केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के मिलवाकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शुक्रवार को वैश्विक व्यापार में विकृतियों और अतिरिक्त क्षमता के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ऐसी विकृतियों के खिलाफ सुधारात्मक उपाय केवल विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप ही अपनाए जाने चाहिए — एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी जैसे उपाय प्रमाण-आधारित हों और उन पर न्यायिक समीक्षा का प्रावधान रहे।
गोयल ने उन एकतरफा उपायों को स्पष्ट रूप से खारिज किया, जो समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर डालते हैं। उनका कहना था कि वैश्विक व्यापार प्रणाली नियम-आधारित और निष्पक्ष होनी चाहिए, न कि कुछ देशों के दबाव में चलने वाली व्यवस्था। बैठक में मौजूद मंत्रियों के सामने भारत ने विकसित और विकासशील देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग रखी।

जबरन श्रम पर भारत की नीति ‘पूर्ण और बिना शर्त’
जबरन श्रम के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापार से जुड़े किसी भी उपाय के लिए विशिष्ट और सत्यापनीय साक्ष्य होना जरूरी है — पूरे देश या क्षेत्र पर सामान्य धारणा के आधार पर व्यापारिक प्रतिबंध उचित नहीं ठहराए जा सकते। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ही सक्षम निकाय है और इसके फैसलों का सम्मान होना चाहिए।
गौरतलब है कि भारत ने जुलाई 2026 में अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। गोयल ने इस कदम का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जबरन श्रम के खिलाफ घरेलू कानून और नीतियों के जरिए पहले से ही निर्णायक कार्रवाई कर रहा है।
एमएफएन सिद्धांत पर जोर, दो-स्तरीय विवाद समाधान की मांग
गोयल ने कहा कि ‘सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र’ (एमएफएन) का सिद्धांत वैश्विक व्यापार व्यवस्था की प्रमुख गारंटी है — सबसे छोटे और सबसे बड़े व्यापारी के लिए समान शर्तें होनी चाहिए। उन्होंने डब्ल्यूटीओ में सर्वसम्मति की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया और दो-स्तरीय विवाद समाधान तंत्र को बहाल करने की मांग की।
अतिरिक्त क्षमता के आरोपों पर गोयल ने कहा कि भारत के पास कोई संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की घरेलू मांग पर आधारित है। भारत उत्पादन को घरेलू खपत के लिए करता है, न कि विदेशी बाजारों में डंप करने के लिए।
बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ताएं
बैठक के इतर गोयल ने कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ भी मुलाकात की, जिसमें व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने 2030 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा सऊदी अरब के साथ खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) मुक्त व्यापार समझौते और दक्षिण कोरिया के साथ सीईपीए के उन्नयन पर भी बातचीत हुई।
