नई दिल्ली। महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ करने के लिए केंद्र सरकार एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सत्र में संविधान संशोधन सहित तीन अहम विधेयक पेश किए जा सकते हैं। हालांकि, पिछली बार जरूरी बहुमत नहीं जुटा पाने के बाद सरकार के सामने इस बार भी राजनीतिक समर्थन हासिल करने की चुनौती है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार छोटे दलों और अन्य सांसदों से संपर्क साधकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
बताया जा रहा है कि विशेष सत्र इसी महीने बुलाया जा सकता है। इसकी औपचारिक जानकारी सत्र शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले दिए जाने की संभावना है। प्रस्तावित विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल बताए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लोकसभा की सीटों में संभावित बढ़ोतरी और महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
दोनों सदनों में बहुमत की चुनौती
विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के आधार पर आवश्यक विशेष बहुमत हासिल करना होगा। बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में 543 में से तीन सीटें खाली हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 318 सांसद बताए गए हैं, जबकि प्रस्तावित गणना के अनुसार 360 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को अपने मौजूदा सहयोगियों से आगे बढ़कर दूसरे दलों का समर्थन भी जुटाना पड़ सकता है।
राज्यसभा में भी स्थिति आसान नहीं है। सदन की 245 सीटों में से तीन खाली होने के कारण उपलब्ध संख्या 242 है। बताए गए आंकड़ों के अनुसार, राजग के पास 153 सांसद हैं, जबकि प्रस्तावित विधेयकों के लिए 162 वोटों का आंकड़ा हासिल करना होगा। यानी सरकार को यहां भी अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
अप्रैल में बहुमत से दूर रह गई थी सरकार
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर अप्रैल में हुए मतदान में सरकार जरूरी बहुमत नहीं जुटा पाई थी। बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, उस दौरान लोकसभा में 528 सांसदों ने मतदान किया। इनमें 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की जरूरत थी, लेकिन विधेयक को 54 वोट कम मिले और वह पारित नहीं हो सका।
पिछली नाकामी के बाद सरकार अब नए राजनीतिक समीकरणों के बीच समर्थन की संभावनाएं तलाश रही है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर भी नजर रखी जा रही है। हालांकि, इन दलों के समर्थन या सांसदों के पाला बदलने संबंधी दावों की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
संसद के सत्रावसान पर भी नजर
मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी। इसके बाद दोनों सदनों के औपचारिक सत्रावसान की स्थिति को लेकर भी चर्चा है। सरकार के अगले कदम और विशेष सत्र की संभावित तारीख पर अब राजनीतिक हलकों की नजर है।
महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में अगला कदम केवल विधेयकों को पेश करने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए संसद में जरूरी समर्थन, संवैधानिक प्रक्रिया और परिसीमन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सहमति अहम होगी। फिलहाल विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों की अंतिम रूपरेखा को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
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