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दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली संपन्न: राहुल गांधी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई, खरगे बोले — लड़ाई जारी रहेगी

राहुल गांधी (फ़ाइल फोटो) फाइल चित्र: कांग्रेस नेता राहुल गांधी

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को इंडिया गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में करोड़ों नाम कटने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि गठबंधन की लड़ाई सीईसी के इस्तीफे तक जारी रहेगी। भाजपा ने रैली को अराजकता फैलाने की सोची-समझी साजिश करार दिया, जबकि चुनाव आयोग पहले ही इन आरोपों से इनकार कर चुका है।

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी गठबंधन इंडिया की महारैली संपन्न हो गई। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ आयोजित इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा (माले) लिबरेशन सहित गठबंधन के घटक दलों के नेता एक मंच पर नजर आए। लाइव अपडेटों के अनुसार करीब 20 विपक्षी दलों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम शाम करीब साढ़े चार बजे राष्ट्रगान के साथ समाप्त हुआ, जिसके बाद नेता मैदान से रवाना हो गए और कार्यकर्ता भी लौटने लगे। रैली के लिए सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की अनुमति दी गई थी।

खरगे के आवास से शुरू हुआ मार्च, मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पहुंचे नेता

रैली से पहले विपक्षी नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र हुए। वहां से कई नेता खुले वाहनों में सवार होकर मिंटो रोड पहुंचे और फिर कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू हुआ ‘चलो दिल्ली’ मार्च अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचा। मैदान में वरिष्ठ नेताओं के लिए तिरंगे से सजे बड़े पंडाल के साथ-साथ गठबंधन के विभिन्न घटक दलों की प्रदेश इकाइयों के लिए अलग मंच भी तैयार किया गया था। बड़ी संख्या में समर्थक सुबह से ही दिल्ली पहुंचने लगे थे, जिनमें से कई एक दिन पहले ही राजधानी आ गए थे। दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, ड्रोन निगरानी और सीसीटीवी के जरिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। रिपोर्टों के अनुसार मध्य दिल्ली में करीब दस हजार पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए, जिनमें चार हजार से अधिक कर्मी रामलीला मैदान के आसपास थे। भीड़ के आकार को लेकर आंकड़े अलग-अलग रहे — आयोजकों ने दस लाख तक लोगों के जुटने की उम्मीद जताई थी, जबकि पुलिस का अनुमान करीब पचास हजार का था। ये दोनों आंकड़े संबंधित पक्षों के दावे और अनुमान के रूप में ही सामने आए हैं।

राहुल गांधी के आरोप: वोट चोरी, संविधान और सीईसी पर सीधा हमला

सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रामलीला मैदान से देश को एक संदेश गया है कि लोकतंत्र और संविधान को खत्म नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वर्षों से वोट चोरी हो रही है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान करोड़ों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के साथ-साथ मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित 2024 के लोकसभा चुनाव में भी वोट चोरी हुई और इसलिए वह चुनाव अवैध था। ये सभी दावे विपक्षी नेताओं के आरोपों के रूप में सामने आए हैं, चुनाव आयोग ने इन्हें पहले ही खारिज किया है।

राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल भी जाना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वह मोदी, शाह या ज्ञानेश कुमार से नफरत नहीं करते, लेकिन तीनों ने देश की आत्मा, संविधान और लोकतंत्र पर हमला किया है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह प्रदर्शन किसी एक पार्टी या नेता का नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान की आवाज है, और इसमें मोहब्बत और भाईचारा लाना ही मकसद है। उन्होंने कनॉट प्लेस की दुकानें बंद होने का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि भाजपा ने रैली में शामिल होने आए लोगों के लिए दुकानें जबरन बंद करवाईं, जिससे व्यापारियों को नुकसान हुआ।

राहुल गांधी (फ़ाइल फोटो)
फाइल चित्र: कांग्रेस नेता राहुल गांधी

खरगे का ऐलान: सीईसी के इस्तीफे तक जारी रहेगी लड़ाई

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभा में कहा कि इंडिया गठबंधन की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी और शाह महिला, युवा और दलित मतदाताओं के वोटों में हेरफेर की कोशिश कर रहे हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह संघर्ष जरूरी है। खरगे ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार के पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। खरगे के इस ऐलान को रैली के सबसे स्पष्ट राजनीतिक संदेशों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि इससे गठबंधन ने अपने आंदोलन की अगली दिशा भी तय कर दी है — यानी सीईसी के मुद्दे पर दबाव बनाए रखना।

