डेस्क रिपोर्ट। कल, शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस है। दीपावली के पांच दिन के उत्सव की शुरुआत कल से ही हो रही है, और घरों में तैयारियां आज से ही तेज हो गई हैं। धनतेरस का दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से जुड़ा माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा की परंपरा है, और सोना-चांदी, बर्तन तथा घर के काम की नई चीजें खरीदना शुभ माना जाता है। अगर आप कल की पूजा और खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके काम आएगी — इसमें इंदौर के अनुसार तिथि, पूजा का मुहूर्त, यम दीपक का क्रम और दिनभर का पूरा कार्यक्रम दिया गया है।
कल धनतेरस: तिथि और मुख्य मुहूर्त एक नजर में
कल धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाएगी। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह करीब 10:30 बजे से शुरू हो रही है और 7 नवंबर की सुबह करीब 10:47 बजे तक रहेगी। यानी कल का पूरा दिन और कल की शाम त्रयोदशी में ही पड़ रही है, इसलिए धनतेरस की पूजा कल शाम को ही होगी। इंदौर में धनतेरस की पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:18 बजे से रात 8:17 बजे तक है। प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से रात 8:20 बजे तक रहेगा। जो परिवार मुख्य मुहूर्त में पूजा पूरी न कर पाएं, वे प्रदोष काल में पूजा कर सकते हैं — परंपरा के अनुसार प्रदोष काल में की गई पूजा भी फलदायी मानी जाती है। इस लेख में दिए गए सभी समय इंदौर के अनुसार हैं। दूसरे शहरों में सूर्यास्त के समय के अनुसार इनमें कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
इंदौर में पूजा का मुहूर्त: प्रदोष काल में करें पूजा
धनतेरस की पूजा शाम को प्रदोष काल में करने की परंपरा है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का समय होता है, जब दिन और रात का संधिकाल माना जाता है। इंदौर में कल सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से शुरू होगा और रात 8:20 बजे तक रहेगा। इसी के भीतर पूजा का मुख्य मुहूर्त शाम 6:18 बजे से रात 8:17 बजे तक है। व्यावहारिक सलाह यही है कि पूजा की सारी तैयारी — चौकी सजाना, दीपक, फूल, मिठाई और पूजा की थाली — शाम होने से पहले पूरी कर लें, ताकि मुहूर्त शुरू होते ही पूजा आरंभ की जा सके। अगर घर में कई लोग पूजा में शामिल हो रहे हैं, तो सबको पहले से समय बता देना अच्छा रहेगा, क्योंकि मुहूर्त करीब दो घंटे का है और इसी में पूजा, आरती और प्रसाद का क्रम पूरा करना होता है।
यम दीपक: कब और कैसे जलाएं
धनतेरस की शाम की एक खास परंपरा यम दीपक जलाना है। माना जाता है कि इस दिन संध्या के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाने से परिवार की रक्षा होती है और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। यम दीपक के लिए आटे या मिट्टी का चार मुख वाला दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डालने की परंपरा है। दीपक घर के बाहर, मुख्य द्वार के पास दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। यम दीपक का समय प्रदोष काल में, संध्या के समय माना जाता है। इंदौर के लिए यम दीपक का मिनट-दर-मिनट अलग समय सत्यापित नहीं हो सका है, इसलिए इसे प्रदोष काल में संध्या के समय जलाना ही उचित रहेगा — समय शहर के अनुसार बदल सकता है। दीपक जलाते समय उसे ऐसी जगह रखें जहाँ हवा से बुझने का डर कम हो और बच्चों तथा पालतू जानवरों से दूर रहे।
खरीदारी का मुहूर्त: दिनभर क्या-क्या खरीदना शुभ माना जाता है
