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मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव में नया मोड़: कांग्रेस समर्थित निर्दलीय राजकुमार लोहानी ने भरा नामांकन, हरदीप सिंह पुरी को अब निर्विरोध जीत नहीं

सांकेतिक चित्र: विधानसभा भवन सांकेतिक चित्र: विधानसभा भवन

भोपाल ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के उपचुनाव में नामांकन के आखिरी दिन बड़ा मोड़ आ गया है। भोपाल के कारोबारी राजकुमार लोहानी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है और कांग्रेस ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत की संभावना खत्म हो गई है। अब इस सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान और मतगणना होगी।

नामांकन के आखिरी दिन भरा पर्चा

राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 2 नवंबर थी। इसी आखिरी दिन भोपाल के घोड़ा नक्कास इलाके के रहने वाले राजकुमार लोहानी मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे और रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपना नामांकन पत्र जमा किया। उनके प्रस्तावक कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे बने। नामांकन के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ अकील, अभिजीत शाह, सुरेंद्र सिंह हनी बघेल और कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी भी मौजूद रहे। कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी ने इस नामांकन को राजनीतिक रूप से भी चर्चा में ला दिया है।

इससे पहले तक माना जा रहा था कि भाजपा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी इस सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं, क्योंकि नामांकन की आखिरी तारीख तक उनके सामने कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं था। लोहानी के पर्चा भरने के बाद अब यह स्थिति बदल गई है। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में उतरने से उपचुनाव में मुकाबले की स्थिति बन गई है और राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

कौन हैं राजकुमार लोहानी

सांकेतिक चित्र: मतपेटी
सांकेतिक चित्र: मतपेटी

राजकुमार लोहानी भोपाल के पुराने शहर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1959 में भोपाल में हुआ था। वे पुराने शहर में मोबाइल एसेसरीज की दुकान चलाते हैं और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय बताए जाते हैं। उन्होंने हायर सेकंडरी तक पढ़ाई की है। लोहानी ने कहा है कि उनका राजनीति से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना पर्चा भरा है और चुनाव का परिणाम चाहे जो हो, वे इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते थे।

लोहानी के नामांकन की खास बात यह है कि वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा है और कांग्रेस से समर्थन मांगा था। कांग्रेस ने उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने बताया कि लोहानी ने पार्टी से सहयोग मांगा था, जिसके बाद उन्हें मदद का भरोसा दिया गया।

कांग्रेस ने क्यों दिया समर्थन

कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी का विरोध किया है। पार्टी का आरोप है कि एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद में पुरी का नाम सामने आने के बाद उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उठते हैं। इसी विरोध के बीच कांग्रेस ने लोहानी को समर्थन देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने यह आशंका भी जताई है कि लोहानी का पर्चा खारिज किया जा सकता है। पार्टी ने एक पुराने मामले का हवाला देते हुए यह आशंका जताई है।

कांग्रेस की रणनीति को इस नजरिए से भी देखा जा रहा है कि पार्टी इस उपचुनाव को सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का मौका मान रही है। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, फिर भी कांग्रेस ने निर्दलीय उम्मीदवार के जरिए मुकाबला खड़ा करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह चुनावी मैदान खाली नहीं छोड़ेगी। कांग्रेस विधायकों की नामांकन के दौरान मौजूदगी भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

भाजपा का पक्ष: पुरी आधिकारिक उम्मीदवार

दूसरी ओर, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस सीट पर अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। पुरी 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। भाजपा की ओर से पुरी की उम्मीदवारी को पूरी पार्टी का समर्थन प्राप्त है और नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी को पार्टी की एकजुटता के रूप में देखा गया।

विधानसभा के संख्याबल की बात करें तो 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों की संख्या इससे काफी कम है। राज्यसभा उपचुनाव में विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं, इसलिए संख्याबल के हिसाब से भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। फिर भी, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से यह उपचुनाव राजनीतिक रूप से दिलचस्प हो गया है।

सीट खाली कैसे हुई

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हो गई, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है। उपचुनाव में जीतने वाला उम्मीदवार इस सीट पर बचे हुए कार्यकाल के लिए सदस्य रहेगा।

राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आम चुनाव से अलग होती है। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि विधानसभा में दलों के संख्याबल का इस चुनाव पर सीधा असर पड़ता है। मध्य प्रदेश में भाजपा के पास बहुमत होने के कारण पार्टी के उम्मीदवार की जीत की संभावना मजबूत मानी जाती है, लेकिन नामांकन प्रक्रिया और मतदान की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही परिणाम सामने आता है।

चुनाव कार्यक्रम: आगे की तारीखें

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की आखिरी तारीख 2 नवंबर थी। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। जांच में यह तय होगा कि लोहानी का नामांकन वैध है या नहीं। इसके बाद 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। अगर लोहानी का पर्चा वैध पाया जाता है और वे 5 नवंबर तक नाम वापस नहीं लेते हैं, तो 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी।

आने वाले दिनों में दोनों खेमों की नजर 3 नवंबर की जांच पर रहेगी। कांग्रेस ने पहले ही पर्चा खारिज होने की आशंका जताई है, इसलिए जांच का परिणाम इस उपचुनाव की दिशा तय करेगा। अगर पर्चा वैध रहता है तो 12 नवंबर को मतदान होगा, जिसमें विधानसभा के सदस्य अपने मत का इस्तेमाल करेंगे। इसके बाद मतगणना होगी और परिणाम घोषित किया जाएगा।

आगे क्या होगा

इस उपचुनाव के नतीजे का असर सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी रणनीति और संगठन की सक्रियता दिखाने का मौका है, जबकि भाजपा के लिए यह अपनी बहुमत की स्थिति को फिर से साबित करने का अवसर है। निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से चुनावी चर्चा बढ़ी है और आने वाले दिनों में दोनों दलों की ओर से विधायकों से संपर्क और समर्थन जुटाने की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

फिलहाल, सबकी नजर 3 नवंबर को होने वाली नामांकन पत्रों की जांच पर है। जांच के बाद यह साफ होगा कि 12 नवंबर को मतदान होगा या फिर कोई और स्थिति बनेगी। तब तक भोपाल की राजनीतिक गलियारों में इस उपचुनाव को लेकर चर्चा जारी रहेगी। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस सीट के उपचुनाव को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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