नई दिल्ली ब्यूरो
सार: 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली होने जा रही है। मिंटो रोड से दोपहर 12 बजे शुरू होकर मार्च रामलीला मैदान पहुंचेगा, जहां विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठाएंगे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोगों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है।
देश की राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान एक बार फिर बड़े राजनीतिक आयोजन का गवाह बनने जा रहा है। इंडिया गठबंधन की ओर से 1 नवंबर, रविवार को यहां ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली के लिए विपक्षी दलों की तैयारियां अंतिम दौर में हैं और देशभर से कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने का दावा किया जा रहा है। रैली से एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को गठबंधन के सांसदों का एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी रखा गया है। विपक्ष का कहना है कि यह लड़ाई मतदाताओं के अधिकार और संविधान की रक्षा की लड़ाई है।
मार्च कहां से शुरू होगा, कहां पहुंचेगा
तय कार्यक्रम के अनुसार, गठबंधन का ‘चलो दिल्ली’ मार्च 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू होगा। यह मार्च दिल्ली की सड़कों से होता हुआ रामलीला मैदान पहुंचेगा, जहां बड़ी जनसभा का आयोजन होगा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आम लोगों, छात्रों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसमें हर वह व्यक्ति शामिल हो सकता है जो लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाना चाहता है।
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल होंगे। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेंगे। झारखंड से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के दिल्ली जाने का दावा किया गया है। आयोजकों का कहना है कि रामलीला मैदान में होने वाली जनसभा में गठबंधन के शीर्ष नेता एक मंच पर नजर आएंगे और अपनी मांगों को जनता के सामने रखेंगे।
राहुल गांधी की अपील में क्या कहा गया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में लोगों से 1 नवंबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा है, “रामलीला मार्च, लोकतंत्र को बचाने का, वोट चोरी को रोकने का, संविधान को बचाने का मार्च है। यह किसी एक राजनीतिक पार्टी का मार्च नहीं है।” उन्होंने छात्र समूहों से भी इस मार्च में शामिल होने का आग्रह किया है और कहा है कि जो लोग लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं, वे इस मार्च का हिस्सा बनें।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा है कि लोगों को पुलिस या किसी तरह की कार्रवाई की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने इसे देश की आत्मा का मार्च बताया है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि यह मार्च मतदाताओं के अधिकार की रक्षा के लिए निकाला जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इन आरोपों को विपक्ष की ओर से उठाया जा रहा है और इन्हें सरकार तथा चुनाव आयोग के सामने रखा जा रहा है।

रैली की मुख्य मांगें क्या हैं
कांग्रेस नेताओं ने बताया है कि इस महारैली में चार मुख्य मांगें उठाई जाएंगी। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को रद्द करने की है। तीसरी मांग चुनाव में मतपत्र के इस्तेमाल की है और चौथी मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को फिर से शामिल करने की है। विपक्ष का कहना है कि इन मांगों के जरिए चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि मतदाता सूची से करीब साढ़े 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने से लोकतंत्र कमजोर हुआ है। यह आंकड़ा तेजस्वी यादव के दावे के रूप में सामने आया है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में इस पर सवाल उठ रहे हैं। रैली में इन्हीं मुद्दों को जनता के सामने रखने की तैयारी है।
कौन-कौन से नेता पहुंचेंगे दिल्ली
रैली में शामिल होने के लिए कई राज्यों के नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ विशेष विमान से दिल्ली रवाना हो चुके हैं। झारखंड से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भी दिल्ली जाने का दावा किया गया है। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव भी शुक्रवार को पटना से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी लोगों से 1 नवंबर को रामलीला मैदान पहुंचने की अपील की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि वह इस महारैली में शामिल होंगे। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी शैलजा ने कहा है कि यह लड़ाई अब जनता की अदालत में है और विपक्ष इस रैली के जरिए मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को जनता के सामने उठाने की तैयारी कर रहा है।
मॉक पार्लियामेंट और 31 अक्टूबर का कार्यक्रम
रैली से पहले गठबंधन के सांसदों ने एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम की भी योजना बनाई थी। इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग का कार्यक्रम रखा गया था। यह कार्यक्रम पहले 30 अक्टूबर को होना था, लेकिन दिल्ली में लगातार बारिश के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अब यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसकी जानकारी दी है।
इस प्रतीकात्मक कार्यक्रम के बाद 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली होगी। विपक्षी दलों का कहना है कि इस क्रम के जरिए वे चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों को संसद से सड़क तक ले जाना चाहते हैं। रैली के आयोजकों का कहना है कि इसमें छात्र, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा लोग, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हो सकते हैं।
व्यापारी संगठन की अपील और राहुल का जवाब
रैली की तारीख को लेकर दिल्ली के व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री की ओर से भी एक अपील सामने आई थी। संगठन ने राहुल गांधी से कहा था कि दीपावली के मौके पर कारोबार प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए रैली को दीपावली तक टाल दिया जाए। राहुल गांधी ने इस अपील को नहीं माना है और 1 नवंबर को ही महारैली करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए यह मार्च आयोजित किया जा रहा है।
दूसरी ओर, रैली की तारीख पर राजनीतिक सवाल भी उठे हैं। भाजपा नेताओं की ओर से रैली की तारीख पर आपत्ति जताई गई है। विपक्ष का कहना है कि रैली का मकसद मतदाताओं के अधिकार की रक्षा है और इसे किसी एक दिन के विवाद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इस तरह रैली से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
पृष्ठभूमि: एसआईआर और मतदाता सूची का विवाद
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, जिसे एसआईआर कहा जाता है, पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक बहस के केंद्र में है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की गहन जांच की जाती है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सरकार और चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को शुद्ध करने की सामान्य प्रक्रिया बताया जाता रहा है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।
इसी विवाद की पृष्ठभूमि में इंडिया गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पहले भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। 1 नवंबर की महारैली को इसी अभियान की बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि रैली के जरिए वह मतदाताओं के अधिकार, महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक सद्भाव और किसानों व युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाना चाहता है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर 31 अक्टूबर के प्रतीकात्मक कार्यक्रम और 1 नवंबर की महारैली पर है। रैली के बाद यह साफ होगा कि इसमें कितनी संख्या में लोग शामिल हुए और विपक्ष की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। दिल्ली पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। रैली के दिन दिल्ली के मध्य इलाकों में यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए लोगों को पहले से जानकारी दी जा रही है।
रैली के बाद विपक्षी दल अपने आगे के कार्यक्रमों की घोषणा कर सकते हैं। इस बीच, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है। प्रदेश 24 न्यूज़ इस रैली से जुड़ी हर बड़ी जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।
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