डेस्क रिपोर्ट
शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में मध्यप्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिल रहा है। मैहर की त्रिकूट पहाड़ी से लेकर देवास की टेकरी तक, नलखेड़ा के बगलामुखी धाम से सलकनपुर के विजयासन धाम तक — हर जगह भक्तों की भारी भीड़ मां के दर्शनों के लिए उमड़ रही है। पेश है प्रदेश के 10 सबसे प्रमुख और प्राचीन देवी धामों की विशेष रिपोर्ट।
1. मैहर — मां शारदा देवी (सतना)
मैहर का शारदा देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। त्रिकूट पर्वत पर स्थित इस मंदिर की मान्यता है कि यहां सती का हार गिरा था — “माई का हार” से ही “मैहर” नाम पड़ा। आल्हा-ऊदल की तपस्या की कथाएं इस धाम से जुड़ी हैं। मंदिर की स्थापना सन् 502 की मानी जाती है।
नवरात्रि 2026: मेला कंट्रोल रूम के अनुसार पहले दिन 1,25,811 और पंचमी पर 1,40,266 श्रद्धालु पहुंचे। (स्रोत: स्थानीय मीडिया रिपोर्ट)
मैहर शारदा देवी मंदिर (फाइल फोटो) — स्रोत: Wikimedia Commons
2. देवास — चामुंडा/तुलजा भवानी (माता टेकरी)
देवास की टेकरी पर बड़ी माता तुलजा भवानी और छोटी माता चामुंडा विराजमान हैं। लगभग 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर होलकर और पवार राजवंशों की कुलदेवी के रूप में पूजित है। रक्तपीठ की मान्यता भी इस धाम से जुड़ी है।
नवरात्रि 2026: मंदिर प्रबंधन के अनुसार छठे दिन तक 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। (स्रोत: स्थानीय मीडिया)

3. नलखेड़ा — मां बगलामुखी (आगर मालवा)
नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर भारत के तीन प्रमुख बगलामुखी पीठों में से एक है। लखुंदर नदी के किनारे स्थित यह तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र है। यहां त्रिशक्ति विग्रह स्थापित है और मां बगलामुखी को आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है।
नवरात्रि 2026: पहले दिन 50,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। दर्शन व्यवस्था रात 11 बजे तक बढ़ाई गई है। (स्रोत: स्थानीय मीडिया)

4. दतिया — पीतांबरा पीठ
दतिया की पीतांबरा पीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी महाराज ने की थी। यहां बगलामुखी के साथ धूमावती का मंदिर भी है — देश का एकमात्र धूमावती मंदिर होने की मान्यता है। वनखंडेश्वर महादेव भी यहां विराजमान हैं। छोटी खिड़की से मां के दर्शन की अनूठी परंपरा है।
नवरात्रि 2026: भारी भीड़ के चलते 17-19 अक्टूबर के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। (स्रोत: स्थानीय मीडिया)

5. भोपाल — काली माता मंदिर, तलैया
भोपाल के तलैया क्षेत्र में छोटा तालाब किनारे स्थित काली माता मंदिर शहर का प्रमुख देवी धाम है। 1968 में शिव नारायण सिंह बगवार द्वारा निर्मित इस मंदिर को “कालीघाट” के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है।
6. जबलपुर — त्रिपुर सुंदरी, तेवरा
जबलपुर से लगभग 14 किमी दूर तेवरा में त्रिपुर सुंदरी मंदिर स्थित है। 11वीं सदी में कलचुरी राजा लक्ष्मीकर्ण द्वारा निर्मित इस मंदिर में त्रिमुखी विग्रह स्थापित है। कर्ण की कुलदेवी के रूप में भी इसकी मान्यता है। विकल्प के रूप में गोंडकालीन खेरमाई मंदिर भी प्रमुख है।
7. रतलाम — कालका माता
रतलाम में झाली तालाब के समीप कालका माता मंदिर स्थित है। नवरात्रि में यहां गरबा-रास की विशेष धूम रहती है। इस वर्ष 11-20 अक्टूबर तक 10 दिवसीय मेला आयोजित हो रहा है, जिसका शुभारंभ मंत्री चेतन्य काश्यप ने किया।
8. उज्जैन — हरसिद्धि माता
उज्जैन की हरसिद्धि माता 51 शक्तिपीठों में से एक हैं — मान्यता है कि यहां सती की कोहनी गिरी थी। विक्रमादित्य की कुलदेवी के रूप में पूजित इस मंदिर में 13वीं सदी के दो 50 फीट ऊंचे दीपस्तंभ हैं, जिनमें 1000 से अधिक दीये जलते हैं। नवरात्रि में दीपस्तंभों की जगमगाहट देखते ही बनती है।

9. इंदौर — बिजासन माता
इंदौर की कुलदेवी के रूप में पूजित बिजासन माता का मंदिर शहर का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। नवरात्रि में यहां विशेष आयोजन होते हैं। 18 अक्टूबर को निकली चुनरी यात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए थे।
10. सलकनपुर — विजयासन देवी (सीहोर)
सीहोर जिले में स्थित सलकनपुर का विजयासन देवी धाम सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। नवरात्रि में यहां पदयात्रियों का सैलाब उमड़ता है — हजारों भक्त पैदल चलकर मां के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में 24 घंटे विशेष ड्यूटी लगाई गई है।

नोट: भीड़ के आंकड़े मंदिर प्रबंधन/स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से हैं।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
