ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
नमस्कार प्रिय Followers
आज हमारी चर्चा एक नये विषय पर होगी। वह विषय का नाम है योग।
जन्म कुंडली में ग्रहों एवं राशियों का अध्ययन योगों के माध्यम से किया जाता है। इनके माध्यम से जातक का भाग्य, व्यक्तित्व, धन, सुख आदि विषयों को जानने में सहायता मिलती है।
शुभ और अशुभ योग
किसी भी कुंडली में शुभ या अशुभ योग होते हैं। यह योग जिस स्थिति के अनुसार बनते हैं, वे स्थितियां ग्रह अथवा राशियों से संबंधित होती हैं।
योग कब फल देते हैं
जब भी योग बनाने वाले ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यंतर दशा आती है, तब यह योग घटित होते हैं।
जैसे चंद्र और मंगल के प्रभाव से योग बनता है, तो जब भी जातक के जीवन काल में चंद्र या मंगल की दशा आएगी, तब यह योग घटित होगा।
आगे की श्रृंखला
आगे की posts में चंद्रमा से, सूर्य से और लग्न से बनने वाले योगों की चर्चा करेंगे।
योग का फलादेश हमेशा देश, काल और परिस्थिति के अनुसार करना चाहिए।
अगली पोस्ट में चंद्रमा से बनने वाले बहुत सारे योगों की चर्चा करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
संपर्क: 9758023241
डिस्क्लेमर: यह ज्योतिषीय जानकारी सामान्य मार्गदर्शन हेतु है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
