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मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव: 31 अक्टूबर को नामांकन भरेंगे हरदीप सिंह पुरी, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे साथ

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी फाइल चित्र: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

भोपाल ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी 31 अक्टूबर को भोपाल में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहेंगे। विधानसभा के संख्या बल को देखते हुए पुरी के निर्विरोध चुने जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है, और अब उनके नामांकन की तारीख भी सामने आ गई है। पुरी 31 अक्टूबर को भोपाल पहुंचकर विधानसभा में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके साथ मौजूद रहेंगे। नामांकन की तैयारियां तेज हो गई हैं और भाजपा पदाधिकारियों ने गुरुवार को नामांकन पत्र खरीद लिए हैं। बताया जा रहा है कि नामांकन पत्र तीन-तीन के सेट में भरे जाएंगे।

31 अक्टूबर को नामांकन, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे साथ

तय कार्यक्रम के अनुसार हरदीप सिंह पुरी 30 अक्टूबर को भोपाल पहुंचेंगे। अगले दिन, 31 अक्टूबर को वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और वरिष्ठ नेताओं के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचकर रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत करेंगे। नामांकन के दौरान पार्टी की ओर से पूरी तैयारी की जा रही है, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। भाजपा पदाधिकारियों ने गुरुवार को ही नामांकन पत्र खरीद लिए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि पार्टी ने नामांकन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नामांकन पत्र तीन-तीन के सेट में भरे जाएंगे। नामांकन दाखिल करने के बाद पुरी के चुनावी सफर का औपचारिक चरण शुरू हो जाएगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी, जिसके बाद ही चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी
फाइल चित्र: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी

सीट खाली होने की वजह: मुरुगन का इस्तीफा

यह उपचुनाव मध्य प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट पर हो रहा है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वे अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल 3 अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हो गई, जिसके लिए निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। रिक्त सीट पर उपचुनाव के जरिए नए सदस्य का चुनाव किया जाएगा, जो शेष कार्यकाल के लिए राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसी वजह से इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में खास दिलचस्पी देखी जा रही है।

उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम

निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार 2 नवंबर तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 5 नवंबर निर्धारित की गई है। जरूरत पड़ने पर 12 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना होगी। हालांकि विधानसभा के संख्या बल को देखते हुए मतदान की नौबत आने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। नामांकन, जांच और नाम वापसी की तारीखें गुजरने के बाद ही यह साफ होगा कि चुनाव निर्विरोध होगा या मतदान कराना पड़ेगा।

संख्या बल: निर्विरोध चुनाव की प्रबल संभावना

230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 65 विधायक हैं और भारत आदिवासी पार्टी का एक विधायक है। इस संख्या बल के आधार पर भाजपा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध चुने जाने की संभावना अधिक मानी जा रही है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए पुरी की जीत को लेकर पार्टी आश्वस्त दिख रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संख्या बल के इस गणित के चलते विपक्षी दलों के लिए इस उपचुनाव में मुकाबला खड़ा करना आसान नहीं होगा। हालांकि चुनावी प्रक्रिया में औपचारिकताएं पूरी होनी बाकी हैं और नामांकन, जांच तथा नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिर भी मौजूदा समीकरण पुरी के पक्ष में मजबूत दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस की आपत्ति: भाजपा के फैसले पर सवाल

दूसरी ओर, कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के भाजपा के फैसले पर सवाल उठाए हैं। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पुरी को नामांकित करने के भाजपा के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और पुरी से जुड़े उठ रहे सवालों के जवाब मांगे हैं। पटवारी ने कहा कि पुरी को सत्ता में बनाए रखने की मजबूरी से यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा में कोई ऐसी बात है जिससे वह कमजोर हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस फैसले का कड़ा विरोध करेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने भी इस नामांकन की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य कलंकित हुआ है और अपनी आलोचना को मध्य प्रदेश में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराधों से जुड़ी चिंताओं से जोड़ा है। कांग्रेस की यह आलोचना उसकी ओर से उठाए गए आरोपों और सवालों के रूप में सामने आई है, जबकि भाजपा ने अपनी केंद्रीय चुनाव समिति के माध्यम से पुरी के नाम की औपचारिक घोषणा की है।

राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया

राज्यसभा उपचुनाव में मध्य प्रदेश विधानसभा के विधायक राज्यसभा सदस्य का चुनाव करते हैं। नामांकन पत्र विधानसभा भवन, भोपाल स्थित रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पत्रों की जांच होती है, जिसमें यह देखा जाता है कि नामांकन नियमानुसार भरा गया है या नहीं। इसके बाद उम्मीदवारों को नाम वापस लेने का मौका मिलता है। अगर अंतिम रूप से एक ही उम्मीदवार मैदान में रहता है, तो वह निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जाता है। अगर एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो विधायकों के बीच मतदान कराया जाता है। इस उपचुनाव में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नामांकन की अंतिम तारीख, जांच और नाम वापसी की तारीखें पहले से तय हैं, इसलिए चुनावी प्रक्रिया चरण-दर-चरण आगे बढ़ेगी।

आगे क्या होगा

आने वाले दिनों में इस उपचुनाव की प्रक्रिया तेज होगी। 30 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी के भोपाल पहुंचने और 31 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने के बाद सबकी नजर नामांकन पत्रों की जांच पर रहेगी। 3 नवंबर को जांच के बाद यह साफ होगा कि कितने उम्मीदवार मैदान में हैं। 5 नवंबर तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव की अंतिम तस्वीर सामने आएगी। अगर पुरी अकेले उम्मीदवार रहते हैं, तो वे निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो जाएंगे। अगर कोई अन्य उम्मीदवार भी मैदान में रहता है, तो 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन मतगणना के बाद नतीजा घोषित किया जाएगा। इस बीच राजनीतिक दलों की ओर से बयानबाजी भी जारी रहने की संभावना है। कांग्रेस की आलोचना के बाद भाजपा की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आ सकती है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा उपचुनाव आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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