नई दिल्ली ब्यूरो
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत में आज, 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होनी है। विपक्ष के 11 नेताओं ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने की मांग की गई है। यह मामला मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए इस सुनवाई पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।
कौन सी पीठ कर रही है सुनवाई
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ कर रही है। यह पीठ याचिकाकर्ताओं की दलीलें और चुनाव आयोग का पक्ष सुनेगी। सुनवाई से पहले रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ कमियां पाई थीं, जिनके कारण सुनवाई में देरी हुई थी। अब जबकि वे कमियां दूर कर दी गई हैं, सुनवाई आगे बढ़ने की उम्मीद है।
याचिका में कौन-कौन हैं शामिल
याचिका में कुल 11 विपक्षी नेता शामिल हैं। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीआई-एम के एम.ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और आईयूएमएल के ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी इस याचिका में शामिल नहीं है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में अलग से याचिका दायर की है। यानी विपक्ष के अलग-अलग दलों ने अलग-अलग तरीके से इस मुद्दे को अदालत के सामने रखा है।
किसे बनाया गया है पक्षकार
याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एसआईआर की प्रक्रिया में कई खामियां हैं और इस पर अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर अपना पक्ष रखा जाएगा।
रजिस्ट्री ने पाईं थीं 14 कमियां
सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 कमियां पाई थीं। इनमें वकालतनामा, फीस और धुंधली पहचान पत्र जैसी औपचारिक खामियां शामिल थीं। इन कमियों के कारण सुनवाई टल गई थी। अब जब ये कमियां दूर कर दी गई हैं, तब सुनवाई की राह साफ हुई है। यह प्रक्रिया अदालत की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है, जिसमें हर याचिका की औपचारिक जांच की जाती है।
याचिका में क्या मांग की गई है
याचिका में मांग की गई है कि एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, मतदाता सूची के आंकड़ों की जांच (ऑडिट) कराई जाए और इस पूरे मामले की कानूनी जांच हो। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और कोई अयोग्य व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
क्यों अहम है यह मामला
मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद होती है। अगर सूची में गड़बड़ी होती है, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसलिए विपक्षी दल इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का मकसद सूची को शुद्ध और अद्यतन करना है। अदालत की सुनवाई से इस बहस को एक दिशा मिलने की उम्मीद है।
एसआईआर क्या है
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है। इसमें मतदाताओं के नामों की जांच की जाती है, नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, और जो लोग अब उस क्षेत्र में नहीं रहते या जिनका निधन हो चुका है, उनके नाम हटाए जाते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव के समय मतदाता सूची सही और पूरी हो।
मतदाता सूची की शुद्धता क्यों जरूरी है
मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हट जाता है, तो वह अपने मताधिकार से वंचित हो जाता है। वहीं, अगर सूची में गलत नाम बने रहते हैं, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसलिए इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सावधानी दोनों की जरूरत होती है। विपक्षी दलों की चिंता यही है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है
आज की सुनवाई में अदालत याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुन सकती है और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करने पर विचार कर सकती है। यह भी संभव है कि अदालत इस मामले में कोई अंतरिम आदेश दे या फिर अगली सुनवाई की तारीख तय करे। इस मामले का नतीजा आने वाले चुनावों की तैयारियों पर भी असर डाल सकता है।
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