उज्जैन ब्यूरो। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को श्री महाकाल लोक के अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर में पीएम ई-बस सेवा तथा उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शक्ति पथ, महाकाल लोक से बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया और खुद बस में सफर भी किया। इस अवसर पर वेदपाठी बटुकों ने वेद मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें चला करती थीं, फिर किसी कारण से सार्वजनिक परिवहन बसों को बंद करना पड़ा। हमने वह अभाव आज पूरा किया है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन केंद्र के लिए 10 बसों की सौगात मिल रही है।
उज्जैन दर्शन मार्ग: ₹200 में 27 किमी के प्रमुख मंदिर
उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से प्रारंभ होकर महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर, सिद्धवट मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर होते हुए बस स्टैंड एवं उज्जैन रेलवे स्टेशन से पुनः मेघदूत वन पार्किंग पर समाप्त होगा। इसका शुल्क मात्र 200 रुपये होगा और यात्री यूपीआई से पेमेंट कर सकेंगे।
ये बसें पूर्ण रूप से जीरो एमिशन इलेक्ट्रिक होंगी। उज्जैन दर्शन रूट की कुल लंबाई 27.01 किलोमीटर है।
आधुनिक सुविधाएं
बसों में लाइव सीसीटीवी, जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग तथा यूपीआई/डिजिटल भुगतान की सुविधा रहेगी। बस में डिजिटल असिस्टेंट सह उज्जैन दर्शन गाइड भी उपलब्ध रहेंगे, जो प्रमुख मंदिरों और दर्शनीय स्थलों की जानकारी देंगे।
यात्री निर्धारित स्टॉप पर उतरकर दर्शन कर सकेंगे और उसी टिकट पर अगली उपलब्ध बस में यात्रा जारी रख सकेंगे। उज्जैन शहर में सुगम परिवहन के अंतर्गत कुल 12 मार्ग निर्धारित किए गए हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के दृष्टिगत यह व्यवस्था नगरवासियों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
फोटो: जनसंपर्क मप्र
