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इंदौर-देवास में लोकायुक्त का बड़ा छापा: प्रधान आरक्षक के 15 ठिकानों पर सर्च, 6.26 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा

लोकायुक्त छापा इंदौर: दस्तावेजों की जांच — प्रतीकात्मक चित्र

इंदौर ब्यूरो

मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह इंदौर और देवास में बड़ी कार्रवाई की। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने सुबह करीब 6 बजे पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी), इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक (चालक) फिरोज खान से जुड़े 15 ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। शुरुआती जांच में करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आने की जानकारी दी गई है। लोकायुक्त के अनुसार यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक आंकी गई है। यह कार्रवाई लोकायुक्त छापा इंदौर के रूप में सामने आई है।

लोकायुक्त छापा इंदौर: लोकायुक्त टीम की कार्रवाई के दौरान की तस्वीर
लोकायुक्त टीम की कार्रवाई के दौरान की तस्वीर

शिकायत क्या थी?

लोकायुक्त को शिकायत मिली थी कि फिरोज खान लंबे समय से कर्तव्य से अनुपस्थित हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वह पुलिस विभाग में पदस्थ होने का प्रभाव बताकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों, प्लॉटों और संपत्ति संबंधी मामलों में हस्तक्षेप करते हैं। शिकायत में पत्नी, मां और एक परिचित महिला के नाम पर संपत्तियां खरीदने, कई वाहन रखने और लकड़ी का कारोबार करने की बात भी कही गई थी। शिकायतकर्ता ने अवैध साधनों से आय से अधिक संपत्ति जुटाने और निवास के पास नया मकान बनवाने का आरोप लगाया था। शिकायत की जांच के बाद सत्यापन में शिकायत सही पाई गई, तब सर्च कार्रवाई की गई।

आय और संपत्ति का हिसाब

लोकायुक्त के अनुसार, फिरोज खान को 24 साल के सेवाकाल में वेतन से करीब 75 लाख रुपये की आय होना अनुमानित किया गया है। अन्य स्रोतों से हुई आय को जोड़कर उनकी कुल आय करीब 1 करोड़ 93 लाख 84 हजार रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले जांच में अब तक करीब 6 करोड़ 26 लाख रुपये की संपत्ति की जानकारी दी गई है। लोकायुक्त के अनुसार संपत्ति का मूल्य ज्ञात आय की तुलना में करीब 223 प्रतिशत अधिक है। इसी आधार पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच की जा रही है। हालांकि, तलाशी और दस्तावेजों की पड़ताल पूरी होने के बाद संपत्तियों के मूल्य, आय के स्रोत और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

लोकायुक्त छापा इंदौर: क्या-क्या मिला?

जांच में मकान, फ्लैट, प्लॉट, कृषि भूमि और व्यावसायिक संपत्तियों के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। लोकायुक्त के अनुसार इनमें पांच मकान, तीन फ्लैट, पांच आवासीय भूखंड, एक व्यावसायिक भूखंड और अलग-अलग स्थानों पर कृषि भूमि शामिल हैं। ये संपत्तियां प्रधान आरक्षक, उनके परिजनों और एक परिचित महिला के नाम पर खरीदी गई बताई गई हैं। मां और पत्नी के नाम पर संचालित एक ट्रेडिंग फर्म के खाते में करोड़ों रुपये के लेन-देन तथा रियल एस्टेट में निवेश की जानकारी भी सामने आई है। सांवेर तहसील के एक गांव में कृषि भूमि के सौदे और परिचित महिला की फर्म की भूमिका की भी जांच हो रही है।

लोकायुक्त छापा इंदौर: कहां-कहां हुई कार्रवाई?

लोकायुक्त की आठ टीमें देवास और इंदौर जिले में करीब 15 ठिकानों पर जांच कर रही हैं। देवास में आदर्श नगर स्थित निवास, पुलिस लाइन के समीप पैतृक निवास, बागली, जैतपुरा, इटावा, विजयनगर में प्लॉट, मकान, दुकान और खेतों की जानकारी जुटाई जा रही है। इंदौर में बाणगंगा, स्कीम नंबर 94 और श्रीनगर कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर टीमें पहुंचीं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि और व्यावसायिक भूखंडों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। पैतृक निवास में करीब 18 से 20 लोगों की टीम ने कार्रवाई शुरू की।

FIR और आगे की कार्रवाई

लोकायुक्त ने बताया कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अचल संपत्तियों की खरीद में भूमिका के कारण एक सहयोगी महिला को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। लोकायुक्त बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

नोट: लोकायुक्त की जांच अभी जारी है। संपत्ति और आय के आंकड़े लोकायुक्त के शुरुआती आकलन के अनुसार हैं। आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, इस खबर में ‘आरोपी’ शब्द का प्रयोग इसी कारण किया गया है।

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