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मेष और वृषभ लग्न में कारक-अकारक ग्रह: किन ग्रहों से मिलेगा शुभ फल, किनसे रहें सावधान — ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा

Astrologer Nirvikar Sharma

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आज हमारी चर्चा विभिन्न लग्नों में कारक और आका रक ग्रहों कों लेकर होगी।

आज हम मेष वृष लग्न की कुंडलियों में कारक ग्रहों की चर्चा आरंभ करते है।

मेष लग्न की कुंडली में सुर्य ,चन्द्रमा और ब्रहस्पति कारक होते है। क्यो की सुर्य इस कुंडली में त्रिकोण अर्थात पंचमेश होते है। चन्द्रमा इस लग्न की कुंडली में चतुर्थेश होते है। और देव गुरु नवमेश होते है जो की त्रिकोण के स्वामी होते है। साथ ही साथ मंगल लग्नेश होने के कारण यह भी कारक होते है।

मेष लग्न की कुंडली में बुध शुक्र और शनि आका रक ग्रह होते है। क्यो की यह सारे ग्रह लग्नेश के नैसर्गिक शत्रु होते है। साथ ही बुध षष्ठेश शुक्र द्वितीयेश और सप्तमेश होने के कारण मारक कहे गये है। चूंकि मेष लग्न एक चर लग्न है अतः इस कुंडली में शनि एकादश भाव के स्वामी होने के कारण बाधक माने जाते है।

वृषभ लग्न की कुंडली में शनि सर्वाधिक योग कारक माने जाते है क्यो की यहाँ उनके पास केंद्र और त्रिकोण दोनों का आधिपत्य होता है। सुर्य कों कारक माना जाता है क्यो की सुर्य चतुर्थ भाव अर्थात केंद्र भाव का आधिपत्य रखते है। लग्नेश शुक्र स्वयम लग्नेश होने के कारण स्वयम कारक है।

वृषभ लग्न की कुंडली में गुरु अष्टम के स्वामी होते है। साथ बुध त्रिकोण के स्वामी होकर तटस्थ होते है। जब की मंगल प्रबल आका रक होते है।

इस लग्न की कुंडली में मंगल और ब्रहस्पति कों मारक कहा जाता है।

आपको एक बात की जानकारी और दे दे की लग्नेश सदैव कारक होता है भले ही उसकी दूसरी राशि 6,8,12 भावों में क्यो ना हो। जैसे वृषभ लग्न में लग्नेश शुक्र की दूसरी राशि षष्ठ भाव में होती है फिर भी उनको षष्ठेश का दोष नही लगेगा। मेष लग्न की कुंडली में मंगल की दूसरी राशि अष्टम भाव में होती है फिर भी उनको अष्टमेश होने का दोष नही लगेगा। दूसरी बात यह है की अगर किसी ग्रह की एक राशि त्रिकोण में आ जाए दूसरी राशि भले ही 6,8,12 भाव में हो किन्तु उसको मारक या आका रक का दोष नही लगेगा। जैसे सिंह लग्न में देव गुरु पंचमेश और अष्टमेश होते है तो यह कारक ही माने जाएंगे क्यो की इनकी एक राशि त्रिकोण भाव में आ रही है। यधपि अपनी महादशा में यह पंचम और अष्टम भाव दोनों के फल करेंगे। किन्तु उनका तरीका अलग होगा। यह बात आप सभी लोग आगे की लग्नों पर भी लागू करेंगे।

मिथुन और कर्क लग्न की कुंडली में कारक और मारक की चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे।

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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा

ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा

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