Headlines

इंदौर में MGM मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का चरणबद्ध आंदोलन तेज: काली पट्टी के बाद 27-28 को पेन-डाउन, 29-30 को रूटीन सेवाएं ठप — जानें पूरी मांगें

Symbolic image — representative view of a medical college hospital building

इंदौर ब्यूरो

इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज और शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय (GDC) के डॉक्टरों का चरणबद्ध आंदोलन तेज हो गया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (MTA) के आह्वान पर गुरुवार, 22 अक्टूबर को डॉक्टरों ने ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। एसोसिएशन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार काली पट्टी का यह चरण 24 अक्टूबर तक जारी रहेगा, इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 1 से 2 बजे तक एक घंटे का पेन-डाउन विरोध होगा, जबकि 29 और 30 अक्टूबर को रूटीन चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी।

एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से लंबित 12 सूत्री मांगों पर कोई सुनवाई न होने के कारण यह आंदोलन अपरिहार्य हो गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राहुल रोकड़े ने कहा है कि एसोसिएशन अपनी मांगों के समाधान को लेकर प्रतिबद्ध है और संवाद के लिए तैयार है। हालांकि, मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण डॉक्टरों को चरणबद्ध विरोध का रास्ता अपनाना पड़ा।

आंदोलन का पूरा शेड्यूल: काली पट्टी से पेन-डाउन तक

MTA की आम सभा में मंजूर कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 22 से 24 अक्टूबर तक डॉक्टर ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। दूसरे चरण में 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक एक घंटे का पेन-डाउन विरोध होगा, यानी इस एक घंटे में डॉक्टर कलम नहीं उठाएंगे। तीसरे और सबसे कड़े चरण में 29 और 30 अक्टूबर को रूटीन चिकित्सा सेवाएं बंद रहेंगी।

एसोसिएशन ने यह भी तय किया है कि 29 और 30 अक्टूबर को मरीजों को असुविधा कम से कम हो, इसके लिए समानांतर ओपीडी सेवाएं चलाई जाएंगी। एसोसिएशन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इमरजेंसी सेवाएं पूरे आंदोलन के दौरान निर्बाध रूप से जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

किन अस्पतालों पर पड़ेगा असर, इमरजेंसी सेवाएं जारी

इस आंदोलन में MGM मेडिकल कॉलेज और GDC से जुड़े प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टर शामिल हैं। इनमें एमवाय अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, महाराजा तुकोजीराव अस्पताल, कैंसर अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, मानसिक अस्पताल, मनोरमा राजे टीबी अस्पताल और शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टर शामिल हैं।

गौरतलब है कि ये सभी अस्पताल इंदौर के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ हैं और यहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। 29 और 30 अक्टूबर को रूटीन सेवाएं बंद रहने से नियमित जांच, नियोजित सर्जरी और सामान्य ओपीडी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि एसोसिएशन ने समानांतर ओपीडी चलाने का फैसला किया है, जिससे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। इमरजेंसी सेवाएं, जैसा कि एसोसिएशन ने कहा है, पूरी तरह चालू रहेंगी।

12 सूत्री मांगपत्र: डीएसीपी से सातवें वेतन आयोग के बकाए तक

MTA का 12 सूत्री मांगपत्र मुख्य रूप से सेवा शर्तों, पदोन्नति और बकाया भुगतान से जुड़ा है। प्रमुख मांगों में लंबित डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) मामलों का निपटारा, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और अन्य विभागों में पदोन्नति लाभ, लंबित ग्रेच्युटी और सातवें वेतन आयोग के बकाए का भुगतान, तथा समयबद्ध वेतनमान का क्रियान्वयन शामिल है।

इसके अलावा एसोसिएशन ने शासकीय नियमों के अनुसार SC/ST डॉक्टरों के लिए बेंचमार्क मानदंडों में छूट, सर्विस बुक सत्यापन का काम पूरा करने, GDC में महिला डॉक्टरों के लिए चाइल्ड केयर लीव, विदेश यात्रा आवेदनों का समयबद्ध अनुमोदन और वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) तक पहुंच की मांग भी रखी है। मांगपत्र में आयुष्मान प्रोत्साहन राशि का समान वितरण और लंबित राशि का भुगतान, साथ ही परिसर में डॉक्टरों के लिए आवासीय परिसर के निर्माण की मांग भी शामिल है।

