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वित्त विभाग ने जारी किया महंगाई भत्ते का आदेश: मध्य प्रदेश में DA 58% से बढ़कर 60%, छठे वेतनमान में दर 262% हुई

सांकेतिक चित्र: वल्लभ भवन, भोपाल सांकेतिक चित्र: वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल ब्यूरो

मुख्यमंत्री की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद वित्त विभाग ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की बढ़ी दरों के औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। सातवें वेतनमान में भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है, जबकि छठे वेतनमान में दर 262 प्रतिशत पर पहुंच गई है। नौ महीने का एरियर तीन समान किस्तों में मिलेगा और इस अवधि में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी।

दीपावली से ठीक पहले राज्य के शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की थी। इसके बाद वित्त विभाग ने उसी दिन आदेश जारी कर वृद्धि को औपचारिक रूप दे दिया। घोषणा से आदेश तक की यह रफ्तार इसलिए अहम है, क्योंकि अब बढ़ी दरों का भुगतान तय कार्यक्रम के अनुसार होना है और किसी अतिरिक्त औपचारिकता का इंतजार नहीं रह गया है।

आदेश में क्या-क्या तय हुआ

वित्त विभाग की ओर से जारी ताजा जानकारी के अनुसार सातवें वेतनमान के तहत कार्यरत शासकीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अब 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत की दर से मिलेगा। यह वृद्धि एक जनवरी 2026 से देय होगी। इससे पहले जुलाई 2025 से प्रदेश में सात लाख से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को 58 प्रतिशत की दर से भत्ता दिया जा रहा था। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए जनवरी 2026 से भत्ता बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया था, लेकिन प्रदेश में यह वृद्धि लंबित रही। अब राज्य के कर्मचारियों की दर भी 60 प्रतिशत हो गई है।

छठे वेतनमान के मामले में दरों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। छठे वेतनमान में महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की दर 257 प्रतिशत से बढ़कर 262 प्रतिशत हो गई है। यानी पुराने वेतनमान में काम कर रहे कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों को भी इस आदेश का सीधा लाभ मिलेगा। सातवें और छठे, दोनों वेतनमानों की दरें एक ही आदेश-प्रक्रिया के तहत संशोधित की गई हैं, ताकि किसी वर्ग के भुगतान में विलंब न हो।

एरियर कैसे और कब मिलेगा

सांकेतिक चित्र: वल्लभ भवन, भोपाल
सांकेतिक चित्र: वल्लभ भवन, भोपाल

आदेश के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 तक के नौ महीने के एरियर का भुगतान तीन समान मासिक किस्तों में किया जाएगा। ये किस्तें नवंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में दी जाएंगी। अक्टूबर माह के वेतन से, जो नवंबर में देय होगा, बढ़े हुए महंगाई भत्ते का नकद भुगतान शुरू हो जाएगा। यानी नवंबर की सैलरी स्लिप में कर्मचारी बढ़ी दर का असर सीधे देख सकेंगे, जबकि पिछला बकाया किस्तों में खाते में पहुंचेगा।

एक महत्वपूर्ण व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए की गई है जो एक जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं या जिनका इस अवधि में निधन हो गया है। ऐसे कर्मचारियों को अथवा उनके नामांकित सदस्य को एरियर की पूरी राशि एकमुश्त भुगतान की जाएगी। उन्हें किस्तों का इंतजार नहीं करना होगा। यह प्रावधान इसलिए अहम है, क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद आय का नियमित प्रवाह बदल जाता है और एकमुश्त राशि से परिवारों को तत्काल राहत मिलेगी।

पेंशनरों के लिए क्या बदला

पेंशनरों और परिवार पेंशनरों के लिए भी महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि का आदेश जारी कर दिया गया है। सातवें वेतनमान वाले पेंशनरों को महंगाई राहत 60 प्रतिशत की दर से मिलेगी, जबकि छठे वेतनमान वाले पेंशनरों की राहत 257 प्रतिशत से बढ़कर 262 प्रतिशत हो जाएगी। संशोधित दरें एक जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ परिवार पेंशनरों को भी मिलेगा। इसके साथ ही 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनरों को मिलने वाली अतिरिक्त पेंशन पर भी बढ़ी हुई दर लागू होगी। बुजुर्ग पेंशनरों के लिए यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी चिकित्सा और दैनिक खर्चों का बोझ अपेक्षाकृत अधिक होता है और राहत की हर वृद्धि सीधे उनके मासिक बजट में फर्क डालती है।

