उज्जैन ब्यूरो
सिंहस्थ-2028 को लेकर मध्यप्रदेश शासन ने अब तक की सबसे बड़ी तैयारी का बिगुल फूंक दिया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, इस बार उज्जैन में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है — यानी 2016 के सिंहस्थ के मुकाबले करीब सात गुना ज्यादा आबादी का सैलाब। इस अभूतपूर्व चुनौती से निपटने के लिए सितंबर 2026 तक की सरकारी रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग जिलों में ₹25,000 करोड़ से ज्यादा के 225 से ज्यादा विकास कार्य चल रहे हैं, जबकि मेला क्षेत्र में करीब ₹3,000 करोड़ की अस्थायी अधोसंरचना प्रस्तावित है। सड़क, पानी, सीवरेज, परिवहन और धार्मिक स्थलों का विकास — योजना सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं, पूरा मालवा इसकी जद में है।
40 करोड़ का अनुमान और चुनौती — आखिर कितनी बड़ी है परीक्षा
सिंहस्थ भारत के चार कुंभों में से एक है, जो हर 12 साल में उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर आयोजित होता है। 2016 के सिंहस्थ में करीब 6 करोड़ श्रद्धालु आए थे। अब सरकार का अनुमान है कि 2028 में यह संख्या 40 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। जनसंख्या वृद्धि, बेहतर कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते चलन को देखते हुए यह अनुमान अतिशयोक्ति नहीं लगता, लेकिन प्रशासन के लिए यह इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा भी है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मेला क्षेत्र 3,219 हेक्टेयर में फैला होगा, जिसमें 30 पार्किंग सेक्टर बनाए जाएंगे। सामान्य दिनों में 10.13 लाख और पर्व स्नान के दिनों में 22.35 लाख वाहनों की दैनिक पार्किंग क्षमता प्रस्तावित है। यानी पर्व स्नान के एक दिन में दो करोड़ से ज्यादा लोगों के आने-जाने का इंतजाम करना होगा। इसी अनुमान को ध्यान में रखकर शिप्रा के घाटों पर एक दिन में 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है — यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सरकार कितने बड़े पैमाने पर सोच रही है।
सड़कों का जाल — मालवा कनेक्टिविटी का नया नक्शा
तैयारियों का सबसे बड़ा हिस्सा सड़क ढांचे पर खर्च हो रहा है। इंदौर-उज्जैन 6-लेन सड़क पर ₹1,692 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं — यह 46.475 किलोमीटर लंबी सड़क है, जिस पर 97.54 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और नवंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 अक्टूबर की समीक्षा बैठक में ₹20,000 करोड़ के 175 कार्यों की डेडलाइन अक्टूबर 2027 तय की थी, और यह सिक्सलेन उसका अहम हिस्सा है।
इंदौर-उज्जैन के अलावा उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड रोड पर ₹2,935 करोड़, उज्जैन-जावरा 4-लेन पर ₹5,017 करोड़, उज्जैन-झालावाड़ (2 से 4 लेन) पर ₹2,523 करोड़ और उज्जैन-गरोठ मार्ग पर ₹2,660 करोड़ का निवेश हो रहा है। इन सड़कों के पूरा होने पर मालवा के लगभग हर हिस्से से उज्जैन की दूरी घट जाएगी और भारी भीड़ के समय भी यातायात बाधित नहीं होगा। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, ये सड़कें सिंहस्थ के बाद भी मालवा के विकास की रीढ़ बनेंगी — यानी निवेश सिर्फ मेले तक सीमित नहीं, स्थायी ढांचे में बदल रहा है।
शिप्रा की सफाई — कान्ह डायवर्जन पर 919 करोड़ का दांव
सिंहस्थ की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से शिप्रा नदी की स्वच्छता रही है। इस बार सरकार ने इस पर विशेष ध्यान दिया है। कान्ह डायवर्जन प्रोजेक्ट पर ₹919 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकना है। इसके साथ ही सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल भंडारण पर ₹614.53 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है, ताकि शिप्रा में साल भर पर्याप्त साफ पानी बना रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिप्रा में जल प्रवाह की कमी सिंहस्थ के हर आयोजन की पुरानी समस्या रही है। जल भंडारण की यह परियोजना इस बार उस कमी को दूर करने का सबसे बड़ा प्रयास है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर शिप्रा का पानी स्नान योग्य और स्वच्छ बना रहेगा — हालांकि यह दावा जमीन पर तभी साबित होगा, जब निर्माण समय पर पूरा होगा और पानी की गुणवत्ता की निगरानी लगातार होती रहेगी।
