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MSP पर धान-ज्वार-बाजरा उपार्जन के लिए 8.77 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन, खरीफ 2026-27 की खरीदी की तैयारी

सांकेतिक चित्र — अनाज मंडी में धान के बोरे

भोपाल ब्यूरो।

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, ज्वार और बाजरा के उपार्जन की तैयारी जोरों पर है। प्रदेश में अब तक 8.77 लाख से अधिक किसानों ने उपार्जन के लिए अपना पंजीयन कराया है। पंजीयन की प्रक्रिया ई-उपार्जन पोर्टल और प्रदेशभर में बनाए गए पंजीयन केंद्रों के माध्यम से पूरी की गई। अब सरकार का फोकस खरीदी केंद्रों पर सुचारु व्यवस्था और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने पर है।

समर्थन मूल्य पर खरीदी किसानों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इससे उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम तय मूल्य मिलने की गारंटी रहती है। बाजार में कीमत कम होने पर भी किसान को नुकसान नहीं उठाना पड़ता।

कितने किसानों ने कराया पंजीयन

सरकारी जानकारी के अनुसार, धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए 8.77 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन हुआ है। यह संख्या बताती है कि प्रदेश के किसानों में समर्थन मूल्य पर फसल बेचने को लेकर जागरूकता बढ़ी है और पंजीयन व्यवस्था तक उनकी पहुंच भी बेहतर हुई है।

पंजीयन के दौरान किसानों के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का परीक्षण किया गया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि खरीदी वास्तविक किसानों से ही हो और बिचौलियों या फर्जी पंजीयन की गुंजाइश न रहे।

कौन सी फसलों की होगी खरीदी

इस बार के खरीफ विपणन वर्ष में तीन फसलों — धान, ज्वार और बाजरा — का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया जाएगा। धान प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसल है और सबसे अधिक किसान धान की खेती करते हैं। ज्वार और बाजरा मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं, जिनकी खेती प्रदेश के कई जिलों में होती है।

मोटे अनाजों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, क्योंकि ये अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और कम पानी में भी उगाए जा सकते हैं। समर्थन मूल्य पर इनकी खरीदी से मोटे अनाज उगाने वाले किसानों को भी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

पंजीयन की व्यवस्था कैसी रही

किसानों के पंजीयन के लिए प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केंद्र बनाए गए थे। निःशुल्क पंजीयन की व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों के अलावा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर की गई थी।

सशुल्क पंजीयन की सुविधा एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर उपलब्ध थी। सशुल्क पंजीयन के लिए प्रति पंजीयन 50 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जा सका। इससे किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

पंजीयन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई थी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराने का आह्वान किया था, ताकि उन्हें बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

AgriStack ID से पहली बार सत्यापन

इस बार के पंजीयन में एक बड़ा बदलाव यह रहा कि पहली बार किसानों के पंजीयन के लिए AgriStack ID का इस्तेमाल किया गया। इस ID के जरिए किसान की जमीन के विवरण का सत्यापन किया जा सका। इससे यह पक्का हुआ कि धान और मोटे अनाज की खरीद असली किसानों से ही समर्थन मूल्य पर हो।

AgriStack ID के इस्तेमाल से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। पहले पंजीयन केंद्रों पर ऑपरेटरों द्वारा एक किसान की जमीन का विवरण दूसरे किसान के पंजीयन में जोड़ने जैसी अनधिकृत गतिविधियों की शिकायतें मिलती थीं। नई व्यवस्था में इस तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश काफी कम हो गई है। साथ ही, यह खरीदी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को खत्म करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

पंजीयन के दौरान सामने आ रही तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने जिला अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा की थी। बैठक का मकसद तकनीकी समस्याओं को हल करना, किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाना और यह पक्का करना था कि प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी हो जाए।

सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसान

पंजीयन व्यवस्था में सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का भी विशेष ध्यान रखा गया। इन श्रेणियों के किसानों के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति और सहकारी विपणन संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर उपलब्ध थी। इन सभी किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

यह व्यवस्था इसलिए जरूरी है क्योंकि ये किसान अक्सर अपनी जमीन पर नहीं, बल्कि दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं या वन भूमि के पट्टे पर निर्भर रहते हैं। उनके हितों की रक्षा के लिए अलग से सत्यापन की प्रक्रिया रखी गई है, ताकि उन्हें भी समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।

किसानों को क्या फायदा होगा

समर्थन मूल्य पर खरीदी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को अपनी फसल का तय न्यूनतम मूल्य मिलने की गारंटी रहती है। बाजार में कीमत गिरने पर भी किसान को नुकसान नहीं उठाना पड़ता। पंजीयन के बाद खरीदी केंद्रों पर किसान अपनी उपज बेच सकेंगे और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचेगा।

इससे बिचौलियों पर निर्भरता भी घटेगी। पहले कई बार किसान अपनी फसल बिचौलियों को कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाते थे। समर्थन मूल्य की व्यवस्था से उन्हें बाजार में सौदेबाजी की ताकत भी मिलती है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि सरकार उनकी फसल को एक तय मूल्य पर खरीदेगी।

अब आगे क्या होगा

पंजीयन पूरा होने के बाद अब उपार्जन की तैयारियां चल रही हैं। खरीदी केंद्रों पर तौल, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उपज को सही तरीके से सुखाकर और साफ करके ही खरीदी केंद्रों पर लाएं, ताकि उन्हें सही मूल्य मिल सके और तौल में कोई परेशानी न हो।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या किसानों को परेशानी होने पर संबंधित अधिकारी कार्रवाई करेंगे। किसानों को अपनी समस्याओं के लिए संबंधित केंद्र के अधिकारियों या जिला प्रशासन से संपर्क करना चाहिए।

खरीफ उपार्जन क्यों है अहम

खरीफ सीजन प्रदेश के किसानों के लिए साल का सबसे बड़ा फसल सीजन है। धान, ज्वार और बाजरा की अच्छी खरीदी से किसानों की आय में सीधा असर पड़ता है। साथ ही, इससे प्रदेश में खाद्यान्न की उपलब्धता भी सुनिश्चित होती है, जिसका फायदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आम उपभोक्ताओं को मिलता है।

पिछले वर्षों में भी प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था रही है, लेकिन इस बार पंजीयन में AgriStack ID के इस्तेमाल और सख्त सत्यापन से व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है। अगर यह व्यवस्था सुचारु रूप से चलती है, तो आने वाले वर्षों में भी किसानों का भरोसा इस पर और बढ़ेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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