भोपाल ब्यूरो
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को भोपाल में चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर सम्मेलन ‘अभ्युदय-2026’ का शुभारंभ करेंगे। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10 बजे आयोजित उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री प्रतिभागियों को संबोधित करने के साथ उनसे संवाद भी करेंगे। सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण, सुशासन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार, उद्योग और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा होगी। देशभर से कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों के भाग लेने की उम्मीद है।
सम्मेलन की थीम: समग्र कल्याण का समन्वय
इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘समग्र कल्याण के लिए पर्यावरणीय, सामाजिक उत्तरदायित्व, सुशासन और सभ्यतागत ज्ञान का समन्वय’ रखी गई है। आयोजकों के अनुसार इस विषय के माध्यम से उद्योग जगत, सरकार, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने तथा जनहित से जुड़े क्षेत्रों में व्यावहारिक पहल विकसित करने पर चर्चा होगी। सम्मेलन का मूल उद्देश्य कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और मानव संसाधन (एचआर) से जुड़े प्रयासों को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है, ताकि विभिन्न संस्थाएं मिलकर उपयोगी और टिकाऊ मॉडल तैयार कर सकें।
कौशल विकास से पर्यावरण तक: पांच अहम विषय
सम्मेलन में कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार इन पांचों क्षेत्रों में सरकार, उद्योग और सामाजिक संस्थाओं की त्रिवेणी भागीदारी से ही समग्र विकास का लक्ष्य हासिल हो सकता है। मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी से जुड़े अधिकारियों के बीच अनुभव साझा करने के लिए सम्मेलन एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां नीति, व्यवहार और जमीनी अनुभव तीनों का समन्वय होगा।
प्रमुख अतिथि: देश-विदेश के विद्वान और पद्मश्री सम्मानित
कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित अतिथियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें इंडोनेशिया से पद्मश्री डॉ. अगुस इंद्र उदयाना, एस-व्यासा के कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के प्रतिनिधि श्रीराम तिवारी और सम्मेलन के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर शामिल होंगे। पद्मश्री से सम्मानित विद्वानों की उपस्थिति सम्मेलन के ज्ञान-पक्ष को विशेष मजबूती देगी, क्योंकि इनमें से कई प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रबंधन विज्ञान के सेतु के रूप में जाने जाते हैं।
आयोजक: संस्कृति विभाग का न्यास और ग्लोबल पीस फाउंडेशन
इस आयोजन को संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास और यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं। डॉ. विक्रांत सिंह तोमर की संस्था यूनाइटेड काउंसिल फॉर एंशिएंट विजडम-यूनाइटेड कॉन्शसनेस भी इसमें सहयोग कर रही है। गौरतलब है कि यह सम्मेलन का चतुर्थ संस्करण है, यानी पिछले तीन वर्षों में इस मंच ने एचआर और सीएसआर के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। आयोजकों का दावा है कि इस बार का संस्करण अब तक का सबसे बड़ा होगा।
HR-CSR का राष्ट्रीय संदर्भ: क्यों अहम है यह मंच
भारत में कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित मानदंडों पर खरी उतरने वाली कंपनियों के लिए अपने शुद्ध लाभ का दो प्रतिशत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर खर्च करना अनिवार्य है। पिछले एक दशक में इस प्रावधान से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। वहीं मानव संसाधन प्रबंधन का क्षेत्र भी तेजी से बदल रहा है — कौशल विकास, कर्मचारी कल्याण और कार्यस्थल संस्कृति आज किसी भी संगठन की सफलता के केंद्र में है। ‘अभ्युदय’ जैसे राष्ट्रीय सम्मेलन इन्हीं दोनों धाराओं को जोड़ने का काम करते हैं, ताकि उद्योगों का पैसा और प्रबंधन की विशेषज्ञता समाज के लिए अधिकतम मूल्य सृजित कर सके।
सभ्यतागत ज्ञान और आधुनिक प्रबंधन का सेतु
सम्मेलन की एक खास पहचान इसका सभ्यतागत आयाम है। एस-व्यासा के कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र जैसे विद्वान योग और समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति रखते हैं, जबकि इंडोनेशिया के पद्मश्री डॉ. अगुस इंद्र उदयाना सांस्कृतिक कूटनीति और शांति-शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। आयोजकों के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित समग्रता, सेवा और संतुलन के सिद्धांत आधुनिक एचआर और सीएसआर प्रथाओं को गहराई दे सकते हैं। यही कारण है कि सम्मेलन में शैक्षणिक सत्रों के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों को भी स्थान दिया गया है।
भोपाल: राष्ट्रीय सम्मेलनों का केंद्र बनता शहर
कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी कर रहा है। भोपाल में ऐसे बड़े सम्मेलनों का नियमित आयोजन शहर को राष्ट्रीय सम्मेलन-पर्यटन के मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिला रहा है। मुख्यमंत्री का स्वयं उद्घाटन सत्र में शामिल होना इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार मानव संसाधन विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है। सम्मेलन के समापन सत्र में कुछ ठोस सिफारिशें सामने आने की उम्मीद है, जिन पर राज्य सरकार आगे की कार्ययोजना बना सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन से निकले मॉडल यदि जमीनी स्तर पर उतारे गए तो कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नई दिशा मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
