नई दिल्ली ब्यूरो
सार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति मंच की 54वीं बैठक में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में रेलवे स्टेशनों के मल्टीमॉडल हब के रूप में तेज पुनर्विकास, पीएम एकता मॉल के समय पर निर्माण और दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल खर्च पर नहीं, बल्कि ठोस परिणामों पर होना चाहिए — काम समय पर पूरा हो और लोगों को लंबे समय तक लाभ मिले।
बुधवार को सेवा तीर्थ स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित इस बैठक में रेलवे, पीएम एकता मॉल और बल्क ड्रग पार्क से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों से कहा कि वे परियोजनाओं में आ रही अड़चनों को मिशन मोड में दूर करें, केंद्र और राज्यों के बीच तथा अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल मजबूत करें और वरिष्ठतम स्तर पर करीबी निगरानी रखें। उन्होंने सक्रिय कार्य संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि हर स्तर पर जिम्मेदारी तय हो, आने वाली चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाया जाए, समय पर फैसले लिए जाएं और काम पूरा होने की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
बैठक के बाद गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 54वीं प्रगति बैठक में 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की गई और बैठक के मुख्य बिंदु रेलवे स्टेशनों का मल्टीमॉडल हब के रूप में तेज पुनर्विकास, दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और कारीगरों व स्थानीय व्यवसायों को सशक्त बनाने के लिए एकता मॉल रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस स्पष्ट है — ठोस परिणाम, समय पर काम और लोगों को दीर्घकालिक लाभ।
बैठक में किन परियोजनाओं की समीक्षा हुई
बैठक में जिन परियोजनाओं की समीक्षा की गई, वे देश के आर्थिक विकास और जनकल्याण के लिए अहम मानी जाती हैं। इनमें रेलवे से जुड़ी परियोजनाएं, पीएम एकता मॉल और बल्क ड्रग पार्क शामिल हैं। ये परियोजनाएं 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत 16,000 करोड़ रुपये से अधिक है। समीक्षा के दौरान काम पूरा करने की समयसीमा, विभागों के बीच तालमेल और क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करना ही सबसे बड़ी कसौटी है। देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि लोगों तक लाभ पहुंचने में भी देर होती है। इसलिए हर परियोजना की नियमित समीक्षा, बाधाओं की पहचान और उनके तुरंत समाधान की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय से ही बड़ी परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकती हैं।
रेलवे स्टेशनों का मल्टीमॉडल हब के रूप में पुनर्विकास
बैठक में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास पर खास जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का काम तेज किया जाए और उन्हें मेट्रो सहित परिवहन के अन्य साधनों से जोड़कर मल्टीमॉडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसका मकसद यात्रियों को एक ही जगह से ट्रेन, मेट्रो, बस और अन्य परिवहन साधनों की सुविधा देना है, ताकि यात्रा आसान और तेज हो।
अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की समीक्षा के दौरान भी इसी दिशा में निर्देश दिए गए। बड़े स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने से न केवल यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि आसपास के इलाकों में व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टेशन अब केवल आने-जाने की जगह नहीं, बल्कि शहर के आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं, जहां खरीदारी, खानपान और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

पीएम एकता मॉल: कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार
पीएम एकता मॉल को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये मॉल स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने, कारीगरों की आजीविका मजबूत करने और उनके कारोबार के विस्तार में मददगार होने चाहिए। उन्होंने इन मॉल को पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि मांग बढ़ने से ग्रामीण उत्पादन, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
मुख्य सचिवों से कहा गया कि वे इन मॉल के काम की नियमित समीक्षा करें और निर्माण समय पर पूरा होना सुनिश्चित करें। पीएम एकता मॉल बनाने की पहल की घोषणा केंद्रीय बजट 2023-24 में की गई थी। इसका उद्देश्य एक जिला, एक उत्पाद के उत्पादों, भौगोलिक संकेत वाले उत्पादों और देशभर के अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देना और उनकी बिक्री करना है। एकता मॉल में हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग जगह रखने का प्रावधान है, जहां वे अपने एक जिला, एक उत्पाद के उत्पाद प्रदर्शित कर सकते हैं।
