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सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: उज्जैन में ठेकेदारों पर 15 लाख का जुर्माना, घटिया निर्माण और देरी पर कमिश्नर-महापौर सख्त

सांकेतिक चित्र: सड़क चौड़ीकरण निर्माण स्थल

उज्जैन ब्यूरो

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। उज्जैन में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता खराब पाए जाने और देरी पर संभागायुक्त आशीष सिंह और महापौर मुकेश टटवाल ने कुल 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। थर्ड पार्टी ऑडिट में कमियां उजागर होने के बाद यह कार्रवाई की गई है, जिसने सिंहस्थ जैसे महा आयोजन की तैयारियों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासनिक समीक्षा में उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए), पुलिस हाउसिंग, पर्यटन विभाग और विद्युत मंडल के तहत चल रही परियोजनाओं की जांच की गई। समीक्षा के दौरान सड़क निर्माण की खराब फिनिशिंग और भवनों में निर्माण दोष सामने आए, जिसके बाद अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए।

पुलिस हाउसिंग के ठेकेदारों पर 5-5 लाख का जुर्माना

पुलिस हाउसिंग के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए संभागायुक्त आशीष सिंह ने ठेकेदारों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश दिए। इन परियोजनाओं में हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित 448 कांस्टेबल आवास, एनजीओ बैरक, अधिकारियों का विश्राम गृह, एनजीओ प्रशिक्षण छात्रावास, सैनिक प्रशिक्षण छात्रावास और पुराने भवनों का जीर्णोद्धार शामिल हैं।

थर्ड पार्टी ऑडिट में इन निर्माणों में कमियां पाई गई थीं। संभागायुक्त ने कमियों को तत्काल दूर करने के आदेश दिए और सड़क चौड़ीकरण के मामलों में प्रभावित निवासियों को बिना देरी के उचित नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि प्रशासन निर्माण गुणवत्ता के साथ-साथ नागरिकों के हितों की रक्षा को भी गंभीरता से ले रहा है।

महापौर ने सड़क चौड़ीकरण कार्यों का किया निरीक्षण

महापौर मुकेश टटवाल ने स्वयं सड़क चौड़ीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सिंधी कॉलोनी चौराहा से नीलगंगा तक और कोयला फाटक से निजातपुरा व कांठल चौराहा होते हुए सती गेट तक के मार्गों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यातायात व्यवस्था और निर्माण प्रगति की समीक्षा की।

सिंधी कॉलोनी चौराहा और नीलगंगा के बीच 900 मीटर लंबे खंड को 30 मीटर तक चौड़ा किया गया है, जिसमें केंद्रीय प्रकाश व्यवस्था, डिवाइडर और अन्य बुनियादी ढांचे के कार्य किए गए हैं। हालांकि, धीमी प्रगति से नाराज महापौर ने ठेकेदार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया और अधिकारियों को गुणवत्ता से समझौता किए बिना निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

गुणवत्ता और समयसीमा: दोनों मोर्चों पर सख्ती

इस कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है — सिंहस्थ-2028 जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की तैयारियों में न तो घटिया निर्माण बर्दाश्त किया जाएगा और न ही तय समयसीमा से भटकाव। संभागायुक्त और महापौर दोनों ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कमियों को दूर किया जाए, निर्माण की गुणवत्ता सुधारी जाए और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में तेजी लाई जाए।

सड़क चौड़ीकरण के मामलों में प्रभावित निवासियों को उचित नोटिस जारी करने का निर्देश भी महत्वपूर्ण है। अक्सर इस तरह की बड़ी परियोजनाओं में स्थानीय निवासियों की शिकायतें सामने आती हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी।

पृष्ठभूमि: 40 करोड़ श्रद्धालुओं के अनुमान के बीच महा तैयारियां

सिंहस्थ-2028 को लेकर मध्यप्रदेश सरकार की तैयारियां अभूतपूर्व पैमाने पर चल रही हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, इस महा आयोजन में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, और मालवा क्षेत्र का चेहरा बदलने के लिए करीब 28 हजार करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। शिप्रा नदी पर 29 किलोमीटर नए घाटों का निर्माण भी इन योजनाओं में शामिल है।

इतने बड़े पैमाने की तैयारियों में गुणवत्ता नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। उज्जैन विकास प्राधिकरण, पुलिस हाउसिंग, पर्यटन विभाग और विद्युत मंडल — सभी एजेंसियां एक साथ कई परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं। ऐसे में थर्ड पार्टी ऑडिट जैसी व्यवस्था कमियों को समय रहते पकड़ने का महत्वपूर्ण साधन है, और ताजा कार्रवाई इसी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।

सुरक्षा तैयारियां भी साथ-साथ: महाकाल मंदिर में NSG मॉक ड्रिल

गौरतलब है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सुरक्षा व्यवस्था को भी परखा जा रहा है। हाल ही में उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 100 से अधिक एनएसजी कमांडो ने आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल की थी, जिसमें पुलिस, आतंकवाद निरोधी दस्ते और स्थानीय प्रशासन ने समन्वय का अभ्यास किया। रात 11 बजे से सुबह 2 बजे तक चले इस अभ्यास में आपातकालीन प्रतिक्रिया, समन्वय और निकासी प्रक्रियाओं का आकलन किया गया।

बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता पर कार्रवाई और सुरक्षा तैयारियों का समानांतर अभ्यास — दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि प्रशासन सिंहस्थ-2028 को लेकर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता। महाकाल की नगरी में होने वाले इस महा आयोजन की सफलता के लिए निर्माण गुणवत्ता, समयबद्धता और सुरक्षा — तीनों मोर्चों पर एक साथ कार्य हो रहा है।

आगे क्या: सुधार और समय पर पूर्णता की चुनौती

जुर्माने के आदेश के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि ठेकेदार कमियों को कितनी जल्दी दूर करते हैं और परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी होती हैं या नहीं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। आने वाले महीनों में सिंहस्थ कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहने की उम्मीद है, ताकि 2028 में उज्जैन दुनिया के सामने एक भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन प्रस्तुत कर सके।

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डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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