भोपाल ब्यूरो
सार: भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फ्रांस के महावाणिज्य दूत पैट्रिक लेवेरिनो के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने फ्रांसीसी कंपनियों को मध्य प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया और फरवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भाग लेने का न्योता दिया। इस भेंट में किसी कंपनी के निवेश की अलग से घोषणा नहीं हुई, बल्कि समिट के लिए भागीदारी और समन्वय की रूपरेखा तय हुई।
समत्व भवन में हुई शिष्टाचार भेंट
बुधवार को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में फ्रांस के महावाणिज्य दूत पैट्रिक लेवेरिनो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिला। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और महावाणिज्य दूत को अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह के साथ महावाणिज्य दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। भेंट के दौरान दोनों पक्षों के बीच आत्मीय चर्चा हुई, जिसमें मध्य प्रदेश और फ्रांस के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के विषय पर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि फ्रांस मध्य प्रदेश को अपना भरोसेमंद साझेदार माने। यह संदेश इसलिए अहम है क्योंकि किसी राज्य के प्रति भरोसा ही विदेशी कंपनियों के निवेश फैसले की पहली शर्त होता है। भेंट का स्वरूप औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर कामकाजी चर्चा का रहा, जिसमें समिट में भागीदारी को लेकर स्पष्ट आग्रह किया गया।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का न्योता
मुख्यमंत्री ने महावाणिज्य दूत से आग्रह किया कि वे फ्रांस की कंपनियों का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर समिट में जरूर आएं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार अगले साल, संभवत: फरवरी 2027 में, भोपाल में ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की जानी है। इस समिट के जरिए सरकार विदेशी निवेशकों को मध्य प्रदेश में उपलब्ध कारोबारी अवसरों से जोड़ना चाहती है। समिट का मकसद केवल एक आयोजन करना नहीं है, बल्कि राज्य की औद्योगिक क्षमता, बुनियादी ढांचे और नीतिगत माहौल को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने रखना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल अवसर उपलब्ध हैं। फ्रांसीसी कंपनियों की भागीदारी से राज्य को तकनीक, प्रबंधन अनुभव और वैश्विक बाजार से जुड़ाव का लाभ मिल सकता है। यह न्योता ऐसे समय दिया गया है जब राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय संपर्क बढ़ा रही है।

एमपीआईडीसी करेगा समन्वय का काम
भेंट में यह व्यवस्था भी तय हुई कि फ्रांसीसी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी एमपीआईडीसी, इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और फ्रांस के महावाणिज्य दूतावास के बीच संपर्क, सहयोग और समन्वय स्थापित किया जाएगा। यह व्यवस्था समिट की तैयारी को सिर्फ आमंत्रण तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे एक संस्थागत प्रक्रिया बनाती है। एमपीआईडीसी राज्य में निवेश से जुड़ी नोडल एजेंसी की भूमिका निभाता है, जबकि चैंबर दोनों देशों के कारोबारी जगत के बीच सेतु का काम करता है। महावाणिज्य दूतावास का जुड़ाव यह भरोसा देता है कि कंपनियों तक सही जानकारी समय पर पहुंचेगी। इस त्रिपक्षीय समन्वय से उम्मीद की जा रही है कि समिट से पहले ही फ्रांसीसी कंपनियों की रुचि के क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी और समिट के दौरान सार्थक बैठकें आयोजित की जा सकेंगी।
क्यों अहम है यह मुलाकात
मध्य प्रदेश के लिए विदेशी निवेश का मतलब केवल पूंजी आना नहीं है, बल्कि रोजगार के नए अवसर, कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना भी है। यही वजह है कि राज्य सरकार निवेश सम्मेलनों को अपनी आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा मानती है। इससे पहले भोपाल में 24 और 25 फरवरी 2025 को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित हो चुकी है, जिसमें देश-विदेश के निवेशकों ने भाग लिया था। अब 2027 में प्रस्तावित समिट उस सिलसिले को आगे बढ़ाने का अवसर मानी जा रही है। फ्रांस के साथ भारत के आर्थिक संबंध पुराने और बहुआयामी हैं, और फ्रांसीसी कंपनियां विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं। ऐसे में फ्रांस के प्रतिनिधिमंडल से सीधी बातचीत राज्य के लिए एक रणनीतिक कदम है। यह भेंट यह भी दिखाती है कि राज्य सरकार निवेशकों तक पहुंचने के लिए केवल समिट के मंच का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि उससे महीनों पहले राजनयिक और कारोबारी संपर्क साध रही है।
आगे क्या होगा
अब नजर इस बात पर रहेगी कि समन्वय व्यवस्था के तहत फ्रांसीसी कंपनियों की ओर से समिट को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया आती है और कितनी कंपनियां अपने प्रतिनिधि भेजने की पुष्टि करती हैं। समिट की तारीख, स्थान और एजेंडा आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। तब तक एमपीआईडीसी और चैंबर के बीच तालमेल से संभावित निवेश क्षेत्रों की सूची तैयार होने की उम्मीद है। यह भी साफ है कि इस भेंट में किसी एक कंपनी के निवेश की घोषणा नहीं की गई, इसलिए समिट तक पहुंचने वाली हर खबर को घोषणा नहीं, बल्कि प्रक्रिया के एक चरण के रूप में देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार के लिए असली परीक्षा समिट के दिन नहीं, बल्कि उसके बाद होगी, जब रुचि को वास्तविक निवेश प्रस्तावों और जमीन पर उतरने वाली परियोजनाओं में बदला जाएगा। फिलहाल यह भेंट मध्य प्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर सक्रिय रूप से प्रस्तुत करने की कोशिश का एक स्पष्ट संकेत है।
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