धनतेरस पर खरीदारी की परंपरा सबसे ज्यादा चर्चित है। माना जाता है कि इस दिन घर में नई चीज लाना समृद्धि का स्वागत है। सोना-चांदी के सिक्के और गहने, पीतल-तांबे-स्टील के बर्तन, झाड़ू, धनिया के बीज, गोमती चक्र और घर के काम की चीजें खरीदने की परंपरा है। कई परिवार इस दिन बर्तन या सिक्का खरीदकर शाम की पूजा में उसे रखते हैं और फिर उसे घर के मंदिर या तिजोरी में स्थापित करते हैं। खरीदारी के लिए कल का पूरा दिन त्रयोदशी में पड़ रहा है — त्रयोदशी सुबह करीब 10:30 बजे से शुरू हो रही है, इसलिए खरीदारी दिन में की जा सकती है और शाम को पूजा के मुहूर्त में खरीदी हुई चीजों को पूजा में शामिल किया जा सकता है। खरीदारी के दिन के शुभ पहरों का मिनट-दर-मिनट समय इंदौर के लिए अलग से सत्यापित नहीं हो सका है, इसलिए दुकान का समय और अपनी सुविधा देखकर दिन में खरीदारी करना और शाम के पूजा मुहूर्त को पूजा के लिए सुरक्षित रखना व्यावहारिक रहेगा। सोना-चांदी खरीदते समय बिल, हॉलमार्क और वजन की जांच जरूर करें, और ऑनलाइन खरीदारी में वापसी की शर्तें पहले पढ़ लें।
पूजा विधि: कल शाम घर में ऐसे करें पूजा
कल शाम की पूजा की तैयारी आज ही कर लेना अच्छा रहेगा। सबसे पहले घर की साफ-सफाई और मुख्य द्वार की सजावट करें। पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, और साथ में कुबेर तथा धन्वंतरि का स्मरण करें। कलश, दीपक, फूल, अक्षत, रोली, चंदन, मिठाई, फल और पंचामृत पूजा थाली में रखें। पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर और गणेश का स्मरण करके करें, फिर लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पूजा करें। खरीदी हुई नई चीजों को भी पूजा में रखकर उनका पूजन करने की परंपरा है। पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद सबमें बांटें। माना जाता है कि धनतेरस की पूजा में स्वास्थ्य की कामना भी की जाती है, क्योंकि धन्वंतरि को आयुर्वेद के देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना भी पूजा का हिस्सा मानी जाती है।
क्या खास है इस बार: पांच दिन के उत्सव की शुरुआत
कल से दीपावली का पांच दिन का उत्सव शुरू हो रहा है। धनतेरस के बाद 7 नवंबर को छोटी दीपावली, 8 नवंबर को मुख्य दीपावली, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी। यानी कल का दिन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पूरे उत्सव की नींव है। इसी वजह से कल घरों में दीपों की सजावट, रंगोली और मिठाइयों की तैयारी भी शुरू हो जाती है। बाजारों में भी कल सबसे ज्यादा रौनक रहती है — बर्तन, गहने, कपड़े और सजावट की दुकानों पर भीड़ रहती है। अगर आप कल बाजार जा रहे हैं, तो भीड़ और यातायात को ध्यान में रखकर समय निकालें और कीमती सामान की सुरक्षा का ध्यान रखें।
कल का दिनभर का क्रम: सुबह से रात तक क्या-कब
कल की योजना इस क्रम में बनाएं तो सुविधा रहेगी। सुबह घर की सफाई और पूजा की तैयारी करें। त्रयोदशी सुबह करीब 10:30 बजे से शुरू हो रही है, इसलिए दिन में खरीदारी का काम निपटा लें। दोपहर में पूजा की थाली, फूल, मिठाई और दीपक की व्यवस्था पूरी कर लें। शाम 5:46 बजे प्रदोष काल शुरू होने से पहले पूजा की चौकी सजा लें। संध्या के समय घर के बाहर यम दीपक जलाएं। फिर शाम 6:18 बजे से रात 8:17 बजे के मुख्य मुहूर्त में परिवार के साथ पूजा करें और आरती के बाद प्रसाद बांटें। रात में घर के द्वार और आंगन में दीपक जलाकर दीपावली के उत्सव की शुरुआत का स्वागत करें।
ध्यान रखने वाली बातें
धनतेरस पर खरीदारी करते समय दिखावे से ज्यादा जरूरत और बजट का ध्यान रखना समझदारी है। माना जाता है कि श्रद्धा और साफ मन से की गई पूजा ही सबसे बड़ी समृद्धि है। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें — दीपक को पर्दों, कागज और सूखी सजावट से दूर रखें और सोने से पहले सभी दीपक बुझा दें। पटाखों का इस्तेमाल हो तो स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें और बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। कल का दिन परिवार के साथ बिताएं, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और जरूरतमंदों के साथ मिठाई और खुशियां बांटें — यही धनतेरस की असली परंपरा मानी जाती है।
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