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दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में ‘न्यूट्रिनो’ खोजने वाले फ्रांसिस हैल्ज़ेन को भौतिकी नोबेल, ₹11.5 करोड़ पुरस्कार

2026 के भौतिकी नोबेल विजेता फ्रांसिस हैल्ज़ेन फोटो: WIPAC / यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मेडिसन

स्टॉकहोम ब्यूरो। वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मेडिसन के वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्ज़ेन को दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को स्टॉकहोम में इस पुरस्कार की घोषणा की। हैल्ज़ेन को यह सम्मान दक्षिणी ध्रुव पर आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला के विकास और ब्रह्मांड के बाहर से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज में उनके निर्णायक योगदान के लिए मिला है।

इस बार यह पुरस्कार अकेले हैल्ज़ेन को दिया गया है, इसलिए पुरस्कार राशि की पूरी रकम उन्हें ही मिलेगी। वर्ष 2026 में नोबेल पुरस्कार राशि रिकॉर्ड 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 11.5 करोड़ रुपये) रखी गई है। इस वर्ष पुरस्कारों की घोषणा नोबेल फाउंडेशन की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है।

बर्फ को बना दिया ब्रह्मांड की वेधशाला

हैल्ज़ेन का सबसे बड़ा योगदान उनका वह विचार है, जिसने दक्षिणी ध्रुव की बर्फ को ब्रह्मांड की निगरानी करने वाली एक विशाल वेधशाला में बदल दिया। उन्होंने 1988 में पहली बार यह विचार रखा था कि अंटार्कटिका की किलोमीटरों गहरी पारदर्शी बर्फ न्यूट्रिनो जैसे सूक्ष्म कणों को पकड़ने के लिए आदर्श है। इसी सोच पर 2004 से 2011 के बीच आइसक्यूब वेधशाला बनाई गई — करीब एक घन किलोमीटर बर्फ में डूबे 86 सेंसर स्ट्रिंग और 5,160 ऑप्टिकल सेंसर वाली यह दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो वेधशाला है।

आइसक्यूब वेधशाला का आरेख
आइसक्यूब वेधशाला की संरचना — दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में डूबे 86 सेंसर स्ट्रिंग और 5,160 ऑप्टिकल सेंसर। फोटो: कैरेन एंडीन और मैथियास प्लम / आइसक्यूब कोलैबोरेशन (विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY 4.0)

न्यूट्रिनो ऐसे कण हैं जो पृथ्वी और हमारे शरीर के आर-पार बिना रुके गुजर जाते हैं। जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ में किसी परमाणु के नाभिक से टकराता है, तो प्रकाश की एक चमक पैदा होती है, जिसे बर्फ में लगे सेंसर पकड़ लेते हैं। ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक कण-त्वरक मौजूद हैं, जो धरती की प्रयोगशालाओं में पैदा होने वाले कणों से लाखों गुना अधिक ऊर्जा वाले कण छोड़ते हैं — और न्यूट्रिनो ही इनके स्रोतों तक पहुंचने का एकमात्र जरिया हैं, क्योंकि ये बिना दिशा बदले और बिना ऊर्जा गंवाए हम तक पहुंचते हैं।

2013 की वह खोज जिसने खगोल विज्ञान बदल दिया

2013 में आइसक्यूब ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की, जब इसने हमारी आकाशगंगा के बाहर से आ रहे उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की साफ-साफ पहचान की। आइसक्यूब हर साल एक लाख से अधिक न्यूट्रिनो दर्ज करता है। बाद के शोध में इनके पहले स्रोतों की पहचान भी हुई — सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्रों में स्थित महाविशाल ब्लैक होल। इस खोज ने न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान नामक एक नए विज्ञान की नींव रखी।

1944 में बेल्जियम के टिएनन में जन्मे हैल्ज़ेन ने 1969 में केयू ल्यूवेन से पीएचडी की और वे आइसक्यूब परियोजना के प्रधान अन्वेषक हैं। उन्होंने 570 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित किए हैं और उन्हें बाल्ज़न पुरस्कार (2015) समेत कई अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

10 दिसंबर को मिलेगा पदक, कल रसायन का नोबेल

नोबेल पदक स्वीडन के राजा 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में प्रदान करेंगे। बता दें कि सोमवार को चिकित्सा का नोबेल ऑप्टोजेनेटिक्स पर शोध के लिए तीन वैज्ञानिकों को दिया गया था, जबकि रसायन विज्ञान के नोबेल की घोषणा बुधवार (7 अक्टूबर) को होगी।

स्रोत: नोबेल पुरस्कार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (nobelprize.org); तथ्य रॉयटर्स, इनशॉर्ट्स और विकिपीडिया से सत्यापित।

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