नई दिल्ली ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 और 31 अक्टूबर को गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। दौरे के पहले दिन वह बनासकांठा जिले में बनास डेयरी की 325 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र सहित पांच बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। दूसरे दिन वह नर्मदा जिले के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह और भव्य परेड में शामिल होंगे।
दो दिन, दो बड़े कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा दो हिस्सों में बंटा है। पहले दिन का केंद्र बनासकांठा जिले का डेयरी और पशुपालन क्षेत्र होगा, जबकि दूसरे दिन का केंद्र नर्मदा जिले का एकता नगर होगा, जहां देश की एकता का सबसे बड़ा वार्षिक समारोह आयोजित होता है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मोदी 30 अक्टूबर को बनासकांठा जिले के मुख्यालय पालनपुर और भीलड़ी में बनास डेयरी की परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इसके बाद वह एकता नगर पहुंचेंगे, जहां 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड होगी। इस दौरे को डेयरी किसानों की आय बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता के संदेश को एक साथ जोड़ने वाले कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
बनास डेयरी को क्या-क्या मिलेगा
मोदी भीलड़ी में बनास डेयरी की पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे। इनमें सबसे बड़ी परियोजना भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर है, जिसे 325 करोड़ रुपये की लागत से 127 एकड़ में विकसित किया गया है। इसके अलावा पालनपुर में बनास डेयरी के अत्यधिक उच्च तापमान वाले संयंत्र के गोदाम में एक स्वचालित भंडारण और निकासी प्रणाली का उद्घाटन होगा, जिस पर करीब 31.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। आलू प्रसंस्करण इकाई के विस्तार सहित डेयरी से जुड़ी अन्य परियोजनाएं भी इस दौरे का हिस्सा हैं। इन परियोजनाओं का सीधा लाभ बनासकांठा और आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादक किसानों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

325 करोड़ का प्रजनन केंद्र क्यों खास है
पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह वैज्ञानिक तरीके से पशुओं की नस्ल सुधारने पर काम करेगा। केंद्र में हर साल करीब 25,000 उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ओव्यूल पिक-अप, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इस केंद्र को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के तकनीकी मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के सहयोग से स्थापित किया गया है। यहां कांकरेज, गिर, साहीवाल, मेहसाणी और मुर्रा जैसी देशी नस्लों की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जाएगा। जानकारों का कहना है कि चारे की कमी और पशुपालन की बढ़ती लागत के दौर में कम पशुओं से अधिक दूध लेना ही किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता है, और यही इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य है।
पालनपुर में रोबोटिक भंडारण प्रणाली
पालनपुर में शुरू होने वाली स्वचालित भंडारण और निकासी प्रणाली डेयरी क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल का नया उदाहरण होगी। यह प्रणाली रोबोटिक शटल और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से दुग्ध उत्पादों के संग्रह और निकासी का काम करेगी। इससे भंडारण में लगने वाला समय घटेगा, उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहेगी और बड़े पैमाने पर आपूर्ति की व्यवस्था आसान होगी। डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह की आधुनिक व्यवस्था से सहकारी डेयरी संघों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
तैयारियों का जायजा: उपमुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
दौरे से पहले तैयारियों का जायजा लेने के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने मंगलवार को भीलड़ी में कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के अध्यक्ष शंकर चौधरी भी मौजूद रहे। अधिकारियों को कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर जरूरी निर्देश दिए गए। बनास डेयरी के अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण वैज्ञानिक प्रजनन के जरिए प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाकर ग्रामीण पशुपालक किसानों की आय में सुधार करना है। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, यातायात और कार्यक्रम स्थल की तैयारियों की समीक्षा की गई।
31 अक्टूबर: एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस
दौरे के दूसरे दिन, 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होंगे। वह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार पटेल को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और एकता दिवस की शपथ दिलाएंगे। इसके बाद भव्य एकता दिवस परेड का आयोजन होगा, जिसमें गुजरात पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 19 टुकड़ियां भाग लेंगी। परेड में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के जवान शामिल होंगे। इसके अलावा असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टुकड़ियां भी परेड का हिस्सा होंगी। इस वर्ष परेड को पहले से अधिक भव्य बनाने की तैयारी है और इसमें 40,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
परेड की खास झलकियां
इस बार की परेड में कई नई झलकियां देखने को मिलेंगी। सीमा सुरक्षा बल की टुकड़ी में रामपुर हाउंड और मुधोल हाउंड जैसी स्वदेशी कुत्तों की नस्लें शामिल होंगी। गुजरात पुलिस की घुड़सवार टुकड़ी, असम पुलिस का मोटरसाइकिल पर साहसिक प्रदर्शन और सीमा सुरक्षा बल की ऊंट टुकड़ी अपने ऊंट सवार बैंड के साथ परेड की शोभा बढ़ाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नक्सल प्रभावित 126 जिलों के करीब 2,000 कलाकार लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय वायुसेना का फ्लाईपास्ट, महिला जवानों के नेतृत्व में गार्ड ऑफ ऑनर, एकता की शपथ, ऊंट और घोड़ा टुकड़ियां तथा मोटरसाइकिल पर साहसिक करतब भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। शौर्य चक्र से सम्मानित जवानों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। एकता दिवस के मौके पर 150 रुपये मूल्य का स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करने की भी जानकारी सामने आई है।
एकता क्रूज़: पर्यटकों के लिए नई सौगात
एकता दिवस के मौके पर पर्यटकों के लिए एकता क्रूज़ की शुरुआत भी हो रही है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस क्रूज़ में एक साथ 600 यात्री बैठ सकते हैं। यह क्रूज़ करीब 360 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है और 400 हॉर्सपावर के इंजन से चलता है। इसमें चार डीजल जनरेटर सेट, लाइव संगीत प्रणाली, आरामदायक बैठने की व्यवस्था और खानपान की सुविधा उपलब्ध है। अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली भी इसमें लगाई गई है। इस क्रूज़ से पर्यटक नदी से दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का दृश्य देख सकेंगे, जो केवडिया आने वाले पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव होगा।
पृष्ठभूमि: बनास डेयरी और सहकारी आंदोलन
बनास डेयरी, यानी बनासकांठा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ, गुजरात के सबसे बड़े सहकारी डेयरी संघों में से एक है। यह संघ लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों से दूध संग्रह करता है और उन्हें नियमित भुगतान की व्यवस्था देता है। गुजरात में सहकारी डेयरी आंदोलन की मजबूत परंपरा रही है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर आय का आधार दिया है। पशु प्रजनन केंद्र और स्वचालित भंडारण जैसी परियोजनाएं इसी परंपरा को तकनीक से जोड़ने की कोशिश हैं। जानकारों का कहना है कि नस्ल सुधार और आधुनिक भंडारण से दूध उत्पादन की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
आगे क्या
मोदी के इस दौरे पर डेयरी किसानों, सहकारी क्षेत्र और राष्ट्रीय एकता के संदेश — तीनों की नजर रहेगी। बनास डेयरी की परियोजनाओं के शुरू होने के बाद उनकी जमीनी असर की समीक्षा आने वाले महीनों में होगी। वहीं, एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड के जरिए देश की एकता और सुरक्षा बलों के योगदान का संदेश दिया जाएगा। दौरे के दौरान होने वाली घोषणाओं और कार्यक्रमों पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
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