भोपाल ब्यूरो
दीपावली नजदीक है और मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों व पेंशनरों की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने दीपावली से पहले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनरों की महंगाई राहत दो प्रतिशत बढ़ाने की माँग तेज कर दी है। इस माँग को लेकर संगठन ने 22 अक्टूबर को प्रदेशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया है। भोपाल सहित सभी जिला मुख्यालयों पर भोजनावकाश के दौरान कर्मचारी अपनी माँग रखेंगे।
आज कहाँ-कहाँ होगा प्रदर्शन
संगठन के आह्वान पर 22 अक्टूबर को प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन दर्ज किया जाएगा। राजधानी भोपाल में यह प्रदर्शन केंद्रीय मुद्रणालय के डाक भवन के सामने दोपहर 1 बजे आयोजित होगा। संगठन का कहना है कि इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक कर्मचारियों की माँग पहुँचाई जाएगी और दीपावली से पहले फैसला लेने की अपील की जाएगी।
माँग क्या है
संगठन की माँग सीधी है — कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनरों की महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि की जाए। वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता और पेंशनरों को महंगाई राहत दी जा रही है। जबकि भारत सरकार अपने कर्मचारियों को एक जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है। संगठन का तर्क है कि जब केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से भत्ता दे रही है, तो राज्य के कर्मचारियों को भी समान राहत मिलनी चाहिए।
10 महीनों से बढ़ोतरी का इंतजार
संगठन के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि पिछले 10 महीनों में कई त्योहार निकल गए, लेकिन सरकार ने महंगाई भत्ता और महंगाई राहत नहीं बढ़ाई। इससे कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों में निराशा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपने कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा भी कर चुकी है, जबकि मध्यप्रदेश के कर्मचारी अब तक महंगाई भत्ता बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। अब दीपावली आने वाली है और ऐसे में कर्मचारियों को सरकार भत्ता बढ़ाकर राहत दे, यही संगठन की अपील है।
महंगाई भत्ता क्या होता है और क्यों अहम है
महंगाई भत्ता कर्मचारियों के मूल वेतन का वह प्रतिशत हिस्सा है, जो महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ DA बढ़ाया जाता है, ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे। दो प्रतिशत की वृद्धि सीधे तौर पर हर कर्मचारी की मासिक आय बढ़ाती है, और त्योहारी सीजन में यह अतिरिक्त राशि परिवारों के खर्च में बड़ी राहत बनती है। पेंशनरों के लिए महंगाई राहत का मतलब भी यही है — सेवानिवृत्ति के बाद की निश्चित आय में महंगाई के अनुरूप बढ़ोतरी।
सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
कर्मचारी संगठनों की इस माँग पर अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर महंगाई भत्ते से जुड़े फैसले मंत्रिमंडल की बैठक में लिए जाते हैं और इसकी घोषणा सरकार द्वारा की जाती है। देखना यह होगा कि दीपावली से पहले सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाती है या कर्मचारियों को और इंतजार करना पड़ेगा।
महंगाई भत्ता तय कैसे होता है
महंगाई भत्ता कर्मचारियों के मूल वेतन पर दिया जाने वाला अतिरिक्त प्रतिशत है, जिसका मकसद बढ़ती महंगाई के असर को संतुलित करना है। आमतौर पर महंगाई के आंकड़ों के आधार पर सरकार समय-समय पर इसमें संशोधन करती है। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए अलग फैसला लेती है और राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए अलग — दोनों के बीच तालमेल बना रहना कर्मचारी संगठनों की स्थायी माँग रहती है।
केंद्र बनाम राज्य: दो प्रतिशत का फासला
इस समय विवाद का केंद्र यही दो प्रतिशत का अंतर है। केंद्र सरकार ने एक जनवरी 2026 से अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता देना शुरू कर दिया, जबकि मध्यप्रदेश के कर्मचारी 58 प्रतिशत पर ही अटके हैं। दस महीनों से यह अंतर बना हुआ है और हर महीने की सैलरी में यही दो प्रतिशत का फासला कर्मचारियों की जेब पर असर डाल रहा है। त्योहारी सीजन में जब घरेलू खर्च बढ़ जाता है, तो यही छोटी-सी बढ़ोतरी भी परिवारों के लिए बड़ी राहत बनती है।
पेंशनरों के लिए महंगाई राहत का मतलब
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए महंगाई राहत उतनी ही अहम है, जितनी सेवारत कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता। पेंशन एक निश्चित आय होती है, जबकि दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार बढ़ते रहते हैं। महंगाई राहत में बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि बुजुर्ग पेंशनरों की क्रय शक्ति महंगाई के मुकाबले बनी रहेगी। दीपावली जैसे त्योहार पर यह राहत उनके लिए विशेष मायने रखती है।
त्योहारी सीजन में माँग की गूंज
दीपावली से ठीक पहले उठी यह माँग सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहती — इसका असर बाजार की रौनक पर भी पड़ता है। जब कर्मचारियों की आय बढ़ती है, तो त्योहारी खरीदारी बढ़ती है और स्थानीय व्यापार को भी गति मिलती है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन हर बार त्योहारी सीजन से पहले भत्ते की माँग को जोर-शोर से उठाते हैं।
आगे क्या
त्योहारी सीजन में बाजार की रौनक और परिवारों के बढ़ते खर्च के बीच कर्मचारियों की यह माँग राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनने वाली है। 22 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद संगठन की रणनीति और सरकार के रुख पर सबकी नजर रहेगी। अगर सरकार दीपावली से पहले भत्ते में वृद्धि का ऐलान करती है, तो इससे राज्य के लाखों कर्मचारी परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
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