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राज्यसभा उपचुनाव में बड़ा मोड़: कांग्रेस समर्थित लोहानी का पर्चा खारिज, पुरी के हलफनामे पर तीन आपत्तियां, फैसला लंबित

सांकेतिक चित्र: विधानसभा भवन सांकेतिक चित्र

भोपाल ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान बड़ा मोड़ आ गया। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन अनिवार्य शपथ पत्र फॉर्म-26 संलग्न नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। एक अन्य निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना का पर्चा भी प्रस्तावक नहीं होने के आधार पर खारिज हो गया। इसी बीच कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर तीन आपत्तियां दर्ज कराईं। पुरी को जवाब के लिए शाम पांच बजे तक का समय दिया गया था। खबर लिखे जाने तक इन आपत्तियों पर रिटर्निंग अधिकारी के फैसले की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।

जांच के दिन विधानसभा में क्या-क्या हुआ

मंगलवार दोपहर विधानसभा भवन में नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया चली। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 3 नवंबर को ही जांच की तारीख तय थी। जांच के दौरान रिटर्निंग अधिकारी ने पाया कि भोपाल के समाजसेवी राजकुमार लोहानी ने अपने नामांकन के साथ निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित अनिवार्य शपथ पत्र फॉर्म-26 संलग्न नहीं किया था। इस कमी के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

लोहानी ने 2 नवंबर को नामांकन की अंतिम तारीख पर अपना पर्चा दाखिल किया था। कांग्रेस ने उन्हें समर्थन देने की घोषणा की थी और अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे उनके प्रस्तावक बने थे। नामांकन के समय भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील सहित कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। कांग्रेस की ओर से यह दावा किया गया था कि पार्टी के 10 विधायकों ने लोहानी को समर्थन दिया है।

इसी जांच में तेलंगाना के निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना का नामांकन भी खारिज कर दिया गया। उनके पर्चे के साथ कोई प्रस्तावक नहीं था, इसलिए नियमानुसार उनका नामांकन भी निरस्त माना गया। सायन्ना ने शनिवार को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा था।

फॉर्म-26 क्या है और इसके बिना पर्चा क्यों खारिज होता है

फॉर्म-26 नामांकन के साथ जमा किया जाने वाला अनिवार्य शपथ पत्र है। इसमें उम्मीदवार को अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, देनदारी और शैक्षणिक योग्यता का ब्योरा देना होता है। निर्वाचन आयोग ने इस शपथ पत्र को नामांकन प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाया है, ताकि मतदाताओं को उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

नियमों के अनुसार यदि यह शपथ पत्र नामांकन के साथ संलग्न नहीं है, तो नामांकन अधूरा माना जाता है और जांच के दौरान उसे निरस्त किया जा सकता है। लोहानी के मामले में भी यही हुआ। जांच अधिकारियों ने फॉर्म-26 की अनुपस्थिति को ही खारिज होने का आधार बताया।

कांग्रेस की ओर से इस पर सवाल भी उठाए गए। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि यदि किसी निर्दलीय प्रत्याशी के फॉर्म में छोटी-मोटी त्रुटि हो जाती है, तो उसे सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था। कांग्रेस का यह तर्क है कि मामूली चूक के आधार पर पर्चा खारिज करना सही नहीं है। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने नियमों के अनुसार फैसला लिया।

पुरी के हलफनामे पर कांग्रेस की तीन आपत्तियां

लोहानी का पर्चा खारिज होने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई और उसने भाजपा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर भी आपत्तियां दर्ज कराईं। हेमंत कटारे ने पुरी के शपथ पत्र को लेकर तीन बिंदुओं पर सवाल उठाए। ये सभी कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिन पर रिटर्निंग अधिकारी को फैसला करना है।

पहली आपत्ति पत्नी के नाम और संपत्ति के ब्योरे को लेकर है। कटारे ने आरोप लगाया कि पुरी ने अपने हलफनामे में पत्नी का नाम छिपाया है और इस कॉलम को खाली छोड़ दिया है। कांग्रेस का कहना है कि शपथ पत्र में जीवनसाथी से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य है।

दूसरी आपत्ति विदेशी मुद्रा में संपत्ति दर्शाने को लेकर है। कटारे ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवार को अपनी संपत्ति भारतीय मुद्रा में लिखना अनिवार्य है, लेकिन पुरी ने स्विस फ्रैंक और डॉलर में संपत्ति का उल्लेख किया है। कांग्रेस का आरोप यह भी है कि हलफनामे में जेनेवा स्थित अपार्टमेंट और विदेशी खातों का पूरा विवरण दर्ज नहीं है। नियमों के अनुसार विदेश में स्थित संपत्ति या विदेशी बैंकों में जमा राशि का मूल विदेशी मूल्य और भारतीय रुपये में उसकी विनिमय दर, दोनों का विवरण देना होता है।

