सार: केवड़िया के एकता नगर में शनिवार शाम राष्ट्रीय एकता दिवस की भव्य परेड हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और जवानों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। इस वर्ष की परेड की मुख्य थीम ‘नक्सल मुक्त भारत’ रही, और परेड में देशभर की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा सांस्कृतिक दलों ने अपनी क्षमता और विविधता का प्रदर्शन किया।
गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का शाम का चरण एकता परेड के साथ संपन्न हुआ। सुबह प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की थी और विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी। शाम को परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली और एकता की शपथ दिलाई। इस बार परेड सुबह के बजाय शाम को आयोजित की गई, जो इस समारोह की एक नई बात रही। सुबह देशभर में लाखों लोगों ने ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेकर एकता का संदेश दिया था।
परेड में देशभर के जवानों का मार्च और सलामी
एकता परेड में विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों की टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया। परेड में नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 16 मार्चिंग टुकड़ियों के साथ चार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राष्ट्रीय कैडेट कोर और एक मार्चिंग बैंड ने हिस्सा लिया। सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के जवानों के साथ राज्य पुलिस की टुकड़ियां भी परेड में शामिल हुईं। परेड में करीब 10 हजार पुलिस और अर्धसैनिक कर्मियों की भागीदारी बताई गई है।
परेड के दौरान महिला जवानों की टुकड़ियों ने भी मार्च किया, जिससे सुरक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई दी। राष्ट्रीय ध्वज की टुकड़ी की कमान सीमा सुरक्षा बल की सहायक कमांडेंट ने संभाली, जो पैराशूट प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बल की पहली महिला अधिकारी बताई जाती हैं। परेड में देश की बेटियों, पैरामिलिट्री बलों और विभिन्न राज्यों की पुलिस की क्षमता और अनुशासन का प्रदर्शन हुआ। दर्शकों के सामने जवानों ने शौर्य, अनुशासन और साहस का परिचय दिया।
‘नक्सल मुक्त भारत’ थीम और प्रधानमंत्री का संबोधन

इस वर्ष की परेड की सबसे बड़ी विशेषता ‘नक्सल मुक्त भारत’ की थीम रही। परेड में उन पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियों को विशेष रूप से शामिल किया गया, जिन्होंने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियानों में अग्रिम मोर्चे पर भूमिका निभाई है। समारोह के दौरान सुरक्षा बलों के योगदान को दर्शाने वाली लघु फिल्में भी दिखाई गईं, जिनमें अभियानों और शहीद जवानों के बलिदान को याद किया गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने इसी मंच से यह संकल्प लिया था कि देश नक्सलवाद और माओवादी हिंसा से पूरी तरह मुक्त होने तक नहीं रुकेगा, और अब वह संकल्प पूरा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2015 में 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, जबकि मार्च 2026 तक कोई जिला इस समस्या से प्रभावित नहीं रहा। यह प्रधानमंत्री का दावा है, जिसे उन्होंने सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले से प्रभावित क्षेत्रों में अब सड़क, मोबाइल संपर्क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो रहा है और वहां के लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
समारोह में उन 126 जिलों से करीब 5,000 लोगों को भी आमंत्रित किया गया था, जो कभी सशस्त्र नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। इनमें से कई लोगों ने समारोह में अपने अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के उन जवानों को भी याद किया, जिन्होंने अभियानों में अपने प्राण गंवाए। उन्होंने कहा कि देश की एकता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना हर नागरिक का दायित्व है।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की प्रस्तुति और सांस्कृतिक कार्यक्रम
परेड का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से प्रस्तुत ‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर आधारित नाट्य प्रस्तुति रही। इसमें उन 126 जिलों से करीब 2,000 कलाकार शामिल हुए, जो कभी सशस्त्र नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। प्रस्तुति में उन क्षेत्रों के लोगों के संघर्ष, बदलाव और विकास की यात्रा को दर्शाया गया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि हिंसा से प्रभावित क्षेत्र अब शांति और विकास की ओर बढ़ रहे हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की थीम राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने से जुड़ी रही। देशभर से करीब 5,000 कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया और भारत की विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रस्तुत किया। परेड में 15 विशेष झांकियां भी निकाली गईं, जिनमें गुजरात की 10 और अन्य राज्यों की 5 झांकियां शामिल रहीं। इन झांकियों के डिजाइन इस बार सरकारी विभागों के बजाय नागरिकों से प्राप्त डिजाइनों के आधार पर तैयार किए गए थे, जो इस वर्ष की एक नई बात रही। झांकियों में देश की सांस्कृतिक विरासत, विविधता और साझा चेतना को दर्शाया गया।
परेड के अन्य आकर्षण: हेल मार्च, मोटरसाइकिल प्रदर्शन और फ्लाईपास्ट
परेड के प्रमुख आकर्षणों में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की ‘हेल मार्च’ टुकड़ी शामिल रही, जिसने अपने अनुशासन और साहस से दर्शकों को प्रभावित किया। सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पुरुष और महिला जवानों ने मोटरसाइकिल पर साहसिक प्रदर्शन किया। सीमा सुरक्षा बल की ओर से विभिन्न भारतीय मार्शल आर्ट का संयुक्त प्रदर्शन भी किया गया।
बच्चों की ओर से पाइप बैंड की प्रस्तुति भी समारोह का आकर्षण रही। भारतीय वायुसेना के ‘सूर्य किरण’ दल ने फ्लाईपास्ट के माध्यम से आकाश में एकता का संदेश दिया। परेड में डॉग स्क्वाड की प्रस्तुति भी शामिल रही। इन सभी प्रस्तुतियों ने परेड को केवल एक सैन्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश की एकता, सांस्कृतिक विविधता और सुरक्षा बलों की क्षमता के उत्सव में बदल दिया।
विपक्ष पर टिप्पणी और संतुलन
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि विपक्ष अब विरोध करने वाले दल के बजाय अवरोध पैदा करने वाले दल के रूप में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को एकजुट रहने की जरूरत है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ तथा विकसित भारत देश के दो लक्ष्य हैं। इस टिप्पणी पर विपक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी उपलब्ध खबरों में नहीं थी।
सरदार पटेल की विरासत और दिन की रूपरेखा
राष्ट्रीय एकता दिवस हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है। पटेल को भारत के पहले गृह मंत्री और लौह पुरुष के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने आजादी के बाद 550 से अधिक रियासतों को एक करके आधुनिक भारत की एकता की नींव रखी। एकता नगर में स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी उनकी इसी विरासत का प्रतीक है, जिसे वर्ष 2018 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था।
दिन की शुरुआत सुबह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि और 426.71 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ हुई थी। प्रधानमंत्री ने एकता नगर में रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। सुबह देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन हुआ, जिसमें लाखों नागरिकों ने भाग लिया। शाम की परेड के साथ दिन का समारोह संपन्न हुआ। इस समारोह का संदेश स्पष्ट रहा कि देश की एकता, आंतरिक सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
एकता परेड के माध्यम से सरकार ने यह संदेश भी दिया कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अब एक नए चरण में पहुंच गया है, जहां प्रभावित क्षेत्रों में विकास और जनसुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं के विस्तार पर नजर रहेगी। राष्ट्रीय एकता दिवस का यह समारोह हर वर्ष इसी संदेश को दोहराता है कि विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
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