नई दिल्ली ब्यूरो
सार: अक्टूबर 2026 में भारत में इलेक्ट्रिक यात्री गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करीब 75 प्रतिशत बढ़कर 36,646 तक पहुंच गया, जबकि कुल यात्री वाहन बाजार 14.6 प्रतिशत सिकुड़कर 5,01,406 रह गया। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी एक साल में 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई है, और टाटा तथा महिंद्रा की इलेक्ट्रिक बढ़त ने पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की गिरावट का असर काफी हद तक संभाल लिया है।
अक्टूबर 2026 के वाहन रजिस्ट्रेशन के आंकड़े भारतीय कार बाजार की बदलती तस्वीर को साफ-साफ दिखाते हैं। एक तरफ त्योहारों के महीने में भी कुल यात्री वाहनों का रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में घटा है, तो दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने तेज रफ्तार पकड़ी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि खरीदारों की पसंद में आ रहे स्थायी बदलाव का संकेत है। हालांकि आंकड़ों की व्याख्या करते समय त्योहारों के कैलेंडर में आए बदलाव को भी ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि इस साल दीपावली 8 नवंबर को पड़ रही है, जबकि पिछले साल वह अक्टूबर में थी।
अक्टूबर के आंकड़े एक नजर में
बाजार आंकड़ों की जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2026 में कुल यात्री वाहन रजिस्ट्रेशन 5,01,406 रहा, जो अक्टूबर 2025 के 5,87,103 की तुलना में 14.6 प्रतिशत कम है। इसी अवधि में इलेक्ट्रिक यात्री गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 20,979 से बढ़कर 36,646 हो गया, यानी 74.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 17.9 प्रतिशत घटकर 4,64,760 रह गया। नतीजा यह हुआ कि कुल बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी पिछले साल के 3.6 प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 7.3 प्रतिशत तक पहुंच गई।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सिर्फ एक महीने की कहानी नहीं है। पूरे साल के रुझान में भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ती दिख रही है। वाहन रजिस्ट्रेशन के सरकारी पोर्टल वाहन के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में इलेक्ट्रिक यात्री गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 21,029 था, जो अक्टूबर में बढ़कर 35,777 हो गया। सितंबर में यह आंकड़ा 37,284 तक पहुंचा था, जो साल का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में मामूली अंतर इसलिए दिखता है, क्योंकि वे अलग-अलग तारीखों पर लिए गए स्नैपशॉट और अलग-अलग कवरेज पर आधारित होते हैं। इसलिए किसी एक आंकड़े को अंतिम सत्य मानने के बजाय रुझान को देखना ज्यादा सही रहता है, और रुझान साफ तौर पर ऊपर की ओर है।
टाटा और महिंद्रा ने कैसे संभाला बाजार

अक्टूबर की कहानी में सबसे प्रमुख नाम टाटा मोटर्स और महिंद्रा के हैं। टाटा मोटर्स का इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन 76.3 प्रतिशत बढ़कर 14,560 हो गया, जो पिछले साल अक्टूबर में 8,259 था। कंपनी की कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत से बढ़कर 20.2 प्रतिशत हो गई, यानी अब कंपनी की हर पांचवीं गाड़ी इलेक्ट्रिक है। टाटा की पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 18.7 प्रतिशत घटकर 57,693 रह गया, और कुल रजिस्ट्रेशन 8.8 प्रतिशत घटकर 72,253 रहा। अगर इलेक्ट्रिक बढ़त नहीं होती, तो कंपनी की गिरावट कहीं ज्यादा गहरी होती।
महिंद्रा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कंपनी का इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन 84.2 प्रतिशत बढ़कर 8,473 हो गया, जो पिछले साल 4,599 था। महिंद्रा की कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 13.2 प्रतिशत हो गई, यानी हर आठवीं गाड़ी इलेक्ट्रिक। कंपनी की पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन 19.1 प्रतिशत घटा, और कुल रजिस्ट्रेशन 12.6 प्रतिशत घटकर 64,063 रह गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने इन दोनों कंपनियों के लिए पेट्रोल-डीजल खंड की तेज गिरावट को नरम करने का काम किया है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स की ओर से यह भी बताया गया है कि उसकी पंच डॉट ईवी अक्टूबर में एक महीने में 5,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन पार करने वाला कंपनी का पहला अकेला इलेक्ट्रिक मॉडल बन गया है। कंपनी का कहना है कि उसकी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग आपूर्ति से ज्यादा बनी हुई है, इसलिए उत्पादन बढ़ाने और उपलब्धता सुधारने पर काम चल रहा है। खरीदारों के लिहाज से इसका मतलब यह है कि कुछ लोकप्रिय इलेक्ट्रिक मॉडलों पर इंतजार की अवधि अभी बनी रह सकती है।
पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की गिरावट और थोक-बिक्री का अंतर