बल्क ड्रग पार्क: दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
बैठक में आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बल्क ड्रग पार्कों की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय तत्वों और जरूरी कच्चे माल का देश में ही उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता मजबूत हो सके। दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सीधा मतलब है कि जरूरी दवाओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो और देश के भीतर ही उत्पादन क्षमता बढ़े।
बल्क ड्रग पार्कों के जरिए दवा उद्योग को एक ही जगह बुनियादी ढांचा, साझा सुविधाएं और कच्चा माल उपलब्ध कराया जाता है। इससे उत्पादन लागत घटती है और छोटी व मझोली दवा कंपनियों को भी बड़े पैमाने पर उत्पादन का मौका मिलता है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दवा निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो, क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है।
मुख्य सचिवों को हर महीने समीक्षा का निर्देश
प्रधानमंत्री ने मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वे जिलाधिकारियों के साथ हर महीने योजनाओं की समीक्षा करें। इसका उद्देश्य योजनाओं को लागू करने में आ रही कमियों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि पात्र लाभार्थियों तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचे। मासिक समीक्षा की व्यवस्था से जमीनी स्तर की समस्याएं जल्दी सामने आएंगी और उनका समाधान भी तेजी से हो सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन का ध्यान केवल खर्च पर नहीं, बल्कि उसके परिणामों पर होना चाहिए। यानी यह देखना जरूरी है कि योजना पर खर्च हुआ पैसा सच में लोगों के जीवन में बदलाव ला रहा है या नहीं। लाभार्थियों तक लाभ पहुंचना, सेवाओं की गुणवत्ता और समय पर काम पूरा होना — इन्हीं पैमानों पर योजनाओं की सफलता आंकी जानी चाहिए।
प्रगति मंच क्या है और कैसे काम करता है
प्रगति का पूरा नाम प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, यानी सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन। यह सूचना और संचार तकनीक पर आधारित बहु-स्तरीय मंच है, जो केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ लाता है। इसका मकसद परियोजनाओं को लागू करने में आने वाली बाधाओं को दूर करना और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं व कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाना है।
इस मंच पर प्रधानमंत्री खुद लंबित परियोजनाओं और शिकायतों की समीक्षा करते हैं। केंद्र और राज्य, दोनों के वरिष्ठ अधिकारी एक ही मंच पर मौजूद रहते हैं, इसलिए फैसले तुरंत लिए जा सकते हैं और जिम्मेदारी भी स्पष्ट रहती है। 54वीं बैठक इस बात का संकेत है कि यह मंच नियमित रूप से काम कर रहा है और बड़ी परियोजनाओं की निगरानी के लिए इसका लगातार इस्तेमाल हो रहा है।
आकांक्षी जिलों और प्रखंडों पर विशेष ध्यान
बैठक में आकांक्षी जिलों और आकांक्षी प्रखंडों में समन्वय, नियमित निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। आकांक्षी जिले वे जिले हैं, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है और जहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन जिलों और प्रखंडों में योजनाओं का लाभ सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए नियमित निगरानी जरूरी है। समन्वय की कमी से योजनाएं कागज पर तो दिखती हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर नहीं दिखता। इसलिए जिला और प्रखंड स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और हर महीने प्रगति की समीक्षा करना इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
आगे क्या: समय पर पूरा होना ही असली परीक्षा
54वीं प्रगति बैठक से यह संदेश साफ है कि सरकार अब परियोजनाओं की घोषणा से आगे बढ़कर उनके समय पर पूरा होने पर ध्यान दे रही है। रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास, एकता मॉल का निर्माण और बल्क ड्रग पार्कों का विकास — इन तीनों क्षेत्रों में आने वाले महीनों में काम की गति ही यह तय करेगी कि बैठक में लिए गए फैसले जमीन पर कितने उतरे।
मुख्य सचिवों की मासिक समीक्षा, वरिष्ठतम स्तर पर निगरानी और मिशन मोड में अड़चनें दूर करने के निर्देश — ये सभी कदम इसी दिशा में हैं। अगर यह व्यवस्था लगातार चलती रही, तो बड़ी परियोजनाओं में देरी की पुरानी समस्या कम हो सकती है और लोगों को बुनियादी ढांचे व सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
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