राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। अब राज्य सरकार इस कानून के नियम बनाएगी और उन्हें अधिसूचित करेगी, जिसके बाद यह पूरी तरह लागू होगा।
क्या-क्या है विधेयक में
विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा — ऐसा न करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण 30 दिनों के भीतर कराना होगा। बहुविवाह पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा और उल्लंघन पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं पर भी प्रभावी रोक लगेगी, जबकि उत्तराधिकार में बेटे-बेटियों को बराबर का अधिकार मिलेगा। अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य
उत्तराखंड देश का पहला राज्य था, जिसने समान नागरिक संहिता को कानून का रूप दिया। गुजरात के इस कदम के बाद अब यह बहस और तेज़ हो गई है कि अन्य राज्य भी इसी राह पर चलेंगे या नहीं। समर्थकों का कहना है कि एक समान संहिता से सभी नागरिकों को बराबर अधिकार मिलेंगे, जबकि आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डालने वाला बताते हैं।
आगे की राह
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। नियमों के बनने और अधिसूचित होने के बाद ही यह कानून ज़मीनी स्तर पर लागू हो पाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे को भी प्रभावित करेगा।
फोटो: राष्ट्रपति सचिवालय (GODL-India) / Wikimedia Commons