अक्टूबर में सिर्फ टाटा और महिंद्रा ही नहीं, बल्कि बाजार के बड़े हिस्से में गिरावट दिखी। मारुति सुजुकी का रजिस्ट्रेशन 15.2 प्रतिशत घटकर 2,11,529 रह गया, हुंडई का रजिस्ट्रेशन 16.6 प्रतिशत घटकर 57,915 रह गया, और किया का रजिस्ट्रेशन 13.4 प्रतिशत घटकर 30,667 रह गया। इसके उलट एमजी में 4.3 प्रतिशत और निसान में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह अंतर दिखाता है कि बाजार एक समान नहीं चल रहा है, बल्कि कंपनियों के मॉडल, कीमत और उपलब्धता के हिसाब से नतीजे अलग-अलग आ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि खुदरा रजिस्ट्रेशन में गिरावट के बावजूद थोक बिक्री यानी कंपनियों से डीलरों तक गाड़ियों की आपूर्ति बढ़ी है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में यात्री वाहनों की थोक आपूर्ति 12.4 प्रतिशत बढ़कर 5,28,384 हो गई। मारुति सुजुकी की घरेलू थोक बिक्री 20.5 प्रतिशत बढ़कर 2,12,384 रही, और टाटा मोटर्स की आपूर्ति 20.9 प्रतिशत बढ़कर 73,894 रही। इसका मतलब है कि डीलरों के पास गाड़ियां पहुंची हैं, लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन नवंबर में दीपावली के आसपास होने की संभावना है। यही वजह है कि बाजार के जानकार नवंबर के आंकड़ों को असली कसौटी मान रहे हैं।
दोपहिया इलेक्ट्रिक का रिकॉर्ड और कुल ईवी बाजार
इलेक्ट्रिक कहानी सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। अक्टूबर में सभी खंडों को मिलाकर भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन पहली बार 3.5 लाख से ज्यादा हुआ है। कुल इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन करीब 3,54,000 रहा, जो अक्टूबर 2025 के 2,45,000 और सितंबर 2026 के 3,38,000 से ज्यादा है। लगातार पांचवें महीने इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन तीन लाख से ऊपर बना हुआ है, जो इस बदलाव की गहराई को दिखाता है।
इसमें सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रहा, जिनका रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड 2,24,000 तक पहुंच गया। यह पिछले साल अक्टूबर के 1,51,000 और इस साल सितंबर के 2,09,000 से ज्यादा है। इलेक्ट्रिक यात्री गाड़ियों की तस्वीर मिली-जुली रही है। सालाना आधार पर उनमें करीब 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन सितंबर की तुलना में करीब 4 प्रतिशत की कमी आई। वाहन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन दर्ज होने में आमतौर पर कुछ दिन का अंतराल रहता है, इसलिए अक्टूबर का अंतिम आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। टेस्ला की भारत में बिक्री भी इस साल 1,000 का आंकड़ा पार कर गई है, जिसमें सितंबर और अक्टूबर का योगदान आधे से ज्यादा रहा है।
सालभर की तस्वीर: जनवरी से अक्टूबर तक
साल के पहले दस महीनों की तस्वीर भी इलेक्ट्रिक बढ़त की पुष्टि करती है। इस अवधि में टाटा मोटर्स ने 1,17,547 इलेक्ट्रिक यात्री गाड़ियां रजिस्टर कीं, महिंद्रा ने 66,945 और एमजी ने 55,016। तीनों कंपनियों का कुल योग कुल इलेक्ट्रिक यात्री रजिस्ट्रेशन के 83 प्रतिशत से ज्यादा है। सरकारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अक्टूबर के बीच कुल इलेक्ट्रिक कार रजिस्ट्रेशन 2,87,453 रहा, जो पूरे साल 2025 के 1,76,817 से काफी ज्यादा है। यानी दस महीनों में ही पिछले पूरे साल का आंकड़ा पीछे छूट गया है।
बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से टाटा की हिस्सेदारी करीब 40.7 प्रतिशत और महिंद्रा की करीब 23.7 प्रतिशत रही है। दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 64.4 प्रतिशत बनती है। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रिक कार बाजार अभी कुछ बड़ी कंपनियों के इर्द-गिर्द केंद्रित है, लेकिन नए मॉडलों और नई कंपनियों के आने से आने वाले महीनों में यह तस्वीर बदल सकती है। खरीदारों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ना अच्छी खबर है, क्योंकि इससे कीमत, रेंज और सुविधाओं के मामले में ज्यादा विकल्प मिलने की उम्मीद है।
त्योहारों का कैलेंडर क्यों मायने रखता है
अक्टूबर के आंकड़ों को पढ़ते समय एक सावधानी बरतना जरूरी है। पिछले साल दीपावली अक्टूबर में थी, जबकि इस साल वह 8 नवंबर को है। इसलिए पिछले साल अक्टूबर में हुई त्योहारी खरीदारी का एक हिस्सा इस साल नवंबर में खिसक गया है। बुकिंग, डिलीवरी और रजिस्ट्रेशन के बीच का अंतर भी इस खिसकाव को बढ़ाता है। बाजार विश्लेषकों ने साफ कहा है कि नवंबर के आंकड़े ही बताएंगे कि अक्टूबर की गिरावट सिर्फ कैलेंडर का असर थी या बाजार में नरमी का कोई गहरा रुझान है।
यही सावधानी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आंकड़ों पर भी लागू होती है। इलेक्ट्रिक खंड में सालाना वृद्धि इतनी तेज है कि कैलेंडर के असर के बावजूद वह ऊपर बना हुआ है, लेकिन महीने-दर-महीने की तुलना में सितंबर से अक्टूबर तक मामूली कमी भी दिखी है। इसलिए एक महीने के आंकड़े से कोई अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय तीन-चार महीनों के रुझान को देखना ज्यादा भरोसेमंद रहता है।
मंत्री की उम्मीद: 2027 तक 35-40 प्रतिशत?
इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह उम्मीद जताई है कि अगले साल तक भारत में बिकने वाली कुल कारों में 35 से 40 प्रतिशत पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी। यह उनका अनुमान और उम्मीद है, कोई आधिकारिक लक्ष्य या तय आंकड़ा नहीं। मौजूदा हिस्सेदारी 7.3 प्रतिशत को देखते हुए यह उम्मीद काफी महत्वाकांक्षी लगती है, लेकिन मंत्री का तर्क है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रफ्तार और नए मॉडलों की आमद इस दिशा में बढ़त बनाए रखेगी।
गडकरी ने यह भी कहा है कि हरित हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा है और भारत स्वच्छ हाइड्रोजन का शुद्ध निर्यातक बन सकता है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया के संघर्षों और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जीवाश्म ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, इसलिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का भी जिक्र किया है। टोयोटा की इनोवा फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी इसी महीने आने की बात कही गई है, जो लगभग शुद्ध एथनॉल वाले ई100 ईंधन पर चल सकेगी। मारुति सुजुकी की वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल पहले ही आ चुकी है, जो ई20 से ई100 तक के मिश्रण पर चल सकती है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने पिछले महीने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव को अधिसूचित किया है, जिससे ई100 पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का रास्ता साफ हुआ है।
खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है
आम खरीदार के लिहाज से अक्टूबर के आंकड़े कई संकेत देते हैं। पहला, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के विकल्प तेजी से बढ़ रहे हैं और उनकी कीमतें पहले की तुलना में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो रही हैं। दूसरा, चार्जिंग का बुनियादी ढांचा भी फैल रहा है, हालांकि शहरों के बाहर अभी इस पर ध्यान देना जरूरी है। तीसरा, इलेक्ट्रिक ट्रक जैसे बड़े वाहनों में भी बदलाव शुरू हो गया है, जिससे आने वाले समय में माल ढुलाई की लागत और प्रदूषण दोनों पर असर पड़ने की उम्मीद है। लग्ज़री इलेक्ट्रिक कार खंड में भी नई गाड़ियों की आमद बढ़ रही है।
हालांकि खरीदारी से पहले कुछ बातों की जांच जरूरी है। गाड़ी की वास्तविक रेंज, घर या दफ्तर के पास चार्जिंग की सुविधा, सर्विस नेटवर्क और बैटरी की वारंटी जैसे बिंदु कीमत से कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। त्योहारी सीजन में छूट और ऑफर आकर्षक दिख सकते हैं, लेकिन उनकी शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। नवंबर के आंकड़े आने के बाद बाजार की तस्वीर और साफ होगी, और तब यह पता चलेगा कि इलेक्ट्रिक की यह रफ्तार दीपावली की खरीदारी के साथ और तेज होती है या कुछ नरम पड़ती है।
फिलहाल इतना तय है कि भारतीय कार बाजार का संतुलन बदल रहा है। पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का दबदबा अभी बना हुआ है, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी हर महीने थोड़ी-थोड़ी बढ़ रही है। टाटा और महिंद्रा की बढ़त, दोपहिया खंड का रिकॉर्ड और कुल इलेक्ट्रिक बाजार का पहली बार साढ़े तीन लाख पार जाना, ये तीनों संकेत एक ही दिशा में इशारा करते हैं। आने वाले महीने बताएंगे कि यह दिशा कितनी तेज और कितनी टिकाऊ है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
