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सड़क पर कचरा मिला तो सीधे वेतन पर वार: इंदौर निगमायुक्त ने सफाई में लापरवाही पर दो दारोगा और सीएसआई की काटी सैलरी

सफाई अभियान (सांकेतिक चित्र)

इंदौर ब्यूरो

देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा बार-बार हासिल करने वाले इंदौर में सफाई व्यवस्था में जरा सी भी लापरवाही अब अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे जेब पर भारी पड़ रही है। इंदौर नगर निगम के आयुक्त क्षितिज सिंघल ने गुरुवार (22 अक्टूबर) सुबह शहर के विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया और जहां-जहां सड़क पर कचरा और गंदगी मिली, वहां संबंधित सफाई दारोगा और सीएसआई (चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर) का एक-एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दे दिए। निरीक्षण का एक बड़ा मकसद 23 अक्टूबर को स्काउट ग्राउंड में होने वाले मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेना भी था।

स्काउट ग्राउंड से शहर के चौराहों तक निरीक्षण

निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने गुरुवार सुबह स्काउट ग्राउंड का निरीक्षण किया, जहां 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम का आयोजन होना है। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचाने और लंबित आवेदनों के निराकरण के लिए शिविर लगाए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने शिविरों की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद निगमायुक्त शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लेने हरसिद्धि, मच्छी बाजार, मिल्लत नगर, मोती तबेला, कलेक्टर कार्यालय चौराहा, छत्रीपुरा, बंबई बाजार, कपड़ा मार्केट, सराफा और राजवाड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पहुंचे। सुबह के समय हुआ यह निरीक्षण बिना किसी पूर्व सूचना के था, ताकि सफाई की असली जमीनी हकीकत सामने आ सके।

जहां गंदगी मिली, वहां वेतन कटा

निरीक्षण के दौरान जोन 12 के वार्ड 59 के अंतर्गत हरसिद्धि और मोती तबेला क्षेत्र में सड़क पर कचरा और गंदगी मिलने पर निगमायुक्त ने संबंधित दारोगा को जमकर फटकार लगाई और क्षेत्रीय सफाई दारोगा लखन मेलाने तथा सीएसआई का एक-एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। इसी तरह वार्ड 62 के छावनी क्षेत्र में भी कचरा मिलने पर वहां के दारोगा नवीन पंचवाल और सीएसआई का एक दिन का वेतन काटने का आदेश दिया गया। निगमायुक्त का स्पष्ट संदेश था कि सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई होगी। वेतन कटौती जैसे सख्त कदम का मकसद मैदानी अमले में जवाबदेही की भावना पैदा करना है, ताकि रोजाना की सफाई में कोई कोताही न हो।

मच्छी बाजार में अतिक्रमण और गंदगी पर कड़े निर्देश

निरीक्षण के दौरान मच्छी बाजार क्षेत्र में अतिक्रमण और गंदगी की स्थिति पर भी निगमायुक्त ने कड़े निर्देश दिए। मच्छी बाजार इंदौर का घनी आबादी वाला पुराना बाजार क्षेत्र है, जहां अतिक्रमण के कारण सफाई बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। निगमायुक्त ने यहां अतिक्रमण हटाने और गंदगी दूर करने के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बाजार क्षेत्रों में नियमित सफाई, कचरा उठान और नालियों की सफाई को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट हिदायतें दी गईं। त्योहारी सीजन के मद्देनजर बाजारों में भीड़ बढ़ने वाली है, ऐसे में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखना निगम के लिए प्राथमिकता है।

पृष्ठभूमि: स्वच्छता की राजधानी का रुतबा और चुनौती

इंदौर ने स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार सात बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतकर स्वच्छता की राजधानी का रुतबा हासिल किया है। यह उपलब्धि शहरवासियों की भागीदारी, सफाई मित्रों की मेहनत और नगर निगम की सख्त निगरानी का नतीजा है। लेकिन इस रुतबे को बनाए रखना हर साल बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि मानक लगातार ऊंचे हो रहे हैं और शहर का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। यही वजह है कि निगमायुक्त खुद मैदान में उतरकर सफाई की निगरानी कर रहे हैं। इससे पहले भी सफाई में लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के उदाहरण सामने आते रहे हैं। निगम की यह कार्यशैली ही इंदौर को अन्य शहरों से अलग करती है — यहां सफाई सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जवाबदेही है।

जन विश्वास कार्यक्रम से जुड़ाव

गुरुवार के निरीक्षण का एक अहम पहलू 23 अक्टूबर को स्काउट ग्राउंड में होने वाला मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम भी था। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के जन विश्वास अभियान का ही हिस्सा है, जिसके तहत विभिन्न विभागों के शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का मौके पर निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फील्ड में रहकर जनसमस्याओं का समाधान करें और बिना पूर्व सूचना के किसी भी जिले का दौरा कर सकते हैं। ऐसे में इंदौर में होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर निगम प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। स्काउट ग्राउंड और आसपास के क्षेत्रों की सफाई, शिविरों की व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर निगमायुक्त ने विस्तृत निर्देश दिए हैं।

आगे क्या

निगमायुक्त की इस सख्त कार्रवाई के बाद शहर के सभी जोनों में सफाई अमले में सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है। वेतन कटौती का संदेश साफ है — सफाई में लापरवाही की कीमत अब सीधे चुकानी पड़ेगी। आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के चलते बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर सफाई का दबाव और बढ़ेगा, ऐसे में निगम की निगरानी भी तेज रहने के आसार हैं। 23 अक्टूबर के जन विश्वास कार्यक्रम के बाद इन तैयारियों की असल परीक्षा भी होगी। इंदौर के नागरिकों के लिए यह कार्रवाई एक भरोसा भी है कि शहर की स्वच्छता को लेकर प्रशासन गंभीर है और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय हो रही है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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