दिल्ली ब्यूरो। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार रात दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का किसी तरह का खंडन नहीं किया, बल्कि सबूत मांगा है। राष्ट्रपति भवन में करीब एक घंटे चली मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने कहा कि वह “हैरान और स्तब्ध” हैं कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की बातों से न तो इनकार किया, न सवाल उठाया और न ही बहस की।
“मुख्य बात यह है कि मैं उम्मीद कर रहा था कि भारत की राष्ट्रपति ‘वोट चोरी’ के दावे को खारिज करेंगी और कहेंगी कि भारत में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावी व्यवस्था है। लेकिन मैं हैरान और स्तब्ध रह गया कि भारत की राष्ट्रपति ने हमारी बात को स्वीकार किया,” राहुल गांधी ने कहा। उनके अनुसार राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल से ‘चुनाव चोरी’ के सबूत देने को कहा।
दो पन्नों का ज्ञापन, चार मुख्य मांगें
इंडिया गठबंधन के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को दो पन्नों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में चार मुख्य मांगें रखी गईं: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और CEC व चुनाव आयुक्तों को आजीवन प्रतिरक्षा देने वाले 2023 के कानून को रद्द करना; विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत स्थगित करना और मतदाता सूची से हटाए गए 13.3 करोड़ मतदाताओं की बहाली; सभी चुनावों में पेपर बैलेट की वापसी; और पिछले दो वर्षों के उन विधानसभा चुनावों को रद्द करना जिनमें ‘वोट चोरी’ के ठोस सबूत पेश किए गए हैं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और CEC ज्ञानेश कुमार ने भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश रची है। राहुल ने कहा, “मैंने राष्ट्रपति से कहा कि ‘चुनाव चोरी’ के सबूत पूरे देश को मालूम हैं — राज्य दर राज्य चुनाव चुराए गए, 2024 का चुनाव चुराया गया। जब राष्ट्रपति तैयार होंगी, हम सारे सबूत खुशी से सौंप देंगे।”
सोमवार को CJI से मुलाकात
राहुल गांधी ने घोषणा की कि इंडिया गठबंधन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मिलेगा और उन्हें भी ज्ञापन सौंपेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताई और EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव की मांग की; राष्ट्रपति ने सबूत मांगे हैं और गठबंधन सामग्री जुटा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में खरगे और राहुल के अलावा तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला, माकपा नेता एमए बेबी, भाकपा नेता डी. राजा, सपा नेता राजीव राय, राजद के तेजस्वी यादव व मनोज झा और वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन शामिल थे।
बैठक से पहले गठबंधन के सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया था; रास्ते में कुछ नेताओं ने कर्तव्य पथ पर धरना भी दिया। दिल्ली में 30,000 से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात रहे।