अखिलेश, ममता, तेजस्वी और अन्य नेताओं के भाषण

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ वोट काटे गए हैं और अगर 403 विधानसभाओं का गणित लगाया जाए तो हर विधानसभा में वोट कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग डबल इंजन की सरकार का दावा करते थे, उन्हें काशी की जनता ने जवाब दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल का उदाहरण देते हुए मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने रामलीला मैदान की तुलना महाभारत के कुरुक्षेत्र से की और कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह लड़ाई धर्मयुद्ध जैसी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी मंच पर नजर आए। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता भी रैली में शामिल हुए। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद प्रियंका गांधी भी मंच पर मौजूद रहीं।

कौन नहीं पहुंचा: उद्धव ठाकरे, शरद पवार और केजरीवाल की गैरमौजूदगी चर्चा में

रैली में कई बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। रिपोर्टों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार रैली में नहीं पहुंचे। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी मंच पर नजर नहीं आए, हालांकि पार्टी के नेता गोपाल राय प्रियंका गांधी के पास बैठे दिखाई दिए। इन गैरमौजूदगियों को लेकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल भी उठे, लेकिन मंच पर मौजूद नेताओं ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। गौरतलब है कि रैली से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को खरगे के आवास पर गठबंधन ने सीईसी के खिलाफ सांकेतिक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही भी की थी, जिसमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में प्रस्ताव पारित किया गया था।

भाजपा का जवाब: नड्डा ने रैली को बताया अराजकता की साजिश

रैली पर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता जेपी नड्डा ने कहा कि रैली लोकतंत्र के सम्मान का कार्य नहीं, बल्कि अराजकता फैलाने की सोची-समझी साजिश है। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की राजनीति का पहला चरण झूठ और अफवाह फैलाना, दूसरा चरण सड़कों पर अराजकता करना, तीसरा चरण देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना और चौथा चरण विदेशी ताकतों के इशारे पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रैली का मकसद त्योहारों के मौसम में दिल्ली के दुकानदारों और व्यापारियों की कमाई को नुकसान पहुंचाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करना था। दिल्ली भाजपा ने भी रैली से पहले जारी एक पोस्टर में इसे ‘ठगों का मेला’ करार दिया था। भाजपा ने 1 नवंबर की तारीख को लेकर भी सवाल उठाए थे, क्योंकि इसी दिन 1984 में सिख विरोधी हिंसा हुई थी। व्यापारियों के संगठनों ने भी रैली से कारोबार पर असर पड़ने की आशंका जताई थी, हालांकि राहुल गांधी ने समर्थकों से अपील की थी कि वे दिल्ली के व्यापारियों से खरीदारी करें ताकि उन्हें फायदा हो।

चुनाव आयोग का रुख और आगे की राह

चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को लगातार खारिज किया है। आयोग का रुख रहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है और वोट चोरी के आरोप बेबुनियाद हैं। इस टकराव के बीच रैली के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि गठबंधन अपने आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाता है — क्या वह संसद में सीईसी के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया की ओर बढ़ेगा, जैसा कि संकेत दिए गए हैं, या सड़क पर प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखेगा। दूसरी ओर, भाजपा ने भी जवाबी मार्च और बयानों के जरिए अपना पक्ष मजबूती से रखने का संकेत दिया है। आने वाले दिनों में बिहार सहित अन्य राज्यों के चुनावी माहौल में इस मुद्दे के और गर्माने की संभावना है, क्योंकि मतदाता सूची और चुनावी निष्पक्षता का सवाल अब सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

रैली के समापन के साथ ही दिल्ली में यातायात प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जाने लगे और मध्य दिल्ली के बाजारों में सामान्य गतिविधियां लौटने लगीं। हालांकि, रैली में उठे सवाल और जवाबी आरोप आने वाले हफ्तों की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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