भुवनेश्वर ब्यूरो
सार: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब के बाद ओडिशा के दक्षिणी जिलों में आई बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। नौ जिलों में 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, 1,000 से ज्यादा गांव बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं, और बचाव के लिए 313 टीमें मैदान में उतारी गई हैं।
चक्रवात अर्नब के गुजर जाने के बाद भी ओडिशा में उसका असर कम नहीं हुआ है। तूफान के बाद हुई मूसलाधार बारिश ने दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। गंजाम और गजपति जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां सैकड़ों गांवों में पानी भर गया और कई गांव पूरी तरह कट गए। राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है, और शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया।
नौ जिलों में फैला बाढ़ का असर
बाढ़ से प्रभावित जिलों में गंजाम और गजपति के अलावा मलकानगिरी, कोरापुट, रायगडा, नबरंगपुर, कालाहांडी, नुआपाडा और कंधमाल शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, गंजाम जिले में करीब 299 गांव और गजपति जिले में 711 गांव बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं। दोनों जिलों को मिलाकर ही प्रभावित गांवों की संख्या 1,000 से ज्यादा हो जाती है। गंजाम में करीब 300 गांवों में पानी भरा, जिनमें से 70 गांव पूरी तरह पानी से घिर गए और उनका संपर्क बाकी इलाकों से कट गया। गजपति में भी हालात गंभीर रहे, जहां अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।
59,028 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बचाव अभियान की ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक कुल 59,028 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें अकेले गंजाम जिले के 11,882 लोग शामिल हैं, जिनके घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था। गजपति जिले में 25 बचाव दलों ने 17,441 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। इनके अलावा भी हजारों लोगों को अन्य प्रभावित जिलों से निकाला गया। सुरक्षित निकाले गए लोगों में 3,001 गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जिनका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, क्योंकि कई इलाकों में पानी घरों के अंदर तक भर गया था।

313 टीमें मैदान में, हवाई बचाव भी जारी
राहत और बचाव कार्यों के लिए कुल 313 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 9 टीमें, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की 60 टीमें और अग्निशमन सेवा विभाग की 244 टीमें शामिल हैं। सबसे ज्यादा तैनाती गंजाम जिले में की गई है, जहां ओडीआरएएफ की 45 और एनडीआरएफ की 7 टीमें काम कर रही हैं। इसके बाद गजपति जिले में ओडीआरएएफ की 12 और एनडीआरएफ की 1 टीम तैनात है।
गंजाम के 70 कटे हुए गांवों से 2,328 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकालने का अभियान भी शुरू किया गया है। तटरक्षक बल के हेलीकॉप्टर ने भी बचाव में मदद की है। एक अभियान में बाढ़ में घिरे एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से 6 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालकर दूसरे स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया गया। कई जगहों पर नावों से बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है, क्योंकि नदियां उफान पर हैं और पानी का बहाव तेज है।
रिकॉर्ड बारिश ने बिगाड़े हालात
इस बाढ़ के पीछे असाधारण बारिश है। गंजाम जिले के पात्रापुर में गुरुवार सुबह तक 546 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सोरडा में 24 घंटे में 503 मिलीमीटर बारिश हुई। कंधमाल जिले के जी उदयगिरि में 462.4 मिलीमीटर, सनाखेमुंडी में 388 मिलीमीटर और रायका में 384.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। लगातार तीन दिन तक हुई भारी बारिश से ही गंजाम के कई इलाकों में पानी भर गया और नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं।
नदियां खतरे के निशान से ऊपर
रुशिकुल्या नदी पुरूषोत्तमपुर में 19 मीटर पर बह रही है, जबकि वहां खतरे का निशान 16.8 मीटर है। आस्का, सोरडा और पुरूषोत्तमपुर में यह नदी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर बह रही है। इसकी सहायक नदी बघुआ भी कबीसूर्यनगर में खतरे के निशान से ऊपर है, जबकि वंशधारा नदी काशीनगर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी, हालांकि बाद में उसका जलस्तर नीचे आया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पानी का स्तर और बढ़ सकता है, इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है।
सड़क और रेल यातायात पर असर
बाढ़ ने यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। गजपति जिले के मोहना ब्लॉक में राष्ट्रीय राजमार्ग 326 का करीब 300 मीटर हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया, जिससे गंजाम से संपर्क टूट गया। आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा के पास बहुदा नदी का पानी सड़क पर आने से राष्ट्रीय राजमार्ग 16 पर भी यातायात बाधित हुआ। रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं और 36 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। गंजाम और गजपति जिलों में आंगनवाड़ी केंद्र और शिक्षण संस्थान 31 अक्टूबर तक बंद रखने की घोषणा की गई है, ताकि बच्चों और कर्मचारियों को किसी तरह का खतरा न हो।
मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण और आगे की चेतावनी
शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंजाम और गजपति जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और हालात का जायजा लिया। सर्वेक्षण के बाद राहत और बचाव कार्यों को और तेज करने के निर्देश दिए गए। प्रभावित इलाकों में पका हुआ भोजन और जरूरी सामान नावों से पहुंचाया जा रहा है, जबकि कटे हुए गांवों में हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। मौसम विभाग ने प्रभावित जिलों में शुक्रवार को भी और बारिश की चेतावनी दी है, इसलिए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और निचले इलाकों से दूर रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
मध्य प्रदेश में भी अर्नब का असर देखा जा रहा है, जहां पहले ही कई जिलों में चेतावनी जारी की जा चुकी है। ओडिशा के हालात यह दिखाते हैं कि चक्रवात के गुजर जाने के बाद भी बाढ़ का खतरा कई दिनों तक बना रह सकता है। ऐसे में राहत कार्यों की गति और लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे-जैसे पानी उतरेगा, प्रभावित गांवों में सामान्य जीवन बहाल करने के काम को तेज किया जाएगा।
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