मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की रणनीति अब चंबल क्षेत्र तक विस्तार लेने की दिशा में बढ़ रही है। चंबल एक्सप्रेस-वे के आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना में उद्यमियों के साथ संवाद के दौरान इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करने के संकेत दिए। सरकार की मंशा सड़क संपर्क का लाभ उठाकर नए उद्योगों को आकर्षित करने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने की है।
तीन लाख करोड़ के गलियारे के बाद चंबल पर नजर
यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य मंत्रिमंडल जबलपुर, भोपाल और इंदौर के बीच सात जिलों को जोड़ने वाले औद्योगिक गलियारा परियोजना को मंजूरी दे चुका है। इस परियोजना में करीब तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान बताया जा रहा है। अब चंबल क्षेत्र में भी औद्योगिक निवेश की संभावनाओं को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है।
दीपावली से पहले संभागीय निवेश सम्मेलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों को गति देने और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए दीपावली से पहले चंबल संभाग स्तरीय औद्योगिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसके जरिए क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता सामने लाने, निवेशकों को सुविधाओं से परिचित कराने और नई इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने का प्रयास होगा।
मुरैना में उद्यम संवाद
मुरैना में जनविश्वास अभियान के तहत आयोजित संवाद में करीब 20 उद्यमियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने उद्योग संचालन के अनुभवों के साथ सरकारी सहयोग, उपलब्ध सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दे साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उद्योग, औद्योगिक क्लस्टर और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों को विकसित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएंगे।

उद्योगों के उदाहरण
बैठक में उद्योगों की अलग-अलग श्रेणियों से जुड़े उदाहरण भी सामने आए। मुख्यमंत्री ने एजीआई ग्रीन पैक की कांच निर्माण इकाई की सराहना करते हुए कहा कि कांच उद्योग को बढ़ावा देना प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकता है। वहीं, बायोरा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की बायोमास पैलेट निर्माण इकाई को फसल अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल और पराली प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
सिनेरिया फार्मा के कपिल सत्यवानी ने बताया कि उनकी इकाई का भूमिपूजन मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से किया था। निर्माण पूरा हो चुका है और यहां चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा संबंधी उपकरणों का उत्पादन किया जाएगा। यह इकाई क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाओं का एक उदाहरण है।
तोमर ने भी रखी संभावनाएं
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी पोरसा और सबलगढ़ सहित क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने की संभावनाओं का उल्लेख किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और सचिव सुदाम खाड़े सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
चंबल क्षेत्र में औद्योगिक विकास की इस पहल का वास्तविक असर निवेशकों की भागीदारी, नए औद्योगिक क्षेत्रों के चयन, बुनियादी सुविधाओं और जमीन पर उतरने वाली परियोजनाओं से तय होगा। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र की संभावनाओं को निवेश में बदलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते खोलने की है।
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