देवास ब्यूरो
देवास जिले में कथित जहरीली शराब से मौतों के दावों को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। उज्जैन संभाग के आयुक्त ने इन दावों की जांच के लिए पांच सदस्यीय दल गठित किया है। यह दल 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
जांच टीम का गठन
संभागायुक्त के आदेश के अनुसार जांच दल मौतों के कारणों, परिस्थितियों और उनसे जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक तथ्यों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करेगा। जांच का दायरा केवल मौतों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन हालात की भी पड़ताल की जाएगी, जिनमें ये मौतें हुईं।
रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मौतों की असल वजह क्या थी। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा।
जांच दल में कौन-कौन है
जांच दल की अध्यक्षता उज्जैन के अतिरिक्त जिलाधिकारी प्रथम कौशिक करेंगे। दल में मंदसौर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामसनेही मिश्रा, रतलाम जिले के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी लेखराज मीणा, उज्जैन के संभागीय उड़नदस्ते के उप आबकारी आयुक्त हर्षवर्धन राय और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्रीय संचालक डॉ. दीपक कुमार पिप्पल सदस्य होंगे।
इस तरह जांच दल में प्रशासन, पुलिस, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग — चारों पक्षों के अधिकारी शामिल किए गए हैं। इसका मकसद यह है कि मौतों से जुड़े हर पहलू की जांच संबंधित विभाग के विशेषज्ञ की नजर से हो सके। आबकारी विभाग के अधिकारी शराब की आपूर्ति और गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखेंगे, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौतों के चिकित्सकीय पहलुओं की पड़ताल करेंगे।
ग्रामीणों का दावा क्या है
ग्रामीणों का दावा है कि देवास जिले में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच जहरीली शराब पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत हुई। यह दावा चंदाना गांव और आसपास के इलाकों से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार इन मौतों के पीछे जहरीली शराब की भूमिका रही है।
इस दावे के बाद ही मामले ने तूल पकड़ा। ग्रामीणों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद प्रशासन पर जांच की मांग का दबाव बढ़ा। अब संभाग स्तर पर जांच दल गठित होने से इस मामले की स्वतंत्र पड़ताल का रास्ता खुल गया है।
जिला प्रशासन का पक्ष क्या है
जिला प्रशासन ने पहले इन दावों को असत्य और भ्रामक बताया था। प्रशासन का कहना था कि एक से 15 अक्टूबर के बीच चंदाना गांव में 10 लोगों की मौत हुई, लेकिन इनमें से किसी की भी मौत जहरीली शराब से नहीं हुई।
प्रशासन के अनुसार चंदाना में हुई मौतें बढ़ती उम्र से जुड़ी समस्याओं, सामान्य बीमारियों, ब्रेन हेमरेज और शराब के अत्यधिक सेवन की लत से हुई हैं। प्रशासन ने यह भी बताया कि बाद में दो मृतकों के विसरा के नमूने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही इन मौतों की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
यानी प्रशासन का रुख यह है कि मौतों की वजह के बारे में अंतिम बात जांच रिपोर्ट के बाद ही कही जा सकती है। पहले दिए गए स्पष्टीकरण और अब गठित जांच दल — दोनों के बीच यही कड़ी है कि तथ्यों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच से हो।
विपक्ष का दावा और आरोप
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि चंदाना, बिंजाना और आसपास के इलाकों में पिछले एक महीने में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत हुई और कम से कम 40 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई। उन्होंने प्रशासन पर मौतों को छिपाने और शराब माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
यह दावा ग्रामीणों के दावे से भी बड़ा है। एक ओर ग्रामीण कम से कम 10 मौतों की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष 22 मौतों का दावा कर रहा है। वहीं प्रशासन इन दावों को खारिज करते हुए कह रहा है कि किसी भी मौत की वजह जहरीली शराब नहीं है।
तीनों पक्षों के दावों में इतना अंतर होने की वजह से ही स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस की गई। जांच दल की रिपोर्ट से यह साफ होगा कि किस दावे में कितनी सच्चाई है।
जांच क्यों अहम है
जहरीली शराब से मौतों के मामले में जांच का मतलब केवल आंकड़ों की गिनती नहीं होता। इसमें यह भी देखा जाता है कि शराब कहां से आई, उसकी आपूर्ति का रास्ता क्या था, प्रशासनिक निगरानी में कहां चूक हुई और पीड़ितों को समय पर इलाज मिला या नहीं।
इसीलिए जांच दल में आबकारी विभाग के उड़नदस्ते के अधिकारी को शामिल किया गया है। उड़नदस्ता अवैध शराब की धरपकड़ और निगरानी का काम करता है। पुलिस अधिकारी कानून-व्यवस्था और आपराधिक पहलुओं को देखेंगे, जबकि स्वास्थ्य अधिकारी चिकित्सकीय तथ्यों की पड़ताल करेंगे।
आगे क्या होगा
जांच दल को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में मौतों के कारणों, परिस्थितियों और तकनीकी एवं प्रशासनिक तथ्यों का विस्तृत ब्योरा होगा। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई का फैसला करेगा।
तब तक मौतों की वजह को लेकर किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। ग्रामीणों का दावा, विपक्ष का आरोप और प्रशासन का स्पष्टीकरण — तीनों अपनी-अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा।
सार
देवास में कथित जहरीली शराब से मौतों का मामला अब संभाग स्तर की जांच के दायरे में आ गया है। पांच सदस्यीय दल की जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि मौतों की असल वजह सामने आएगी और दावों और खंडन के बीच का सच साफ होगा। 15 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट ही इस मामले की दिशा तय करेगी।
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