घाटों का विस्तार — एक दिन में 4 करोड़ स्नान का लक्ष्य
शिप्रा नदी पर 29 किलोमीटर से अधिक नए घाट बनाए जा रहे हैं, जिन पर ₹778 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। इसके अलावा 7.8 किलोमीटर मौजूदा घाटों के उन्नयन पर ₹120 करोड़ खर्च होंगे। घाटों पर एक दिन में 4 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है — यह 2016 के मुकाबले कई गुना ज्यादा है।
घाटों का डिजाइन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि भीड़ प्रबंधन आसान हो, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं हों, और आपात स्थिति में निकासी के रास्ते खुले रहें। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, घाटों के साथ-साथ चेंजिंग रूम, पेयजल, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा चौकियों का भी प्रावधान है।
रेल-बस परिवहन प्लान — 236 स्पेशल ट्रेनें और 2,000 बसें
परिवहन व्यवस्था के लिए भी बड़ा प्लान तैयार है। प्रस्तावित योजना के अनुसार 236 स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, 7 स्टेशनों का उन्नयन होगा और 2,000 बसों से घाटों तक परिवहन की व्यवस्था होगी। 30 पार्किंग सेक्टरों से श्रद्धालुओं को शटल बसों के जरिए मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा।
सामान्य दिनों में 10.13 लाख और पर्व स्नान के दिनों में 22.35 लाख वाहनों की दैनिक पार्किंग क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का प्रबंधन करने के लिए स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, ड्रोन निगरानी और डिजिटल सूचना बोर्डों का भी प्रावधान प्रस्तावित है। रेलवे और सड़क परिवहन दोनों मोर्चों पर यह तैयारी बताती है कि सरकार इस बार भीड़ को शहर में घुसने से पहले ही नियंत्रित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
सिर्फ उज्जैन नहीं — पूरा मालवा योजना में
इस बार की सबसे खास बात यह है कि योजना सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं है। इंदौर, जावरा, झालावाड़, गरोठ और मक्सी की ओर सड़क, परिवहन, पेयजल, सीवरेज और धार्मिक स्थलों का विकास हो रहा है। यानी सिंहस्थ को मालवा के समग्र विकास का अवसर बनाया जा रहा है।
इंदौर से उज्जैन की कनेक्टिविटी, धार्मिक पर्यटन सर्किट का विस्तार और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का उन्नयन — ये सभी काम सिंहस्थ के बहाने हो रहे हैं, लेकिन इनका लाभ मेले के बाद भी जनता को मिलता रहेगा। सरकार का तर्क है कि इस तरह का निवेश क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा, क्योंकि बेहतर सड़क और सुविधाएं व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा देंगी।
डेडलाइन अक्टूबर 2027 और आगे की राह
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 अक्टूबर की समीक्षा बैठक में ₹20,000 करोड़ के 175 कार्यों की डेडलाइन अक्टूबर 2027 तय की है। इसका मतलब है कि सिंहस्थ से करीब छह महीने पहले सारे काम पूरे हो जाने चाहिए, ताकि बची अवधि में ट्रायल, सुधार और अंतिम तैयारियों का काम हो सके।
हालांकि, इतने बड़े पैमाने के कामों में समय पर पूर्ति हमेशा चुनौती रहती है। मानसून, भूमि अधिग्रहण और ठेकेदारों की क्षमता जैसे कारक समयसीमा को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि प्रगति की मासिक समीक्षा हो रही है और किसी भी काम में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिंहस्थ-2028 की सफलता अब इसी बात पर टिकी है कि कागज पर दिख रहे ये बड़े आंकड़े जमीन पर समय से उतरें।
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