पृष्ठभूमि: अप्रैल का आंदोलन और छह महीने की सुनवाई का इंतजार

यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ है। एसोसिएशन के अनुसार प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने 21 अप्रैल 2026 से 12 सूत्री मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की थी। बाद में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के साथ हुई सकारात्मक चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था, लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि उस आश्वासन के बाद मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार पिछले छह महीनों में उप मुख्यमंत्री, स्वायत्त संस्था के आयुक्त-सह-अध्यक्ष, MGM मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता और GDC के प्राचार्य को बार-बार अभ्यावेदन दिए गए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के बाद आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया। एसोसिएशन ने कहा है कि वह शीघ्र समाधान के लिए संवाद के लिए खुला है और स्वायत्त संस्था के आयुक्त-सह-अध्यक्ष से बैठक का समय मांगा है।

दो धड़े आमने-सामने: MTA बनाम विरोधी शिक्षक

इस आंदोलन को लेकर मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों में मतभेद भी सामने आए हैं। 16 अक्टूबर को कुछ मेडिकल शिक्षकों के एक समूह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वे 22 अक्टूबर से शुरू हो रहे आंदोलन में भाग नहीं लेंगे। MTA ने आरोप लगाया कि MGM मेडिकल कॉलेज के सात-आठ शिक्षकों ने सार्वजनिक रूप से आंदोलन से दूरी बनाकर भ्रम फैलाया।

वहीं विरोधी समूह का दावा है कि 50 से 60 प्रतिशत डॉक्टरों को वेतन बकाया मिल चुका है, अधिकांश DACP प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है और कई सेवा अभिलेखों का सत्यापन हो चुका है। इस समूह का यह भी कहना है कि पिछले छह महीनों में आयुष्मान प्रोत्साहन राशि डॉक्टरों, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के बीच वितरित की गई है। यानी एक ओर एसोसिएशन मांगों के लंबित होने की बात कह रहा है, तो दूसरी ओर एक समूह का कहना है कि कई मांगों पर काम हो चुका है — इस मतभेद के बीच तथ्यों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर ही हो सकेगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई और बर्खास्तगी के आरोप भी उठे

MTA ने अपने अध्यक्ष और वरिष्ठ मेडिकल शिक्षकों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक बताते हुए इसका भी विरोध किया है। एसोसिएशन के अनुसार डॉ. भावेश बांग की लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि का मामला उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अटका हुआ है, वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ अनियमित जांच के आरोप हैं और डॉ. वर्षा अर्गल की बर्खास्तगी कार्यकारी समिति की मंजूरी के बिना की गई।

ये सभी दावे एसोसिएशन की ओर से रखे गए हैं। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। निष्पक्षता के तकाजे के तहत यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि बाकी है और मामले से जुड़े सभी पक्षों का रुख सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

आगे क्या: संवाद की उम्मीद, मरीजों की चिंता

फिलहाल आंदोलन का पहला चरण चल रहा है और 29-30 अक्टूबर का तीसरा चरण सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि उस दौरान रूटीन सेवाएं बंद रहेंगी। एसोसिएशन ने संवाद की इच्छा जताई है और प्रशासन से बैठक का समय मांगा है, ऐसे में अगले कुछ दिनों में बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

वहीं मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह जानना जरूरी है कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी और 29-30 अक्टूबर को समानांतर ओपीडी भी चलेगी। फिर भी, नियोजित इलाज और नियमित जांच के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे पहले अस्पताल प्रशासन से संपर्क कर लें। यह आंदोलन सरकारी चिकित्सा शिक्षा तंत्र में शिक्षकों की सेवा शर्तों जैसे बड़े मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है, और इसका समाधान बातचीत से निकलता है या आंदोलन और तेज होता है — यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार