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शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का जैत में अंतिम संस्कार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अर्पित किए पुष्प

शिवराज सिंह चौहान फाइल चित्र: शिवराज सिंह चौहान

सीहोर ब्यूरो

सार: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का अंतिम संस्कार शुक्रवार को सीहोर जिले के पैतृक गांव जैत में पूरे सम्मान के साथ संपन्न हुआ। भोपाल में अंतिम दर्शन के बाद पार्थिव शरीर को जैत ले जाया गया, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मां काशीबाई का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया था। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। निधन की खबर फैलते ही परिवार, शुभचिंतकों और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार का दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए शोक और संवेदना का दिन बन गया। दिन के पहले हिस्से में निधन की खबर आई और दोपहर बाद पैतृक गांव में अंतिम विदाई संपन्न हुई। इस खबर में निधन की पहली जानकारी से लेकर अंतिम संस्कार तक का पूरा घटनाक्रम, नेताओं की मौजूदगी और परिवार की पृष्ठभूमि को सिलसिलेवार रखा गया है, ताकि पाठक को एक ही जगह पूरी तस्वीर मिल सके।

भोपाल में अंतिम दर्शन: साकेत नगर निवास पर श्रद्धांजलि

काशीबाई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए भोपाल स्थित निवास 9-बी, साकेत नगर में रखा गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान भावुक नजर आए। भोपाल में अंतिम दर्शन का यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि राजधानी में रहने वाले जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और आम नागरिक अपनी संवेदना व्यक्त कर सके। निवास पर पहुंचने वालों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और परिवार के सदस्यों से मिलकर दुख साझा किया। भोपाल से जैत तक का सफर अंतिम यात्रा का वह पड़ाव था, जिसमें राजधानी की श्रद्धांजलि और पैतृक गांव की विदाई, दोनों जुड़ गईं।

जैत में अंतिम संस्कार: पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई

भोपाल में अंतिम दर्शन के बाद काशीबाई का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए सीहोर जिले के पैतृक गांव जैत ले जाया गया। यहां पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार दोपहर 3 बजे गृह ग्राम जैत में होना तय था और उसी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम विदाई संपन्न हुई। गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण और पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। पैतृक गांव में अंतिम संस्कार का होना परिवार और गांव, दोनों के लिए भावनात्मक क्षण था। जैत वह गांव है, जहां से शिवराज सिंह चौहान का बचपन और परिवार की जड़ें जुड़ी हुई हैं। इसलिए अंतिम विदाई का गांव में होना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवार की अपनी माटी से जुड़ाव का प्रतीक भी बन गया।

शिवराज सिंह चौहान
फाइल चित्र: शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अर्पित किए पुष्प, परिवार को दी सांत्वना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जैत पहुंचे और काशीबाई के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वह अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए और शिवराज सिंह चौहान तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह महाकाल से प्रार्थना करते हैं कि काशीबाई को मोक्ष मिले और पीड़ित परिवार को दुख सहने की क्षमता मिले। मुख्यमंत्री का जैत पहुंचना इस बात का संकेत था कि राज्य का शीर्ष नेतृत्व इस शोक की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने गांव में मौजूद लोगों के लिए भी संवेदना का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए और परिवार के सदस्यों से बातचीत में अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

कौन-कौन पहुंचा जैत: प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी

अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ विधायक, स्थानीय मंत्री और कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इन सभी ने भी पुष्प अर्पित किए और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। जैत में प्रदेश नेतृत्व की इस मौजूदगी से यह स्पष्ट हुआ कि यह विदाई केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन से जुड़े लोगों ने भी इसमें भागीदारी की। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की बड़ी उपस्थिति ने भी इस अंतिम विदाई को गांव के सामूहिक शोक का रूप दे दिया।

एक सप्ताह से अस्पताल में थीं काशीबाई, सांस की तकलीफ से जूझ रही थीं

काशीबाई 76 वर्ष की थीं और कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। वह करीब एक सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं। इलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। वह सांस की तकलीफ से जूझ रही थीं। शुक्रवार सुबह भोपाल के एम्स अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एक सप्ताह तक अस्पताल में इलाज चलने के दौरान परिवार और शुभचिंतक उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे। निधन की खबर के बाद परिवार के साथ-साथ उन लोगों में भी शोक फैल गया, जो लंबे समय से परिवार से जुड़े हुए हैं। उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए यह निधन परिवार के लिए गहरा आघात बन गया, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।

शिवराज सिंह चौहान ने रद्द किए सभी कार्यक्रम

निधन की सूचना मिलते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने सभी पूर्व निर्धारित सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। उन्हें शुक्रवार को रायसेन जिले के एक बड़े किसान सम्मेलन में शामिल होना था, जिसे उन्होंने तुरंत निरस्त कर दिया और बिना देर किए सीधे अपने पैतृक गांव जैत के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम रद्द करने का यह फैसला इस बात को दर्शाता है कि मातृशोक की घड़ी में परिवार की जिम्मेदारी और अंतिम विदाई को सबसे ऊपर रखा गया। किसान सम्मेलन जैसे बड़े कार्यक्रम का रद्द होना भी इस शोक की गंभीरता को बताता है। शिवराज सिंह चौहान भोपाल में अंतिम दर्शन के समय भी मौजूद रहे और फिर जैत में अंतिम संस्कार तक परिवार के साथ रहे।

परिवार में काशीबाई की भूमिका: एकजुटता की डोर

परिवार से जुड़ी जानकारी के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान की पहली मां सुंदरबाई का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। इसके बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने काशीबाई से दूसरा विवाह किया था। काशीबाई ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और बच्चों का लालन-पालन किया। उन्होंने पूरे परिवार को एकजुट रखने में अहम भूमिका निभाई। शिवराज सिंह चौहान और उनके परिवार के लिए उनका विशेष स्थान रहा। एक मां के रूप में उन्होंने परिवार को संभालने, जोड़ने और आगे बढ़ाने में जो भूमिका निभाई, वह परिवार के लिए हमेशा यादगार रहेगी। अंतिम विदाई के समय परिवार के सदस्यों की भावुकता भी इसी जुड़ाव को दर्शा रही थी। मां का जाना जीवन में एक ऐसी रिक्तता छोड़ जाता है, जिसे कोई भर नहीं सकता। यही भावना शिवराज सिंह चौहान के संदेश में भी झलक रही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि माताजी का जाना परिवार के लिए अत्यंत दुख और पीड़ा का दिन है।

शोक और संवेदना का दिन: जैत से भोपाल तक

शुक्रवार को भोपाल से लेकर जैत तक शोक और संवेदना का माहौल रहा। सुबह निधन की खबर, दोपहर में भोपाल में अंतिम दर्शन और फिर जैत में अंतिम संस्कार, इस पूरे घटनाक्रम में परिवार, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और ग्रामीण एक साथ दिखे। मुख्यमंत्री और प्रदेश नेतृत्व की मौजूदगी, ग्रामीणों की भागीदारी और कार्यकर्ताओं की संवेदनाएं, इन सबने इस अंतिम विदाई को एक सामूहिक श्रद्धांजलि का रूप दे दिया। काशीबाई के जीवन और परिवार में उनकी भूमिका को याद करते हुए लोग यही कह रहे थे कि उन्होंने परिवार को एकजुट रखा और बच्चों का पालन-पोषण पूरी जिम्मेदारी से किया। इस शोक की घड़ी में परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने वालों का सिलसिला भोपाल और जैत, दोनों जगह देखने को मिला। अंतिम संस्कार के संपन्न होने के साथ ही यह विदाई पूरी हुई, लेकिन परिवार और शुभचिंतकों के मन में काशीबाई की स्मृतियां लंबे समय तक बनी रहेंगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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