खजाने पर कितना बोझ आएगा

महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि से सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष नौ सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आएगा। यह आंकड़ा बताता है कि यह फैसला कितना बड़ा है और राज्य सरकार ने त्योहार से पहले कर्मचारियों के हित में कितनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता जताई है। यह राशि हर साल वेतन और पेंशन मद में अतिरिक्त रूप से खर्च होगी।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता तीन प्रतिशत बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर दिया है। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों की मांग तेज हो गई थी कि राज्य में भी वृद्धि की जाए। अब प्रदेश की दर 60 प्रतिशत होने के बाद केंद्र और राज्य के बीच तीन प्रतिशत का अंतर रह गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस अंतर को भी धीरे-धीरे पाटा जाना चाहिए।

किस वर्ग को कितना अनुमानित लाभ

वित्त विभाग के आदेश के बाद अलग-अलग वर्गों के लिए अनुमानित मासिक लाभ के आंकड़े भी सामने आए हैं। इसके अनुसार प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को 2,462 रुपये से 3,500 रुपये तक का लाभ हो सकता है। द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए यह राशि 1,346 रुपये से 1,600 रुपये के बीच आंकी गई है। तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को 390 रुपये से 1,200 रुपये तक और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को 310 रुपये से 800 रुपये तक का लाभ मिलने का अनुमान है। वेतनमान और मूल वेतन के अनुसार वास्तविक लाभ इससे अधिक भी हो सकता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े अनुमानित हैं और हर कर्मचारी का वास्तविक लाभ उसके मूल वेतन पर निर्भर करेगा। महंगाई भत्ता मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में मिलता है, इसलिए जिनका मूल वेतन अधिक है, उन्हें राशि के लिहाज से अधिक लाभ होगा। कर्मचारी अपनी नवंबर की सैलरी स्लिप में बढ़ी दर की पुष्टि कर सकेंगे।

कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया

कर्मचारी संगठनों ने वृद्धि का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे आंशिक राहत बताया है। संगठनों का कहना है कि केंद्र के 63 प्रतिशत के मुकाबले प्रदेश में अब भी तीन प्रतिशत का अंतर है और सरकार को महंगाई भत्ते में पांच प्रतिशत की वृद्धि करनी चाहिए थी। संगठनों की यह मांग पुरानी है। इससे पहले भी कर्मचारी 58 प्रतिशत पर अटकी दर को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं और दीपावली से पहले काली दीपावली मनाने तक की बात कही गई थी।

दूसरी ओर, सरकार का पक्ष यह है कि उसने त्योहार से पहले ही वृद्धि की घोषणा और आदेश दोनों पूरे कर दिए हैं, ताकि कर्मचारियों को नवंबर के वेतन से ही लाभ मिलने लगे। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के साथ सदैव खड़ी है। इस बयान से साफ है कि सरकार इस फैसले को कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देख रही है।

पृष्ठभूमि: क्यों लंबित थी वृद्धि

प्रदेश में महंगाई भत्ते की वृद्धि की कहानी पिछले कुछ महीनों से चल रही थी। केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 से अपने कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया था, लेकिन मध्य प्रदेश में यह वृद्धि लंबित रही। जुलाई 2025 से प्रदेश के कर्मचारी 58 प्रतिशत की दर से ही भत्ता पा रहे थे। इसी बीच केंद्र ने भत्ते में तीन प्रतिशत की और वृद्धि करके इसे 63 प्रतिशत कर दिया, जिसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों की मांग और तेज हो गई।

कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे पर कई बार आवाज उठाई थी। मांग की गई थी कि केंद्र के बराबर भत्ता दिया जाए, ताकि प्रदेश के कर्मचारियों को नुकसान न हो। अब दो प्रतिशत की वृद्धि के बाद दर 60 प्रतिशत हो गई है, लेकिन केंद्र से तीन प्रतिशत का अंतर अब भी बना हुआ है। यही वजह है कि संगठनों ने इसे आंशिक राहत कहते हुए आगे भी मांग जारी रखने की बात कही है।

आगे क्या होगा

अब सबकी नजर नवंबर में मिलने वाले अक्टूबर माह के वेतन पर रहेगी, जिसमें बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नकद रूप में जुड़कर आएगा। इसके बाद नवंबर, दिसंबर और जनवरी में एरियर की तीन किस्तें मिलेंगी। पेंशनरों को जुलाई 2026 से प्रभावी बढ़ी हुई राहत का लाभ मिलेगा। अब भुगतान की प्रक्रिया के समय पर पूरा होने पर सबकी नजर रहेगी।

दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे त्योहारों के मौके पर यह आदेश कर्मचारियों के घरों में अतिरिक्त खुशी लेकर आया है। त्योहार के खर्चों के बीच बढ़ा हुआ भत्ता और एरियर की पहली किस्त परिवारों के बजट को सहारा देगी। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि कर्मचारी संगठनों की पांच प्रतिशत वृद्धि की मांग पर सरकार का क्या रुख रहता है और केंद्र से बचा हुआ तीन प्रतिशत का अंतर कब पाटा जाता है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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