि वह अपनी संपत्ति के आधार पर ऋण और अन्य सुविधाएं प्राप्त कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पक्की रजिस्ट्री केवल जमीन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि व्यक्ति के मालिकाना हक और आर्थिक मजबूती का आधार है।
यही वजह है कि सरकार ने इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान के रूप में चलाने का निर्णय लिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत सभी पात्रताधारियों को उनकी जमीन के पट्टे की पक्की रजिस्ट्री कराकर दी जाएगी। पात्रता की शर्तें और प्रक्रिया राजस्व विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होंगी।
12.87 लाख रजिस्ट्रियां पूरी, 15 नवंबर तक 20 लाख का लक्ष्य
बैठक में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने योजना की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 2026 की स्थिति में प्रदेश में कुल 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्रियों का पंजीयन पूरा कर लिया गया है। सरकार का प्रयास है कि आगामी 15 नवंबर तक प्रदेश में 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी कर ली जाएं।
इस लक्ष्य को पाने के लिए अब काम की गति और बढ़ानी होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के अमल में और भी तेजी लाई जाए और इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि कोई भी पात्र भू-स्वामी इस सुविधा से वंचित न रहे। जिलों में चल रहे शिविरों और पंजीयन की प्रक्रिया को और व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप तथा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल भी उपस्थित रहे। राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिलावार प्रगति की जानकारी भी बैठक में रखी।

धनतेरस पर गांवों में पहुंचेंगे मंत्री, सांसद और विधायक
योजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को भी मैदान में उतारने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि आगामी 6 नवंबर को धनतेरस के दिन प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव या अपनी पसंद के किसी गांव में पहुंचेंगे। वहां वे अपनी मौजूदगी में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत पात्र भू-स्वामियों की शत-प्रतिशत रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया पूरी करवाएंगे।
जिस गांव में शत-प्रतिशत रजिस्ट्री पूरी होगी, वहां जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में छोटा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इससे गांव के लोगों में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और बाकी गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के प्रभारी मंत्रियों, स्थानीय मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय बनाकर गांवों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराएं।
कलेक्टरों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि धनतेरस के दिन गांवों में पंजीयन के लिए जरूरी व्यवस्था, अधिकारी और दस्तावेज पहले से तैयार रहें, ताकि मौके पर किसी भी पात्र व्यक्ति को लौटना न पड़े। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से शिविरों में लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा और प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
अभियान के रूप में चलेगी योजना
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना को सामान्य सरकारी काम की तरह नहीं, बल्कि एक बड़े अभियान के रूप में चलाया जाए। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि गांव-गांव तक यह जानकारी पहुंचे कि पट्टे की पक्की रजिस्ट्री निशुल्क कराई जा रही है और उसका स्टाम्प शुल्क सरकार भरेगी।
प्रचार के साथ-साथ प्रक्रिया को सरल और तेज रखने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र भू-स्वामियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए शिविरों और मैदानी अमले की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। पटवारियों और राजस्व अमले की भूमिका इस अभियान में सबसे अहम होगी, क्योंकि पंजीयन की प्रक्रिया गांव के स्तर पर ही पूरी होनी है।
योजना की शुरुआत के बाद शुरुआती दिनों में काम की गति को लेकर भी चर्चा होती रही थी। मुख्यमंत्री ने पहले भी कलेक्टरों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। अब समीक्षा बैठक में 12.87 लाख पंजीयन का आंकड़ा सामने आने के बाद सरकार का मानना है कि अभियान ने गति पकड़ ली है और अगले दो सप्ताह में 20 लाख का लक्ष्य पाया जा सकता है।
किसे मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ उन भू-स्वामियों को मिलेगा, जिनके पास उनके प्लॉट या मकान के पट्टे तो उपलब्ध हैं, परंतु उनकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे सभी पात्र भू-स्वामियों की संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री सरकार अपने खर्च पर कराएगी। रजिस्ट्री के लिए लगने वाली स्टाम्प शुल्क की राशि भी राज्य सरकार ही जमा करेगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन परिवारों को सबसे अधिक राहत मिलेगी, जो वर्षों से अपने मकान या प्लॉट पर रह रहे हैं, लेकिन कानूनी दस्तावेज के अभाव में अपनी संपत्ति का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे थे। पक्की रजिस्ट्री के बाद वे अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से बेच सकेंगे, गिरवी रख सकेंगे और उसके आधार पर ऋण ले सकेंगे।
योजना से जुड़ी पात्रता, दस्तावेज और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी राजस्व विभाग और जिला प्रशासन के माध्यम से दी जा रही है। पात्र व्यक्तियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पट्टे और पहचान से जुड़े दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि शिविरों में पंजीयन में देरी न हो।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर 6 नवंबर के धनतेरस अभियान पर रहेगी, जब मंत्री, सांसद और विधायक गांवों में जाकर शत-प्रतिशत रजिस्ट्री की प्रक्रिया अपने सामने पूरी कराएंगे। इसके बाद 15 नवंबर तक 20 लाख पंजीयन का लक्ष्य पूरा करने के लिए जिलों में चल रहे काम की समीक्षा फिर से की जाएगी।
यदि यह लक्ष्य समय पर पूरा होता है, तो यह प्रदेश के ग्रामीण परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे न केवल लाखों परिवारों को अपनी संपत्ति का कानूनी दस्तावेज मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि कानूनी मालिकाना हक के बाद संपत्ति का उपयोग आर्थिक गतिविधियों के लिए आसानी से हो सकेगा।
सरकार का कहना है कि कोई भी पात्र भू-स्वामी इस अभियान से छूटना नहीं चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि और राजस्व अमला मिलकर काम करेंगे। आने वाले दिनों में जिलों से पंजीयन के नए आंकड़े सामने आएंगे, जिनसे यह साफ होगा कि धनतेरस अभियान ने लक्ष्य को कितनी गति दी है।
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