भोपाल ब्यूरो
सार: मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कांग्रेस ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इन मौतों की स्वतंत्र जांच, अंतरराज्यीय शराब नेटवर्क पर समन्वित कार्रवाई और प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में उज्जैन, मुरैना, मंदसौर, सागर और देवास की घटनाओं का हवाला दिया गया है, हालांकि देवास की ताजा घटना के कारणों की जांच अभी जारी है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदेश में बार-बार हो रही जहरीली शराब से मौतों पर केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में जहरीली शराब की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं और इन पर रोक के लिए केवल राज्य स्तर पर की जा रही कार्रवाई पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। पटवारी ने मांग की है कि इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए, अंतरराज्यीय स्तर पर फैले अवैध शराब नेटवर्क पर समन्वित कार्रवाई हो और प्रशासनिक लापरवाही में जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
पत्र में क्या मांग की गई है
जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कई ठोस मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों की स्वतंत्र जांच हो, ताकि हर घटना के असली कारण और जिम्मेदार लोगों का पता चल सके। दूसरी मांग अंतरराज्यीय समन्वय की है, जिसके तहत मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों की एजेंसियां मिलकर अवैध शराब के नेटवर्क को तोड़ें। तीसरी मांग प्रदेश के आबकारी प्रशासन की समीक्षा की है, जिससे यह पता चल सके कि निगरानी व्यवस्था में कहां खामी रह गई। चौथी मांग सागर मामले में निगरानी की कथित विफलता की जांच की है। इसके अलावा पत्र में मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और प्रभावित लोगों को समुचित इलाज देने की मांग भी की गई है। पटवारी ने यह भी कहा है कि दोषी पाए जाने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
किन घटनाओं का हवाला दिया गया
पत्र में प्रदेश में हुई कई पुरानी और हाल की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। पटवारी ने लिखा है कि अक्टूबर 2020 में उज्जैन में 14 लोगों की मौत हुई थी और जनवरी 2021 में मुरैना में 24 लोगों की जान गई थी। मंदसौर में 2021 में हुई एक घटना में सात से अधिक लोगों की मौत का भी पत्र में जिक्र है। इसके साथ ही सितंबर 2026 में सागर जिले में 20 लोगों की मौत का मामला भी उठाया गया है। हाल की घटनाओं के रूप में देवास जिले के चांदना और बिसाखना गांवों में हुई मौतों का उल्लेख किया गया है। इन गांवों की घटना को लेकर पत्र में कहा गया है कि वहां भी जहरीली शराब से मौतें हुई हैं, लेकिन इस ताजा घटना के हालात और कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इस बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
अवैध नेटवर्क का आरोप क्या है
पटवारी ने पत्र में आरोप लगाया है कि प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार केवल कुछ दुकानों या ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क हो सकता है। पत्र के अनुसार यह नेटवर्क कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन और वितरण तक फैला हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि मध्य प्रदेश के साथ दूसरे राज्यों की एजेंसियां मिलकर इस नेटवर्क की पहचान करें और उसे तोड़ने के लिए समन्वित अभियान चलाएं। यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाया गया है और इसकी पुष्टि के लिए ही पत्र में स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। किसी व्यक्ति या अधिकारी को इस पत्र में दोषी ठहराया नहीं गया है, बल्कि जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

सरकार पर लगाए गए आरोप और अब तक की प्रतिक्रिया
पत्र में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। पटवारी ने कहा है कि प्रदेश की सरकार बार-बार हो रही इन त्रासदियों को रोकने में विफल रही है। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है और मध्य प्रदेश के लोग अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहते हैं। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है, जिसे उसी रूप में दर्ज किया जा रहा है। दूसरी ओर, इस पत्र पर राज्य सरकार या प्रदेश भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं मिली है। केंद्र सरकार की ओर से भी इस पत्र पर अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है, और यह देखना बाकी है कि केंद्र इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करता है या इसे राज्य के अधिकार क्षेत्र का विषय मानकर राज्य सरकार पर छोड़ता है।
देवास मामले में पहले से चल रही जांच
देवास की घटना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहले से एक जांच चल रही है। उज्जैन संभागायुक्त ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनाई है, जिसे 15 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। यह जांच देवास में जहरीली शराब से मौतों के दावों की पड़ताल कर रही है। इस टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना के कारणों और जिम्मेदारियों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। पटवारी के पत्र में भी देवास की घटना का उल्लेख है, लेकिन वहां के हालात और कारणों को जांच के अधीन बताया गया है। ऐसे में देवास मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
जहरीली शराब की समस्या क्यों गंभीर है
जहरीली शराब की घटनाएं केवल एक जिले या एक समय तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इनका असर पूरे परिवारों और गांवों पर पड़ता है। एक घटना में कई लोगों की जान चली जाती है और कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। प्रभावित लोगों को इलाज की जरूरत होती है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहारे की जरूरत होती है। इसी वजह से पत्र में इलाज और आर्थिक सहायता की मांग को भी शामिल किया गया है। साथ ही, अवैध शराब के कारोबार से सरकार के राजस्व को भी नुकसान होता है और कानून-व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता है। इन घटनाओं की जांच में यह भी देखा जाता है कि शराब कहां से आई, किसने बेची और निगरानी में कहां चूक हुई।
कानून-व्यवस्था और केंद्र-राज्य का सवाल
शराब और कानून-व्यवस्था का विषय मुख्य रूप से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन जब किसी मामले में अंतरराज्यीय नेटवर्क का आरोप लगता है तो केंद्र की भूमिका भी चर्चा में आ जाती है। पटवारी के पत्र में यही तर्क दिया गया है कि अवैध शराब का नेटवर्क एक राज्य तक सीमित नहीं है, इसलिए केंद्र को समन्वय की भूमिका निभानी चाहिए। केंद्र की ओर से इस पर क्या रुख अपनाया जाता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। अगर केंद्र स्वतंत्र जांच या समन्वित कार्रवाई का निर्देश देता है तो इस मामले में नया मोड़ आ सकता है। अगर केंद्र इसे राज्य का विषय मानता है तो जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार और उसकी एजेंसियों पर ही रहेगी।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पत्र पर क्या कार्रवाई करता है। पटवारी की मांगों में स्वतंत्र जांच, आबकारी प्रशासन की समीक्षा, अंतरराज्यीय कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को सहायता शामिल है। इनमें से किसी भी मांग पर केंद्र की ओर से निर्देश जारी होता है या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो वह इस मामले की अगली कड़ी होगी। देवास मामले की पांच सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी से ताजा घटना के कारणों की तस्वीर साफ होगी। तब तक इस मामले में लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में और जांच के अधीन तथ्यों को जांच के अधीन ही माना जाना चाहिए।
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