तीसरी आपत्ति नोटरी प्रक्रिया की वैधानिकता को लेकर है। कटारे ने कहा कि नामांकन के साथ जमा होने वाले शपथ पत्र को अधिकृत नोटरी पब्लिक या शपथ आयुक्त के समक्ष सत्यापित कराना अनिवार्य होता है, लेकिन पुरी के मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। कांग्रेस ने इसे नोटरी नियमों का उल्लंघन बताया है।

कटारे ने रिटर्निंग अधिकारी से पुरी का नामांकन भी खारिज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि लोहानी का फॉर्म त्रुटियों के आधार पर खारिज किया जा सकता है, तो भाजपा उम्मीदवार के फॉर्म की भी उसी कसौटी पर जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस की रणनीति: पटवारी के बंगले पर बैठक, फिर विधानसभा में आपत्ति

लोहानी का नामांकन खारिज होने की जानकारी मिलते ही कांग्रेस सक्रिय हो गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बंगले पर वरिष्ठ नेताओं और वकीलों की बैठक हुई। इसमें उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, विधायक पीसी शर्मा, विवेक त्रिपाठी, आतिफ अकील और जेपी धनोपिया सहित कई नेता शामिल हुए। बैठक में नामांकन निरस्त किए जाने के कानूनी पहलुओं पर विचार किया गया।

बैठक के बाद कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल विधानसभा पहुंचा और रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। रिटर्निंग अधिकारी ने पुरी से जवाब तलब किया और उन्हें शाम पांच बजे तक का समय दिया। खबर लिखे जाने तक इस आपत्ति पर अंतिम फैसले की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।

भाजपा का पक्ष और अब तक की स्थिति

इस मामले में भाजपा की ओर से आपत्तियों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुरी की ओर से रिटर्निंग अधिकारी को जवाब दिया जाना था, लेकिन खबर लिखे जाने तक उस जवाब और उस पर हुए फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए इस खबर में कांग्रेस के आरोपों को केवल आरोप के तौर पर ही दर्ज किया गया है, तथ्य के तौर पर नहीं।

यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि लोहानी और सायन्ना के पर्चे खारिज होने के बाद भी पुरी की निर्विरोध जीत की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। नाम वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर तय है। यदि उस तारीख तक मैदान में कोई अन्य वैध उम्मीदवार नहीं बचता है, तभी पुरी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकेगा। इससे पहले इस तरह की किसी घोषणा को अंतिम नहीं माना जा सकता।

यह सीट खाली क्यों हुई

मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन ने 13 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। सीट खाली होने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर को उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। इनमें से आठ पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि एक सीट खाली थी। विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 229 है, इसलिए भाजपा के पास इस उपचुनाव में संख्याबल की स्पष्ट बढ़त है। यही वजह है कि पुरी की उम्मीदवारी को पहले से ही मजबूत माना जा रहा था।

अब आगे क्या होगा

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को पूरी हो गई। अब उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे। यदि इसके बाद भी एक से अधिक वैध उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 12 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी होनी है।

यदि 5 नवंबर तक मैदान में केवल पुरी ही वैध उम्मीदवार बचते हैं, तो उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा और मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी। कांग्रेस की आपत्तियों पर रिटर्निंग अधिकारी का फैसला इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।

पृष्ठभूमि: नामांकन के दिन क्या हुआ था

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया था। पुरी ने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था। नामांकन से पहले पुरी भोपाल के करुणाधाम आश्रम भी गए थे।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने 2 नवंबर को अंतिम दिन राजकुमार लोहानी को समर्थन देकर मुकाबला बनाने की कोशिश की थी। लोहानी भोपाल के पुराने शहर के घोड़ा नक्कास इलाके के रहने वाले हैं और मोबाइल एक्सेसरीज का कारोबार करते हैं। उन्होंने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की है। कांग्रेस ने उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतारा था, ताकि भाजपा के खिलाफ सीधा मुकाबला बन सके। लेकिन फॉर्म-26 की कमी ने कांग्रेस की इस रणनीति को झटका दे दिया।

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्यसभा उपचुनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब सबकी नजर रिटर्निंग अधिकारी के फैसले और 5 नवंबर की नाम वापसी की तारीख पर टिकी है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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