इंदौर ब्यूरो। इंदौर के श्री सिद्धि विनायक विद्या मंदिर में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए जा रहे हैं। निमाड़ का प्राचीन पर्व संजा माता शहर से लुप्त होता जा रहा है, लेकिन इस विद्यालय ने आने वाली पीढ़ी तक इस परंपरा को पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।
श्राद्ध पक्ष के 16 दिन छात्राओं ने बनाया संजा माता का माँड़ना
विद्यालय की प्राचार्य विमला मनाग्रे द्वारा स्कूल परिसर में श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों तक छात्राओं से गोबर से संजा माता बनवाई गई। इन 16 दिनों में छात्राओं ने संजा माता के निमाड़ी गीत भी गाए। प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी अंतिम दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

अंतिम दिवस सांसद शंकर लालवानी हुए शामिल
कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर सांसद शंकर लालवानी पर्व में शामिल हुए। उन्होंने छात्राओं द्वारा बनाई गई संजा माता की आरती की और निमाड़ी लोकगीतों के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सांसद लालवानी ने संजा माता पर्व के बारे में चर्चा की और बच्चियों का उत्साहवर्धन किया।
लुप्त हो रही परंपरा को जिंदा रखने की कोशिश
संजा माता निमाड़-मालवा का प्राचीन लोकपर्व है, जिसमें श्राद्ध पक्ष के दिनों में कुंवारी कन्याएं गोबर से दीवारों पर संजा माता की आकृतियां (माँड़ना) बनाती हैं और संध्या के समय निमाड़ी गीत गाकर उनकी पूजा करती हैं। शहरीकरण के साथ यह परंपरा शहरों से लुप्त होती जा रही है। ऐसे में विद्यालय का यह प्रयास नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
